बसंत उत्सव हर समाज अपने तरीके से मनाता है। कोई पूजा करता है तो कोई भोजन करवाता है। मान्यता है कि विद्या और संगीत की देवी माता सरस्वती का जन्म वसंत पंचमी के दिन हुआ था। इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प कला की देवी माना जाता है। इस दिन को श्रीपंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है।
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सभी समाज अलग-अलग रूप से मनाते हैं वसंत पंचमी पर्व
Sun, 10 Feb 2019 04:50 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 10 Feb 2019 04:50 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
डेमो पिक
बंगाली समाज मूर्ति रखकर पूजा करता है
स्वरूप नगर निवासी अमिताभ बासु ने बताया कि सरस्वती माता की पूजा करते हैं और उनसे विद्या और ज्ञान मांगते है। समाज के सभी लोग मूर्ति रखकर घर में पूजा-अर्चना करते हैं। फल, दूध की मिठाई का भोग लगाते हैं और इसी प्रसाद को वितरित करते हैं। शाम को माता का गुणगान होता है।
स्वरूप नगर निवासी अमिताभ बासु ने बताया कि सरस्वती माता की पूजा करते हैं और उनसे विद्या और ज्ञान मांगते है। समाज के सभी लोग मूर्ति रखकर घर में पूजा-अर्चना करते हैं। फल, दूध की मिठाई का भोग लगाते हैं और इसी प्रसाद को वितरित करते हैं। शाम को माता का गुणगान होता है।
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पंजाबी समाज शबद कीर्तन करता है
गुरुद्वारा भाई बन्नो साहिब जीटी रोड के प्रधान जसवंत सिंह ने बताया कि वसंत पंचमी के दिन पतंग उड़ाई जाती है। विशेषकर पंजाब में अधिकांश लोग पतंगबाजी पर्व में भाग लेते हैं। कानपुर में गुरुद्वारों में सुबह शबद कीर्तन होता है। वसंत पंचमी केशबद पढ़े जाते हैं। प्रसाद वितरित होता है।
गुरुद्वारा भाई बन्नो साहिब जीटी रोड के प्रधान जसवंत सिंह ने बताया कि वसंत पंचमी के दिन पतंग उड़ाई जाती है। विशेषकर पंजाब में अधिकांश लोग पतंगबाजी पर्व में भाग लेते हैं। कानपुर में गुरुद्वारों में सुबह शबद कीर्तन होता है। वसंत पंचमी केशबद पढ़े जाते हैं। प्रसाद वितरित होता है।
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विश्नोई समाज बसंती गुलदस्ता भेंट कर भोग लगाता है
विश्नोई समाज के ज्ञानेंद्र विश्नोई ने बताया कि सुबह स्नानादि के बाद सरस्वती देवी का पूजन करते हैं। भगवान को बसंत का गुलदस्ता अर्पित कर बसंती प्रसाद का भोग लगाते हैं। इसमें प्रमुख रूप से बसंती मक्खन, बसंती पेड़े, बसंती बताशों का भोग लगाया जाता है। शाम को पूड़ी सब्जी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
विश्नोई समाज के ज्ञानेंद्र विश्नोई ने बताया कि सुबह स्नानादि के बाद सरस्वती देवी का पूजन करते हैं। भगवान को बसंत का गुलदस्ता अर्पित कर बसंती प्रसाद का भोग लगाते हैं। इसमें प्रमुख रूप से बसंती मक्खन, बसंती पेड़े, बसंती बताशों का भोग लगाया जाता है। शाम को पूड़ी सब्जी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
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महाराष्ट्र समाज एकाधिकार न हो की कामना करता है
महाराष्ट्र समाज के प्रकाश खरवड़कर ने बताया कि सरस्वती माता ऐश्वर्य की देवी है। इसका कारण है कि ऐश्वर्य ज्ञान और शांति से ही मिलता है। यह आने पर अहंकार भी आ जाता है। ऐसे में एकाधिकार न हो इसकी कामना अवश्य करते हैं। सुबह पूजा-अर्चना के समय घर के सभी लोग एकत्र होकर ज्ञान, शांति और ऐश्वर्य की कामना करते हुए आशीर्वाद लेते हैं।
महाराष्ट्र समाज के प्रकाश खरवड़कर ने बताया कि सरस्वती माता ऐश्वर्य की देवी है। इसका कारण है कि ऐश्वर्य ज्ञान और शांति से ही मिलता है। यह आने पर अहंकार भी आ जाता है। ऐसे में एकाधिकार न हो इसकी कामना अवश्य करते हैं। सुबह पूजा-अर्चना के समय घर के सभी लोग एकत्र होकर ज्ञान, शांति और ऐश्वर्य की कामना करते हुए आशीर्वाद लेते हैं।