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बैंकर्स ने पुलिस के खिलाफ निकाली भड़ास, जानिए पूरा मामला
Mon, 13 Apr 2020 03:16 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 13 Apr 2020 03:16 PM IST
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आशीष मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
बैंकर्स हैं, पुलिस नहीं, यह टैग लाइन रविवार को सोशल मीडिया और खबरों की ट्रेंडिंग में टॉप पर रही। दरअसल, इस टैग लाइन के जरिए देश भर के बैंकर्स ने पुलिस के उस रवैये का विरोध किया, जिसमें बैंक के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने पर बैंकर्स को ही जिम्मेदार ठहरा दिया गया।
बीते दिनों केंद्र व राज्य सरकार की ओर से मजदूरों, किसानों और जरूरतमंदों और जनधन खातों में राहत राशि पहुंची तो उसे निकालने के लिए बड़ी संख्या में खाताधारक बैंकों में उमड़ पड़े। हालांकि बैंक के अंदर एक, दो करके ही लोगों को प्रवेश मिला लेकिन बैंकाें के बाहर लाइनें लगी रहीं।
इस पर उत्तर प्रदेश समेत कुछ राज्यों में बैंकों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने पर पुलिस की ओर से बैंकों के प्रबंधकों को ही दोषी माना जा रहा है। पुलिस के इस रवैसे से नाराज होकर बैंक कर्मियों के संगठन वी बैंकर्स ने ट्विटर पर बैंकर्स हैं, पुलिस नहीं, लिखकर इसका विरोध किया।
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देखते ही देखते सभी बैंकर्स इसे शेयर और रीट्वीट करने लगे। बैंकर्स ने कहा कि जो काम पुलिस का है, वे करे। हमें बैंक के अंदर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखनी हैं। वैसे भी हर बैंक में एक चौथाई स्टाफ ही काम कर रहा है।
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बीते दिनों केंद्र व राज्य सरकार की ओर से मजदूरों, किसानों और जरूरतमंदों और जनधन खातों में राहत राशि पहुंची तो उसे निकालने के लिए बड़ी संख्या में खाताधारक बैंकों में उमड़ पड़े। हालांकि बैंक के अंदर एक, दो करके ही लोगों को प्रवेश मिला लेकिन बैंकाें के बाहर लाइनें लगी रहीं।
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इस पर उत्तर प्रदेश समेत कुछ राज्यों में बैंकों के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने पर पुलिस की ओर से बैंकों के प्रबंधकों को ही दोषी माना जा रहा है। पुलिस के इस रवैसे से नाराज होकर बैंक कर्मियों के संगठन वी बैंकर्स ने ट्विटर पर बैंकर्स हैं, पुलिस नहीं, लिखकर इसका विरोध किया।
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देखते ही देखते सभी बैंकर्स इसे शेयर और रीट्वीट करने लगे। बैंकर्स ने कहा कि जो काम पुलिस का है, वे करे। हमें बैंक के अंदर व्यवस्थाएं दुरुस्त रखनी हैं। वैसे भी हर बैंक में एक चौथाई स्टाफ ही काम कर रहा है।
पुलिस ने फतेहपुर में एक बैंक अफसर को गालियां दीं। कानपुर में समाचार पत्र वितरकों को पीटा। पुलिस हर वह काम कर रही है जो नहीं करना चाहिए। बैंकर्स और पत्रकारों को पुलिस की तरफ से कोई मदद नहीं मिलती है। डॉक्टर्स और पुलिस को सरकार सुविधाएं दे रही हैं, लेकिन बैंकरों को नहीं। हर बैंक में एक चौथाई स्टाफ काम पर है, ऐसे में कैसे संभव कि दो, चार लोग खड़े होकर लोगों को लाइन में लगवाएं। बैंकों के बाहर कानून व्यवस्था और सोशल डिस्टेंसिंग की जिम्मेदारी पुलिस की है, जिसमें वह नाकाम है। - आशीष मिश्रा, प्रदेश महामंत्री वी बैंकर्स