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7800 करोड़ के बैंक घोटाले का मामला: आरोपी उदय देसाई को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
Wed, 11 Aug 2021 12:03 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 11 Aug 2021 12:03 AM IST
सार
22 अगस्त को कोर्ट में दोबारा समर्पण करना था लेकिन इसके पहले ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ जाने से अब उसे दोबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा।
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उदय देसाई
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
7800 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में आरोपी फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के निदेशक व हीरा कारोबारी उदय देसाई को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। लगभग एक साल तक जेल में बंद रहने के बाद कोरोना काल के दौरान बंदियों को मिलने वाली अंतरिम जमानत/पैरोल का सहारा लेकर उदय को भी कानपुर कोर्ट से 22 जून को दो माह की अंतरिम जमानत मिल गई थी।
22 अगस्त को कोर्ट में दोबारा समर्पण करना था लेकिन इसके पहले ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ जाने से अब उसे दोबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा। हाईकोर्ट से 25 मार्च को जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उदय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दाखिल की गई थी।
इस याचिका में दाखिल किए गए शपथपत्र से ही सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) को उदय देसाई को अंतरिम जमानत मिलने की जानकारी हुई थी। जिला न्यायालय के अंतरिम जमानत आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी लेकिन इसके निस्तारण के पहले ही सुप्रीम कोर्ट में उदय द्वारा दाखिल याचिका का निस्तारण हो गया और सुप्रीम कोर्ट ने उदय की जमानत पर रिहाई के निर्देश जारी कर दिए।
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उदय ने याचिका में अपनी वृद्धावस्था और गंभीर बीमारी से ग्रसित होने का तर्क रखा था। साथ ही जिला न्यायालय में चलने वाली लंबी न्यायिक प्रक्रिया का भी हवाला देकर मुकदमे की सुनवाई तक जमानत पर रिहा करने की मांग की थी।
क्या है मामला
कमोडिटीज एंड मर्चेंट ट्रेडिंग का व्यापार करने वाली फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा मोहन स्टील लिमिटेड के निदेशक व ऑडिट कमेटी के चेयरमैन रहे उदय देसाई पर कंपनी खातों में हेरफेर कर बैंकों से लगभग 7820 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस की ओर से 15 मई 2020 को कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें उदय देसाई के साथ उनके बेटे सुजय देसाई भी आरोपी हैं। उदय को जमानत मिल गई है लेकिन सुजय अभी जेल में ही बंद हैं।
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22 अगस्त को कोर्ट में दोबारा समर्पण करना था लेकिन इसके पहले ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ जाने से अब उसे दोबारा जेल नहीं जाना पड़ेगा। हाईकोर्ट से 25 मार्च को जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उदय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दाखिल की गई थी।
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इस याचिका में दाखिल किए गए शपथपत्र से ही सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) को उदय देसाई को अंतरिम जमानत मिलने की जानकारी हुई थी। जिला न्यायालय के अंतरिम जमानत आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी लेकिन इसके निस्तारण के पहले ही सुप्रीम कोर्ट में उदय द्वारा दाखिल याचिका का निस्तारण हो गया और सुप्रीम कोर्ट ने उदय की जमानत पर रिहाई के निर्देश जारी कर दिए।
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उदय ने याचिका में अपनी वृद्धावस्था और गंभीर बीमारी से ग्रसित होने का तर्क रखा था। साथ ही जिला न्यायालय में चलने वाली लंबी न्यायिक प्रक्रिया का भी हवाला देकर मुकदमे की सुनवाई तक जमानत पर रिहा करने की मांग की थी।
क्या है मामला
कमोडिटीज एंड मर्चेंट ट्रेडिंग का व्यापार करने वाली फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा मोहन स्टील लिमिटेड के निदेशक व ऑडिट कमेटी के चेयरमैन रहे उदय देसाई पर कंपनी खातों में हेरफेर कर बैंकों से लगभग 7820 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
सीरियस फ्रॉड इंवेस्टिगेशन ऑफिस की ओर से 15 मई 2020 को कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें उदय देसाई के साथ उनके बेटे सुजय देसाई भी आरोपी हैं। उदय को जमानत मिल गई है लेकिन सुजय अभी जेल में ही बंद हैं।