Bangladeshi Citizen Case: डॉ. रिजवान के खिलाफ नहीं मिले जासूसी के सुबूत, सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटीं
बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान के खिलाफ पुलिस चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। हालांकि पुलिस को अब तक जासूसी करने के पुख्ता सुबूत नहीं मिल सके हैं। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां जांच में लगी हैं। यदि सुबूत मिलता है,तो पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
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कानपुर में परिवार संग जेल भेजे गए बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान के मामले में पुलिस को अब तक जासूसी करने के पुख्ता सुबूत नहीं मिल सके हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में जांच कर रही है। डॉ. रिजवान के खिलाफ फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी, दस्तावेजों का प्रयोग करना, विदेशी अधिनियम में एफआईआर दर्ज की गई थी।
इसी मामले में पुलिस ने उसके पूरे परिवार को जेल भेजा। इसके बाद में मादक पदार्थ का एक मुकदमा और मूलगंज में दर्ज कराया गया, जिसे कोहना ट्रांसफर कर दिया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जासूसी को लेकर धारा 121 के तहत कार्रवाई होती है, जो इस केस में अभी नहीं लगाई गई है।
सूत्र बताते हैं कि इस धारा के लिए शासन से अनुमति लेनी होती है। हालांकि उसके लिए पुख्ता सबूत मिलना जरूरी है। ऐसे में रास्ता सिर्फ यही है कि जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई है उसके सबूत पुख्ता है। उसी में पुलिस चार्जशीट दाखिल करेगी।
इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों की मदद से जासूसी का सुबूत मिलता है, तो शासन की अनुमति से धारा 121 लगाकर उस पर फिर पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। बता दें कि एजेंसियां बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान के पाकिस्तान कनेक्शन की जांच कर रही हैं।
बता दें कि मूलरूप से बांग्लादेश के कुरला निवासी डॉ. रिजवान मोहम्मद, उसकी पत्नी हिना, ससुर खालिद, बेटी रुखसार, एक नाबालिग बेटे (17) को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। यह लोग वर्ष 2016 से यहां छिपकर रह रहे थे। जासूसी मामले में भी इनकी जांच की जा रही है।
डॉ. रिजवान मोहम्मद और उसके परिवार ने सपा विधायक इरफान सोलंकी और एक पार्षद द्वारा दिए प्रमाण पत्र के आधार पर आधार कार्ड बनवाया था। ऐसे में विधायक इरफान की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जांच के बाद इस मामले में भी पुलिस उन्हें आरोपी बना सकती है।