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Banda: जाली 500 के नोट खपाने की थी तैयारी, पहले ही प्रयास में धरे गए, दो गिरफ्तार

Sun, 04 Jan 2026 05:41 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 04 Jan 2026 05:41 PM IST
सार

दोनों अपराधियों के पास से 225 भारतीय मुद्रा के 500 के नोट बरामद हुए। बांदा के एक अपराधी ने नोट खपाने की जिम्मेदारी ली थी। 

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Banda:  Attempt to circulate counterfeit 500 rupee notes foiled, two arrested in the first attempt
पुलिस की गिरफ्त में जाली नोटों के सौदागर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर कोतवाली पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने व उसे बाजार में खपाने वाले संगठित अंतरजनपीय गिराेह का भंडाफोड़ करते हुए महोबा के कबरई के रहने वाले दो अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, उनके पास से एक लाख 12 हजार 500 रुपये के रूप में 225 भारतीय मुद्रा (500 रुपये) के जाली नोट बरामद किए हैं। यह अपराधी बांदा की बाजार में नोट खपाने की तैयारी में थे। इस बीच पुलिस को जानकारी लग गई और पकड़ लिए गए। इनमें अभी दो अन्य अपराधी वांछित बताए जा रहे हैं। उनके नाम पुलिस ने नहीं खोले हैं।
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सहायक पुलिस अधीक्षक मेविस टॉक ने बताया कि पुलिस को सूत्र से जानकारी हुई कि दो लोग कोतवाली नगर के कनवारा चौराहे के पास महोबा रोड की ओर से नकली भारतीय मुद्रा लेकर आ रहे हैं। उन्हें बाजार में खपाने की फिराक में हैं। इस पर कोतवाली व एसओजी पुलिस ने संदिग्धों की चेकिंग की। चेकिंग में महोबा जनपद के कबरई गांव निवासी राजाराम व इसी थाना क्षेत्र के पिडारी गांव के राहुल सिंह को गिरफ्तार किया है। उनके पास से एक लाख 12 हजार 500 रुपये (500 के 225 नकली भारतीय मुद्रा) बरामद किए हैं। जांच में सभी नकली नोटों पर एक ही सीरियल नंबर अंकित मिला। उनकी निशानदेही पर गांव से नकली नोट बनाने की प्रयुक्त उपकरण, सामग्री, प्रिंटर, विभिन्न रंगों की सियाही बोतलें (ब्लैक, सायन, मैजेंटा), कटर, फ्रेम, टेप, ब्रश, इमल्शन, डाई, पीवीसी शीट, विशेष प्रकार के कागज व अन्य तकनीकी सामग्री बरामद हुई। इसी की सहायता से नकली भारतीय मुद्रा तैयार की जा रही थी। आरोपियों ने बताया कि वह असली 500 रुपये के नोटों का उपयोग कर उनकी नकल तैयार करते थे। इसे सुनियोजित तरीके से इन्हें बाजार में चलाने की योजना बना रहे थे। मेविस टॉक का कहना है कि इनके अन्य सहयोगियों तथा गिरोह के नेटवर्क के बारे में जांच की जा रही है।
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दुकानदार ने एक ही सीरियल के 500-500 के दो नोट देखकर पुलिस को दी थी जानकारी
शहर में जाली नोट खपाने का यह मामला एक बुजुर्ग व्यक्ति से संज्ञान में आया। वह बुजुर्ग व्यक्ति शहर की बाजार में सौदा लेने गए थे। दुकानदार को उन्होंने 500-500 के दो नोट दिए। दोनों नोटों में एक ही सीरियल नंबर अंकित होने पर दुकानदार को शक हुआ। उसने कोतवाली पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बुजुर्ग व्यक्ति से पूछताछ की तो उन्होंने नोट को अमुक व्यक्ति से मिलना बताया। इस तरह से पुलिस असली अपराधियों तक पहुंची। जिससे पूरे मामले का खुलासा हो सका।
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नोट छापने के लिए ए-4 साइज के कागज का इस्तेमाल, प्रिंट साफ सुथरा
पुलिस जांच में सामने आया है कि अपराधी नोट छापने के लिए नार्मल ए-4 साइज का कागज इस्तेमाल रहे थे। उनकी सियाही और प्रिंट बहुत ही साफ था। इसके अलावा यह सीरियल नंबर भी सभी नोटों में एक ही डाले थे। हालांकि कागज की क्वालिटी सही नहीं थी। अगर सही तरीके से नोट की जांच न की जाती तो शायद यह बाजार में खप गया होता। इन अपराधियों को मकसद छोटे जिलों में नोट खपाने का था। इसलिए इन्होंने सबसे पहले बांदा की मार्केट को पकड़ा था। बाद में महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर में भी नोट खपाने की तैयारी में थे। हालांकि पहले ही प्रयास में यह धरे गए।


हिस्ट्रीशीटर गुरू की तर्ज पर चल रहे थे चेले, पकड़े गए
हिस्ट्रीशीटर गुरू के तर्ज पर चल रहे थे चेले पर पुलिस की निगाह से बच नहीं सके। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बताया कि वर्ष 2012 में हिस्ट्रीशीटर तुषार गुप्ता के नाम के व्यक्ति को एसटीएफ ने जाली नोट के मामले में गिरफ्तार किया था। पकड़े गए अपराधी उसी के चेले हैं। अपने गुरु के रास्ते का अनुसरण कर इन अपराधियाें ने जाली नोट छापने का काम शुरू किया था। नोट के सीरियल नंबर एक ही होने के चलते यह बाजार में पकड़ गए। पुलिस ने इनकी तह तक जानकारी की तो पूरा मामला निकलकर सामने आ गया। पकड़े गए दोनों महोबा के कबरई के रहने वाले हैं। एक साथी बांदा का है। एक अन्य भी महोबा का है। बांदा के साथी इनके पूरे नोट को खपाने के लिए जिम्मेदारी लिए था। उसकी भी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। कम समय में अमीर बनने का ख्वाब संजोए इन अपराधियों के अरमानों में पानी फिर गया।
 
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