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उन्नाव: दवाएं नकली साबित न होने पर आरोपियों को जमानत, दो डीआई और पांच पुलिस कर्मियों पर रिपोर्ट होगी

Mon, 29 Nov 2021 10:46 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 29 Nov 2021 10:46 PM IST
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Bail to accused if medicines are not proved to be fake
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
तीन माह पहले खांसी के नकली सीरप की बरामदगी का दावा करते हुए  पांच पर रिपोर्ट दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार करना पुलिस टीम व दो औषधि निरीक्षकों को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट में सीरप नकली साबित न होने पर सभी आरोपियों को जमानत दे दी है।
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शक्तियों का दुरुपयोग कर गलत तरीके से रिपोर्ट दर्ज करने पर दो औषधि निरीक्षक (डीआई) व पांच पुलिस कर्मियों पर एफआईआर के आदेश दिए हैं। गंगाघाट पुलिस ने 28 अगस्त 2021 को शक्ति नगर में एक कारखाने में छापा मारकर खांसी के सीरप की 1540 शीशियां बरामद की थीं।
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पुलिस का दावा था कि कारखाने में नकली सीरप बनाने का कारोबार चल रहा था। पुलिस ने शक्ति नगर निवासी सोनू तिवारी, अजय बाजपेई और ब्रह्मनगर निवासी गौरव सिंह को गिरफ्तार किया था। ब्रह्मनगर के ही विकास गुप्ता व इंदिरा नगर के फैज को फरार दिखाया था।
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टीम में शामिल रहे सीतापुर जिले के औषधि निरीक्षक नवीन कुमार व उन्नाव के औषधि निरीक्षक अजय कुमार संतोषी ने सैंपल लेकर जांच के लिए एफएसएल लखनऊ भेजा था। पांचों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व एनडीपीएस एक्ट में रिपोर्ट दर्ज की थी।

तीन को न्यायिक हिरासत में कोर्ट ने जेल भेज दिया था। बिना एफएसएल की रिपोर्ट आए 90 दिन में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। जिला सत्र न्यायालय से आरोपी अजय बाजपेई की जमानत अर्जी खारिज होने पर हाईकोर्ट में अपील की गई थी।

आरोपी अजय बाजपेई के पक्ष के वकील नीरज सिंह ने बताया कि सुनवाई कोर्ट नंबर 27 में चल रही थी। हाईकोर्ट के आदेश पर शासन द्वारा पेश की गई एफएसएल रिपोर्ट में सीरप नकली व मानव शरीर के लिए नुकसानदायक साबित न होने की पुष्टि हुई।

इस पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश पंकज भाटिया ने सभी आरोपियों की जमानत मंजूर कर दी। पकड़े गए लोगों को तंग करने और अनावश्यक रूप से दवाओं को जब्त करने वाली टीम में शामिल दोनों औषधि निरीक्षकों, गंगाघाट थाने के उपनिरीक्षक रोहित कुमार पांडेय, अबू मोहम्मद कासिम, सिपाही कृष्णपाल सिंह, मुकेश मिश्र, राजेश कुमार पर धारा 58 (1) ख (अवैध तरीके से दवाओं को जब्त करने व गलत तरीके से परेशान करने) के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

हो सकती दो साल तक कैद  
आरोपी अजय बाजपेई के पक्ष के वकील नीरज सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने जिस धारा में औषधि निरीक्षकों व पुलिस कर्मियों पर रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं, उसमें अधिकतम दो साल की कैद या जुर्माने का प्रावधान है। यह रिपोर्ट अजय बाजपेई की तहरीर पर दर्ज की जाएगी।

औषधि निरीक्षक बोले
औषधि निरीक्षक अजय कुमार संतोषी का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं है। बरामद सीरप का एक नमूना औषधि विभाग की ओर से भी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। उसकी अभी रिपोर्ट नहीं आई है।
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