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शीलू ने सपने में भी नहीं सोचा होगा 'इस हाल में जन्मेगा विक्रम', मददगारों के चेहरे देखकर भर आईं आंखें
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 09 Sep 2018 03:51 PM IST
सार
- विक्रमशिला में जन्ने बच्चे का नाम रखा गया विक्रम
- टीटीई ने टूंडला से पहले बिना स्टाप के एक घंटे रोके रखी ट्रेन
- टीटीई के फैसले से सीआरबी खुश, पांच हजार रुपये इनाम दिए
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ट्रेन में महिला ने बच्चे को दिया जन्म
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विस्तार
नई दिल्ली से कानपुर की तरफ आ रही विक्रमशिला एक्सप्रेस में शुक्रवार रात महिला यात्री को प्रसव पीड़ा हुई। बोगी की अन्य महिलाओं ने उसका प्रसव कराया। इनमें एक दाई भी थी। महिला ने बेटे को जन्म दिया जिसका नाम विक्रम रखा गया है।
उसकी मदद के लिए आगे आए ट्रेन के टीटीई ने टूंडला के पास बिना स्टाप के एक घंटे ट्रेन रोके रखी। साथ ही यात्रियों से चंदाकर छह हजार रुपये एकत्र कर महिला को दिए। जच्चा-बच्चा की जान बचाने पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने शनिवार को सेंट्रल स्टेशन पर टीटीई सुरेश कोरी को पांच हजार रुपये और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सुरेश कानपुर सेंट्रल स्टेशन स्टाफ के टीटीई हैं।
ट्रेन के स्लीपर कोच एस-8 की 24 नंबर बर्थ पर बिहार के भागलपुर की गर्भवती महिला शीलू देवी सफर कर रही थीं। अलीगढ़ के पहले अचानक उन्हें प्रसव पीड़ा हुई लेकिन स्टेशन तक पहुंचने पर डॉक्टर का इंतजाम नहीं हो सका और ट्रेन आगे बढ़ गई।
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उसकी मदद के लिए आगे आए ट्रेन के टीटीई ने टूंडला के पास बिना स्टाप के एक घंटे ट्रेन रोके रखी। साथ ही यात्रियों से चंदाकर छह हजार रुपये एकत्र कर महिला को दिए। जच्चा-बच्चा की जान बचाने पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने शनिवार को सेंट्रल स्टेशन पर टीटीई सुरेश कोरी को पांच हजार रुपये और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सुरेश कानपुर सेंट्रल स्टेशन स्टाफ के टीटीई हैं।
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ट्रेन के स्लीपर कोच एस-8 की 24 नंबर बर्थ पर बिहार के भागलपुर की गर्भवती महिला शीलू देवी सफर कर रही थीं। अलीगढ़ के पहले अचानक उन्हें प्रसव पीड़ा हुई लेकिन स्टेशन तक पहुंचने पर डॉक्टर का इंतजाम नहीं हो सका और ट्रेन आगे बढ़ गई।
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ट्रेन रोककर महिला की मदद कर पेश की मिसाल
- फोटो : अमर उजाला
टूंडला के पास महिला का दर्द असहनीय हुआ तो टीटीई ने महिला यात्रियों से बात की रात 10:30 बजे ट्रेन टूंडला स्टेशन से पहले रुकवा दी। इसकी सूचना भी कंट्रोल को दे दी। बोगी से पुरुष यात्रियों को हटाकर महिला यात्रियों से सहयोग मांगा।
साथ ही ट्रेन की पैंट्रीकार से गर्म पानी व चादरें समेत दूसरी व्यवस्थाएं कराईं। महिला गरीब परिवार से थी और उनके पास मात्र 500 रुपये थे। किसी अस्पताल में इलाज के लिए ये राशि अपर्याप्त थी। ऐसे में टीटीई ने चंदा कर छह हजार रुपये इकट्ठा कराए और महिला को दिए।
साथ ही ट्रेन की पैंट्रीकार से गर्म पानी व चादरें समेत दूसरी व्यवस्थाएं कराईं। महिला गरीब परिवार से थी और उनके पास मात्र 500 रुपये थे। किसी अस्पताल में इलाज के लिए ये राशि अपर्याप्त थी। ऐसे में टीटीई ने चंदा कर छह हजार रुपये इकट्ठा कराए और महिला को दिए।