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अमृत महोत्सव: नाना साहब की क्रांति भूमि रही है बिठूर, वाल्मीकि आश्रम और 12वीं सदी का ईंट मंदिर बनेगा दर्शनीय

Fri, 05 Aug 2022 02:14 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 05 Aug 2022 02:14 PM IST
सार

महायोजना 2031 में नगर के अलावा देहात के भी पर्यटन स्थलों को विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए पर्यटन स्थलों के सूची और फोटो संकलित किए गए हैं। बता दें कि योजना के माध्यम से पर्यटन स्थलों को उनके ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के अनुसार विस्तार दिया जाएगा।

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Azadi ka Amrit  Mahotsav 2022, Valmiki Ashram and 12th century brick temple
बिठूर के ऐतिहासिक मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर से 30 किलोमीटर दूर बिठूर की धरती कभी क्रांतिकारियों का गढ़ रही है। यहां झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध कौशल और घुड़सवारी सीखी थी। नाना साहब ने अंग्रेजों को नाको चने चबवा दिए थे। बिठूर अपने धार्मिक महत्व के साथ क्रांतिकारियों का इतिहास भी खुद में समेटे हुआ है। 

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नाना साहब 1818 में यहां अंग्रेजों से मोर्चा लेने के लिए आए थे। धीरे-धीरे उन्होंने अपना सैन्य बल बढ़ाया। युद्ध कौशल में माहिर तात्याटोपे उनके सलाहकार थे। तात्याटोपे के प्रपौत्र विनायक राव टोपे ने बताया कि नाना साहब पेशवा द्वितीय ने सन 1857 की क्रांति का बिगुल यहीं से फूंका था। 
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नाना साहब ने एक जुलाई 1857 को खुद को पेशवा घोषित कर अंग्रेजों को कानपुर से लगभग खदेड़ ही दिया था। इसमें उनका साथ वीर योद्धा तात्याटोपे और अजीमुल्ला खां ने दिया था। आज भी यहां नाना साहब पेशवा के किले के अवशेष हैं। 

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पार्क में है ऐतिहासिक किला
पेशवा किले के पास उनकी याद में नानाराव पेशवा स्मारक पार्क बनाया गया है। पार्क के अंदर ही आजादी की क्रांति का प्रतीक एक कुंआ है। कहते हैं इसी कुएं के पास रानी लक्ष्मीबाई ने बचपन में तलवारबाजी और घुड़सवारी सीखी थी। अंग्रेजों ने जब बिठूर पर आक्रमण किया था, तो कई महिलाएं अपने बच्चों के साथ इसी कुएं में कूद गईं थीं।

गणेश मंदिर के पास था तात्याटोपे का किला
नाना साहब पेशवा ने अपने सलाहकार तात्याटोपे के लिए बिठूर के गणेश मंदिर के पास एक भवन बनवाया था। सन् 1856 में अंग्रेजी सेना ने इस भवन में आग लगाकर इसे नष्ट कर दिया था।

बिठूर संग्रहालय दिखाता है इतिहास
नानाराव पेशवा स्मारक पार्क में वर्ष 2005 में बने बिठूर संग्रहालय में आजादी की लड़ाई और इतिहास से जुड़ी तमाम चीजों को सजोकर रखा गया है। संग्रहालय में अंग्रेजों और बाबर के जमाने की बंदूकें, तलवारें और शाही फरमान अब भी सुरक्षित रखे हैं।

पर्यटन स्थलों के सूची और फोटो संकलित किए गए
महानगर योजना 2031 में पर्यटन स्थलों को भी विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके तहत कानपुर नगर, कानपुर देहात के पर्यटन स्थलों को उनके ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व के अनुसार विस्तार दिया जाएगा। इनमें बिठूर का वाल्मीकि आश्रम और 12वीं सदी का ईंट मंदिर भी शामिल है। सभी पर्यटन स्थलों की सूची और इनके फोटो संकलित किए गए हैं। 

जिन पर्यटन स्थलों को विकसित करने की तैयारी है, उनमें जाजमऊ का टीला, नाना साहिब स्मारक पार्क, मुगलकालीन कोस मीनार, ब्रिटिश काल में चर्चा में आए कचेरी कब्रिस्तान, माहेश्वरी मोहाल में कमला टॉवर के पीछे स्थापित श्री राधा-कृष्ण मंदिर, भीतरगांव का टेराकोटा पैनल से सजा मंदिर व निबियाखेड़ा मूसा नगर में स्थित मुक्ता देवी का प्राचीन मंदिर शामिल है। इसके अलावा घाटमपुर स्थित पिसनरीन मठ का जिक्र भी किया गया है। इस तरह से कुल 12 पर्यटन स्थल हैं। 

कोरोना काल के बाद शून्य हुई पर्यटकों की संख्या
पर्यटन स्थलों को देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या कोरोना काल 2020 से शून्य हो गई। महायोजना 2031 में पर्यटकों का जो डाटा प्रस्तुत किया गया है, उसके अनुसार 2015 से लेकर 2019 तक देश और विदेश के पर्यटकों के आने वालों वालों की संख्या दी गई है। 2019 में सबसे कम 328 और 2015 में सबसे ज्यादा 24266 विदेशी पर्यटक यहां आए हैं।

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