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औरैया: पीड़ित परिवार को दी गई चेक हुई बाउंस, नाराज परिजनों ने काटा हंगामा

Sat, 03 Oct 2026 05:11 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: Shikha Pandey Updated Sat, 03 Oct 2026 05:11 PM IST
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Auraiya: Cheque given to victim's family bounces; irate relatives create an uproar
हंगामा करते परिजन - फोटो : अमर उजाला

मुरादगंज स्थित शिव शंभू स्वीट हाउस के गोदाम में सिलिंडर फटने से झुलसे दो की मौत के बाद शनिवार को दूसरे दिन भी जमकर हंगामा हुआ। मुआवजे और कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े परिजन ने पहले तो अंतिम संस्कार से साफ इन्कार कर दिया। बाद में दुकानदार द्वारा 12-12 लाख रुपये की चेक देने पर मामला शांत हुआ और परिजन शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले गए। हालांकि, बैंक में चेक बाउंस होते ही परिजन का गुस्सा दोबारा भड़क उठा और वे शवों को वापस घर ले आए। वहीं, डीएम को मौके पर बुलाने की मांग पर परिजन अड़े हुए हैं।

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13 सितंबर को स्वीट हाउस के बेसमेंट में घरेलू से कमर्शियल सिलिंडर में गैस रिफिलिंग के दौरान भीषण विस्फोट हुआ था। हादसे में झुलसे जगतपुर गांव निवासी शिवम (18) और विपिन (16) ने दिल्ली में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। बृहस्पतिवार रात शव गांव पहुंचने पर कोहराम मच गया। परिजन ने आरोप लगाया कि दुकान मालिक मनोज कुमार उर्फ छुन्ना, उसके भाई आशुतोष और पिता रमेश चंद्र पोरवाल के दबाव में जबरन रिफिलिंग कराई जा रही थी।
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इलाज में लापरवाही और पनकी के अस्पताल में संक्रमण फैलने से दोनों की मौत हुई। शुक्रवार देर रात तक परिजन ने हंगामा किया। एएसपी आलोक मिश्रा, एसडीएम अजीतमल विनोद कुमार मीणा फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। परिजन को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत किया। परिजन भी सुबह अंतिम संस्कार पर राजी हो गए थे। देर रात दुकानदार को पुलिस ने पकड़ लिया था।
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शनिवार सुबह पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में पीड़ित परिवारों ने 12-12 लाख रुपये मुआवजे की मांग रखी, जिस पर दुकानदार राजी हो गया और चेक सौंप दी। लेकिन, जैसे ही एक परिजन बैंक पहुंचा तो चेक बाउन्स हो गई। धोखाधड़ी से नाराज ग्रामीणों ने दोबारा हंगामा शुरू कर दिया और नकद रकम की मांग पर अड़ गए। माहौल बिगड़ता देख प्रशासनिक अधिकारियों ने बीच-बचाव कराया। आखिरकार, दुकानदार द्वारा पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये नकद देने के बाद परिजन शांत हुए। साढ़े तीन बजे तक शवों का अंतिम संस्कार नहीं हो सका।

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