Ateeq Ahmed-Raju Pal: जफर के बहनोई और भाई बने थे निशाना,आक्रोशित भीड़ ने मकानों में लगाई थी आग
राजू पाल हत्याकांड में जफर अहमद के बहनोई और भाई भी निशाना बने थे। आक्रोशित भीड़ ने प्रयागराज स्थित उनके मकानों में आग लगा दी थी। अब उमेश पाल की हत्या के मामले में जफर जांच के दायरे में आ गया है।
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बांदा जिले में विधायक राजू पाल हत्याकांड में वर्ष 2005 में आक्रोशित भीड़ ने बांदा के जफर अहमद के भाई और बहनोई के प्रयागराज स्थित मकानों में तोड़फोड़ और आगजनी भी की गई थी। जानकार सूत्रों के मुताबिक बांदा के जफर अहमद के तीसरे नंबर की बहन तस्लीम हबीब के पति सौलत हनीफ हाईकोर्ट प्रयागराज में वकालत करते हैं।
वह माफिया अतीक अहमद के कानूनी सलाहकार भी बताए जाते हैं। वर्ष 2005 में विधायक राजू पाल की हत्या से आक्रोशित हुई भीड़ का यह भी निशाना बने थे। प्रयागराज स्थित सौलत हनीफ का मकान और बांदा के जफर अहमद के भाई अधिवक्ता जुल्फिकार हैदर और जीशान अहमद के मकान भी भीड़ के आक्रोश का शिकार हुए थे।
प्रतापगढ़ में जफर की है पुश्तैनी जमीन
जौनपुर में अपनी ससुराल से मोबाइल फोन से जफर अहमद ने बताया कि प्रतापगढ़ में उनकी पुश्तैनी जमीन है। बांदा के दोनों मकान उनकी मां को ननिहाल की तरफ से मिले थे। उनकी मां स्व. तहमीन हबीब प्रयागराज की रहने वाली थीं। मां ने दोनों मकान उनकी बहनों अजरा और शहनाज को दिए थे।
माफिया अतीक अहमद के तार बांदा में जुड़े होने की चर्चा
माफिया अतीक अहमद के तार बांदा से जुड़े होने की शहर में खासी चर्चा रही। शहर कोतवाली क्षेत्र के गूलर नाका मोहल्ले में शहर की मुख्य बाजार का काफी अंश है। यहां स्थित जफर के दोनों मकानों के आसपास तमाम दुकानें और व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स भी हैं। यहां बुधवार को पुलिस द्वारा की गई छापेमारी की दिन भर चर्चा रही।
2005 में हुई थी राजू पाल की हत्या
बता दें कि 25 जनवरी 2005 के दिन विधायक राजू पाल की हत्या कर दी गई थी। इसके अगले दिन गणतंत्र दिवस था। देशभर में जोरशोर से इसकी तैयारियां हो रहीं थीं। इस बीच, शहर के पुराने इलाकों में शुमार सुलेमसराय में गोलियों की तड़तड़ाहट शुरू हो गई।
कुछ लोग एक गाड़ी को घेरकर उसपर गोलियां बरसा रहे थे। कोई कुछ समझ पाता इससे पहले सैकड़ों राउंड फायरिंग हो चुकी थी। गाड़ी में सवार लोगों का पूरा शरीर छलनी हो गया। जिस गाड़ी पर हमला हुआ था, उसमें कोई और नहीं, बल्कि इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित विधायक राजू पाल थे।
गाड़ी को गालियों से कर दिया था छलनी
राजू पाल खुद क्वालिस चला रहे थे। उनके बगल में दोस्त की पत्नी रुखसाना बैठी थी, जो उन्हें चौफटका के पास मिलीं थीं। इसी गाड़ी में संदीप यादव और देवीलाल भी थे। पीछे स्कार्पियो में ड्राइवर महेंद्र पटेल और ओमप्रकाश और नीवां के सैफ समेत चार लोग लोग थे। दोनों गाड़ियों में एक-एक सिपाही थे।
अस्पताल ले जाते समय भी पीछा करके बरसाई गईं गोलियां
बदमाशों ने फायरिंग रोकी तो समर्थक राजू पाल को एक टैंपो में लेकर अस्पताल ले जाने लगे। हमलावरों ने ये देखा, तो उन्हें लगा राजू जिंदा हैं। तुरंत हमलावरों ने अपनी गाड़ी टैंपो के पीछे लगा ली और फिर फायरिंग शुरू कर दी। जबतक राजू पाल अस्पताल पहुंचे, उन्हें 19 गोलियां लग चुकी थीं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बता दें कि राजू बसपा के विधायक थे। लेकिन यूपी में सरकार समाजवादी पार्टी की थी। मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। राजू की हत्या का आरोप तत्कालीन समाजवादी पार्टी के सांसद अतीक अहमद पर लगा। राजू की पत्नी पूजा पाल ने अतीक, उसके भाई अशरफ, फरहान और आबिद समेत कई लोगों पर नामजद मुकदमा दर्ज करवाया।