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टोकरी में कारतूस, हाथों में बंदूकें
अमर उजाला ब्यूरो/ कानपुर
Updated Sat, 06 Feb 2016 02:06 AM IST
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ब्लॉक प्रमुख चुनाव के नामांकन के दौरान शुक्रवार को झींझक और मलासा में कानून की धज्जियां उड़ गईं। आचार संहिता तार-तार करके जमकर गुंडागर्दी की गई। असलहे तानकर विरोधियों की गाड़ियां रोकी गईं, विरोधियों को बंधक बनाकर खेतों में छिपा कर रखा गया।
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पीट-पीट कर भगाया गया और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। आलम यह था कि झींझक में बवाल के दौरान सपा कार्यकर्ता टोकरी भर-भर करकर गोलियां लाए थे। फायरिंग के दौरान सपा कार्यकर्ता गोलियों को एक-दूसरे को दे रहे थे।
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नामांकन के दौरान आचार संहिता का जमकर उल्लंघन किया गया। सैकड़ों सपा कार्यकर्ता असलहे लिए घूमते रहे और फायरिंग की। पुलिस और प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। घंटों पथराव व फायरिंग के बाद भी पर्याप्त पुलिस बल मौके पर नहीं भेजा गया।
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बवाल चलता रहा और लोग दहशत के साए में रहे। चौंका देने वाली बात यह है कि एक भी विरोधी प्रत्याशी को नामांकन नहीं करने दिया गया। मलासा में ब्लॉक मुख्यालय तक पहुंचने के रास्तों पर नाकेबंदी और ब्लॉक गेट पर बसपा प्रत्याशी के प्रस्तावक को रोके जाने तक सारा वाकया पुलिस-प्रशासन के सामने हुआ।
क्षेत्रपंचायत सीट बम्हनौती से जीती सदस्य बसपा की प्रेमकांती (मलासा प्रत्याशी) व पति संजय सचान ने बताया कि वह पत्नी व प्रस्तावक संदीप के साथ चौपहिया वाहन से विकासखंड मुख्यालय जा रहे थे। रास्ता रोके जाने की जानकारी पर वाहन समर्थकों के हवाले कर दिया और पैदल खेतों के रास्ते चलकर पहुंचे।
रास्ते में एक किसान से लेकर पुराने कपड़े प्रस्तावक संदीप को पहना दिए थे ताकि कोई पहचान न पाए। फिर भी शक होने पर सपा समर्थकों ने रोक लिया। एसडीएम और डीएसपी से गुहार लगाई गई पर किसी ने नहीं सुनी। प्रस्तावक को परिसर में ही नहीं जाने दिया गया। प्रत्याशी चिल्लाती रहीं लेकिन सपाइयों ने प्रस्तावक को छोड़ा ही नहीं और नामांकन खारिज हो गया। उन्होंने कोर्ट जाने की बात कही।