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यूपी के इस मंदिर में महाभारत काल का ये योद्धा सबसे पहले करता है महादेव के श्रृंगार दर्शन
Thu, 20 Feb 2020 08:00 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 20 Feb 2020 08:00 PM IST
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खेरेश्वर महादेव मंदिर कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
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महाशिवरात्रि पर्व को लेकर क्षेत्र के खेरेश्वर महादेव मंदिर के कपाट भोर पहर तीन बजे से पूरी रात शिवभक्तों के लिए खुलें रहेंगे। शिवराजपुर के छतरपुर गांव स्थित खेरेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास द्वापरयुग से है। महाभारत काल में कौरव-पाण्डव के गुरु द्रोणाचार्य ने स्वयं खेरेश्वर महादेव की तपस्या की थी।
यहां के लोगों का दावा है कि करीब वह 36 सौ साल से बदस्तूर आता है और नजदीक पहुंचने से पहले कहीं गुम हो जाता है। वही बता दें कि इस बात को लेकर गांववालों का मानना है कि यह कोई और नहीं द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा है। महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य खेरेश्वर मंदिर पर आकर पूजा अर्चना करते थे।
इतना ही नहीं पांडव, कौरव और कर्ण ने भी यहीं पर शिक्षा दीक्षा ली थी। खेरेश्वर धाम की मान्यता है कि द्वापर युग में यह गांव पहले गुरु द्रोणाचार्य का आरायण वन हुआ करता था। यहीं पर द्रोणाचार्य ने पांडवों-कौरवों को शस्त्र विद्या सिखायी। मंदिर के महंत आकाश पुरी गोस्वामी कहते हैं कि वह 36 पीढ़ियों से खेरेश्वर महादेव की पूजा कर रहे हैं।
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यहां के लोगों का दावा है कि करीब वह 36 सौ साल से बदस्तूर आता है और नजदीक पहुंचने से पहले कहीं गुम हो जाता है। वही बता दें कि इस बात को लेकर गांववालों का मानना है कि यह कोई और नहीं द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा है। महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य खेरेश्वर मंदिर पर आकर पूजा अर्चना करते थे।
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इतना ही नहीं पांडव, कौरव और कर्ण ने भी यहीं पर शिक्षा दीक्षा ली थी। खेरेश्वर धाम की मान्यता है कि द्वापर युग में यह गांव पहले गुरु द्रोणाचार्य का आरायण वन हुआ करता था। यहीं पर द्रोणाचार्य ने पांडवों-कौरवों को शस्त्र विद्या सिखायी। मंदिर के महंत आकाश पुरी गोस्वामी कहते हैं कि वह 36 पीढ़ियों से खेरेश्वर महादेव की पूजा कर रहे हैं।
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गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा भी यहीं रहा करते थे। मंहत के मुताबिक महाभारत के युद्ध के दौरान अश्वत्थामा ने पांडवों के पुत्रों की छल से हत्या कर दी। भीम ने अश्वत्थामा के माथे में लगी मणि निकालकर उसे शक्तिहीन बना दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया वह धरती पर तब तक पीड़ावश जीवित रहेगा जब तक स्वयं महादेव उसे उसके पापों से मुक्ति न दिला दें। तभी से ये कहा जाता है कि महादेव से मुक्ति की प्रार्थना के लिए यहां अश्वत्थामा हर रोज सबसे पहले जल चढ़ाने आता है।
शुक्रवार को महाशिवरात्रि पर्व के मद्देनजर क्षेत्र के प्राचीन खेरेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों के लिए बाबा भोलेनाथ की आदिकालीन शिवलिंग के दर्शन के लिए चाकचौबंद प्रबंध किए गए हैं। मंदिर के पुजारी कमलेश गिरि ने बताया कि पर्व को भारी भीड़ का ध्यान रखते शुक्रवार को मंदिर के तीन प्रमुख दरवाजों को खोलकर दर्शन कार्य किया जाएगा।
सभी द्वारों बैरीकेटिंग कर सिर्फ लाइन से ही भक्तों का मंदिर में प्रवेश हो सकेगा। क्षेत्र के आंकिन गंगा तट और नानामऊ गंगा तट पर भी महाशिवरात्रि पर्व पर कोतवाली बिल्हौर द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए है। डीआईजी अनंत देव ने गंगा तटों पर पुलिस अधिकारियों-सिपाहियों को प्राथमिक चिकित्सा के लिए फर्स्ट एड बाक्स लेकर ही तैनाती के आदेश जारी किए हैं।
शुक्रवार को महाशिवरात्रि पर्व के मद्देनजर क्षेत्र के प्राचीन खेरेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों के लिए बाबा भोलेनाथ की आदिकालीन शिवलिंग के दर्शन के लिए चाकचौबंद प्रबंध किए गए हैं। मंदिर के पुजारी कमलेश गिरि ने बताया कि पर्व को भारी भीड़ का ध्यान रखते शुक्रवार को मंदिर के तीन प्रमुख दरवाजों को खोलकर दर्शन कार्य किया जाएगा।
सभी द्वारों बैरीकेटिंग कर सिर्फ लाइन से ही भक्तों का मंदिर में प्रवेश हो सकेगा। क्षेत्र के आंकिन गंगा तट और नानामऊ गंगा तट पर भी महाशिवरात्रि पर्व पर कोतवाली बिल्हौर द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए है। डीआईजी अनंत देव ने गंगा तटों पर पुलिस अधिकारियों-सिपाहियों को प्राथमिक चिकित्सा के लिए फर्स्ट एड बाक्स लेकर ही तैनाती के आदेश जारी किए हैं।