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अरशद मदनी बोले- कृषि कानूनों की तरह सीएए और एनआरसी वापस ले सरकार
Sun, 21 Nov 2021 01:15 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 21 Nov 2021 01:15 AM IST
सार
अरशद मदनी ने कहा कि किसानों ने अपनी ताकत दिखाई और उनके जज्बातों का सम्मान करते हुए कृषि कानून वापस हुए तो मुसलमानों के जज्बातों का भी सम्मान होना चाहिए। किसानों का आंदोलन शुरू हुआ तो सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई। सीएए-एनआरसी को लेकर मुस्लिम समाज और सरकार की कोई बातचीत नहीं हुई।
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मौलाना अरशद मदनी
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सीएए और एनआरसी को लेकर मुसलमानों के दिल्ली और अन्य हिस्सों में हुए आंदोलन से प्रेरित होकर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने आंदोलन किया। उनके आंदोलन के बाद केंद्र सरकार को यह कानून वापस लेने पड़े।
उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री ने किसानों के सम्मान का हवाला देते हुए उनके विरोध से कानूनों को वापस लिया। उसी तरह मुस्लिम समाज के सीएए-एनआरसी के आंदोलन के मद्देनजर इन कानूनों को भी वापस लेना चाहिए।
वह जाजमऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधिवेशन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। दोपहर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसानों ने अपनी ताकत दिखाई और उनके जज्बातों का सम्मान करते हुए कृषि कानून वापस हुए तो मुसलमानों के जज्बातों का भी सम्मान होना चाहिए।
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किसानों का आंदोलन शुरू हुआ तो सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई। सीएए-एनआरसी को लेकर मुस्लिम समाज और सरकार की कोई बातचीत नहीं हुई। मुस्लिम समाज न तो इस मामले पर सरकार के पास गया और न ही सरकार समाज के आंदोलनकारियों से आकर मिली।
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उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री ने किसानों के सम्मान का हवाला देते हुए उनके विरोध से कानूनों को वापस लिया। उसी तरह मुस्लिम समाज के सीएए-एनआरसी के आंदोलन के मद्देनजर इन कानूनों को भी वापस लेना चाहिए।
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वह जाजमऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अधिवेशन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। दोपहर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसानों ने अपनी ताकत दिखाई और उनके जज्बातों का सम्मान करते हुए कृषि कानून वापस हुए तो मुसलमानों के जज्बातों का भी सम्मान होना चाहिए।
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किसानों का आंदोलन शुरू हुआ तो सरकार और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई। सीएए-एनआरसी को लेकर मुस्लिम समाज और सरकार की कोई बातचीत नहीं हुई। मुस्लिम समाज न तो इस मामले पर सरकार के पास गया और न ही सरकार समाज के आंदोलनकारियों से आकर मिली।