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Kanpur News: सेना ने डेकोरेटर्स व गेस्ट हाउस के कब्जे से मुक्त कराई करोड़ों की जमीन
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कानपुर। शहर के पॉश इलाके मॉल रोड में लगभग 50 सालों से मिर्जा डेकोरेटर्स और हीरा पन्ना गेस्ट हाउस के मालिकों द्वारा किए गए अनाधिकृत निर्माण को ध्वस्त कर सेना ने करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन खाली करा ली है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान कुछ वकीलों ने विरोध करने की कोशिश की लेकिन भारी पुलिस बल और सेना के जवानों की मौजूदगी के कारण उनके मंसूबे कामयाब नहीं हो सके।
मॉल रोड स्थित सर्वे नंबर 454 बंगला नंबर 97 पर लगभग 50 सालों से मिर्जा डेकोरेटर्स और हीरा पन्ना गेस्ट हाउस के मालिकों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। करीब 28 साल पहले इन लोगों ने कोर्ट से स्टे आदेश लिया था जिसके सहारे यह लोग कब्जा जमाए हुए थे। सोमवार को भारत सरकार के स्थाई शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा पुलिस और सेना के जवानों के साथ मौके पर कब्जा खाली कराने पहुंचे तो कुछ अधिवक्ताओं ने सेशन कोर्ट में अपील लंबित होने की बात कहते हुए ध्वस्तीकरण का विरोध जताया। कहा कि अपर जिला जज 21 की अदालत में स्टे प्रार्थना पत्र पर 1 सितंबर को सुनवाई होनी है लेकिन मौके पर वह कोई स्थगनादेश नहीं दिखा सके। उनको बताया गया कि यह बंगला मूरी एंड कंपनी को ओल्ड ग्रांट स्कीम के तहत आवंटित किया गया था।
इस स्कीम में किसी को बंगले का मालिकाना अधिकार नहीं दिया जाता। स्वामित्व संबंधी सभी अधिकार भारत सरकार के पास रहते हैं। छावनी में स्थित जमीन सेना की होती है जिसे वह अपनी जरूरत के लिए कभी भी खाली करा सकती है। इसके बाद विरोध को दरकिनार करते हुए सेना के बुलडोजर ने अवैध निर्माण ढहाकर करोड़ों की बेशकीमती जमीन को कब्जामुक्त करा लिया।
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मॉल रोड स्थित सर्वे नंबर 454 बंगला नंबर 97 पर लगभग 50 सालों से मिर्जा डेकोरेटर्स और हीरा पन्ना गेस्ट हाउस के मालिकों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था। करीब 28 साल पहले इन लोगों ने कोर्ट से स्टे आदेश लिया था जिसके सहारे यह लोग कब्जा जमाए हुए थे। सोमवार को भारत सरकार के स्थाई शासकीय अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा पुलिस और सेना के जवानों के साथ मौके पर कब्जा खाली कराने पहुंचे तो कुछ अधिवक्ताओं ने सेशन कोर्ट में अपील लंबित होने की बात कहते हुए ध्वस्तीकरण का विरोध जताया। कहा कि अपर जिला जज 21 की अदालत में स्टे प्रार्थना पत्र पर 1 सितंबर को सुनवाई होनी है लेकिन मौके पर वह कोई स्थगनादेश नहीं दिखा सके। उनको बताया गया कि यह बंगला मूरी एंड कंपनी को ओल्ड ग्रांट स्कीम के तहत आवंटित किया गया था।
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इस स्कीम में किसी को बंगले का मालिकाना अधिकार नहीं दिया जाता। स्वामित्व संबंधी सभी अधिकार भारत सरकार के पास रहते हैं। छावनी में स्थित जमीन सेना की होती है जिसे वह अपनी जरूरत के लिए कभी भी खाली करा सकती है। इसके बाद विरोध को दरकिनार करते हुए सेना के बुलडोजर ने अवैध निर्माण ढहाकर करोड़ों की बेशकीमती जमीन को कब्जामुक्त करा लिया।
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