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Kanpur News: अंडर 19 महिला क्रिकेट विश्वकप की भारतीय टीम में उन्नाव की अर्चना

Sun, 15 Jan 2023 05:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Jan 2023 05:30 AM IST
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archana ne behter bolling ki
उन्नाव/गंजमुरादाबाद। दक्षिण अफ्रीका में हो रहे अंडर-19 महिला क्रिकेट विश्वकप में जिले की बेटी अर्चना भी भारतीय टीम का हिस्सा बनी हैं। बांगरमऊ कस्बा के रतईपुरवा गांव निवासी अर्चना का खेल देखने के लिए शनिवार को उनकी मां, भाई और ग्रामीण, हर गेंद पर टकटकी लगाए रहे। अर्चना ने तीन ओवर बॉलिंग की और 18 रन दिए। अर्चना ने अपनी धारदार गेंदबाजी से दक्षिणी अफ्रीका के बल्लेबाजों को खूब छकाया।
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बांगरमऊ कस्बा के रतईपुरवा गांव में शनिवार शाम से ही हर तरफ किक्रेट की कमेंट्री ही सुनाई दे रही थी। शाम होते ही लोग घर में टीवी के आगे बैठ गए। सभी अपने गांव की बेटी अर्चना को उसके पहले विश्वकप मैच में पहला मैच देखने के लिए उत्साहित रहे। शाम 5:15 पर मैच शुरू होने से पहले ही बिजली चली गई। इससे लोग मायूस हुए हालांकि गांव के युवाओं राकेश, महेश आदि ने मोबाइल की मदद से गांव की बेटी को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलते देखने की व्यवस्था की।
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बड़े भाई रोहित ने बताया कि अर्चना आलराउंडर खिलाड़ी और दाहिने हाथ की धारदार गेंदबाज है। अर्चना ने कोच कपिल पांडेय की देखरेख में गेंदबाजी सीखी है।
उसका अंडर-19 क्रिकेट टीम में चयन होने के बाद 24 से 27 नवंबर तक न्यूजीलैंड के खिलाफ हुई घरेलू श्रंखला में भी भारतीय टीम का हिस्सा रही थी। उन्होंने बेहतरी गेंदबाजी का प्रदर्शन किया था। शनिवार को भी अर्चना ने अंडर-19 महिला टी-20 विश्वकप में दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को खूब छकाया। उनकी गेंदबाजी ने दक्षिण अफ्रीका की ओपनर बल्लेबाज इलांद्री रेंसबर्ग और ओलुहले सियो को काफी परेशान किया। उन्होंने तीन ओवर में 18 रन दिए हैं।
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बोली मां साकार हुआ सपना
अर्चना की मां सावित्री ने बताया कि वर्ष 2008 में अर्चना के पिता शिवराम का निधन हो गया था। पति की मौत के बाद बच्चों के परवरिश की जिम्मेदारी उनपर (सावित्री) आ गई। डेढ़ बीघा जमीन में खेती और भैंस का दूध बेचकर उन्होंने बच्चों की परवरिश की। ससुर धनीराम ने अपनी पौत्री अर्चना के जुनून और जिद पर उसका दाखिला वर्ष 2016 में मुरादाबाद के बोर्डिंग स्कूल में कराया। वहां अर्चना ने क्रिकेट को अपना पसंदीदा खेल चुना और गेंदबाजी के जरिए बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। उसके अंदर छुपी खेल प्रतिभा को विद्यालय की शिक्षिका पूनम ने पहचाना और प्रोत्साहित किया। इसके बाद अर्चना ने पीछे मुड़कर नही देखा। कोच कपिल पांडेय के प्रशिक्षण में अर्चना ने गेंदबाजी को धारदार किया। आज कड़ी मेहनत के बाद वह इस मुकाम पर पंहुची है। बताया कि नीली जर्सी पहन कर देश के लिए खेलना बेटी का सपना था। विश्वकप में बेटी को गेंदबाजी करते देखकर उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
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