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Kanpur News: निजी स्कूलोंं की मनमानी, अभिभावकों पर फीस-ड्रेस का बोझ बढ़ा

Sun, 12 Apr 2026 01:12 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Sun, 12 Apr 2026 01:12 AM IST
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Arbitrariness of private schools, increasing the burden of fees and dress on parents
कानपुर देहात। शैक्षिक सत्र में बच्चों पर बस्ते व अभिभावकों पर स्कूल की फीस, ड्रेस और महंगे कोर्स का बोझ बढ़ गया है। कक्षा एक से आठ तक का कोर्स 3500 से लेकर 8000 रुपये में मिल रहा। कुछ स्कूल संचालकों ने अलग-अलग मद दिखाकर मासिक शुल्क में दो से 300 रुपये बढ़ा दिए हैं। ड्रेस के नाम पर भी अभिभावकों की जेब ढीली की जा रही है। बाजार में करीब 200 रुपये का मिलने वाला शर्ट स्कूल का लोगो लगने के बाद 300 रुपये से अधिक का मिल रहा है। स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान हैं।
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एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र 2026-27 शुरू हो गया है। प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा आठ और नौ से 12 तक की कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अधिकांश स्कूलों से कॉपी-किताबें दी जा रही हैं। इसके एवज में मनमाना शुल्क लिया जा रहा है। हिंदी व अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालकों ने कोर्स में एनसीईआरटी के अतिरिक्त निजी प्रकाशकों की पुस्तकें भी शामिल कर रखी हैं। ऐसे में अभिभावकों को मजबूरन निजी प्रकाशकों की पुस्तकें काफी महंगी दर पर खरीदनी पड़ रही हैं।
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जिले में 100 से अधिक निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसमें अकबरपुर, रूरा, झींझक, रसूलाबाद, पुखरायां, रनियां, सिकंदरा क्षेत्र में कई स्कूलों में कॉपी, किताबों के नाम पर मनमानी चल रही है। स्कूल में पहले अभिभावकों को बुलाया जा रहा है। इसके बाद प्रिंटेड लिस्ट थमाई जा रही है। इसमें कापी, किताबों, कवर रोल, आईकार्ड, बैग, वार्षिक बुक के रेट अंकित हैं। अभिभावक चाहकर भी किसी भी सामग्री की कटौती नहीं कर सकते। बाहर से लेना तो दूर की बात है। इसके लिए कक्षा एक से लेकर आठ तक का कोर्स 3500 से लेकर 8000 रुपये वसूले जा रहे हैं। यह रेट सिर्फ कॉपी, किताबों के है। अभी फीस की बात ही नहीं की जा रही है। अभिभावक स्कूलों की मनमानी की बात तो कह रहे, लेकिन विरोध जताने में हिचकिचा भी रहे हैं। हालांकि मनमाने तरीके से एनसीईआरटी की पुस्तकों के अलावा निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें शामिल करने पर विरोध हो रहा है।
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स्कूल की यूनीफार्म भी चिह्नित दुकानों पर उपलब्ध
नगर के प्रतिष्ठित स्कूलों की यूनीफार्म सिर्फ चिह्नित दुकानों पर ही मिल रही है। दुकान पर पहुंचकर अभिभावक सिर्फ स्कूल का नाम बता रहे हैं। वहीं स्कूल का लोगो लगी यूनीफार्म मिल जा रही है। कई स्कूलों में कमीशन एजेंट बैठे हैं। वह स्कूल में बच्चों की नाप लेकर यूनीफार्म तैयार कर रहे हैं। बाजार में सामान्य दुकानों पर यूनीफार्म की शर्ट 200 रुपये में आसानी से मिल रही है जबकि लोगो लगने के बाद इसकी कीमत 300 से रुपये हो जाती है। कई जगह स्कूल की यूनीफार्म बाजार में उपलब्ध भी नहीं है। इस पर अभिभावक मजबूरन स्कूल से खरीद रहे हैं।
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प्रशासन नहीं लगा पा रहा रोक
निजी स्कूल एनसीईआरटी की किताबें नहीं लागू कर रहे हैं। वह निजी प्रकाशकों की सस्ती किताबें महंगे दामों पर उपलब्ध करा रहे हैं। पिछले साल भी निजी स्कूलों ने खूब कमाई की। शिकायतें होती रहीं फिर भी जिम्मेदाराें ने ध्यान नहीं दिया। इस बार गठित की गई खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम भी हाथ पर हाथ रखे बैठी है। मजबूरन किताबें व यूनीफार्म विद्यालय से लेनी पड़ रही है। - रवि मिश्र, अभिभावक, गहलौं
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निजी स्कूलों की मनमानी पर कार्रवाई की जानी चाहिए। कई अभिभावक स्कूलों की मनमानी की वजह से बच्चों को अच्छे स्कूलों में दाखिला नहीं करा पा रहे हैं। इधर स्कूल चलो अभियान चलाकर दाखिले पर जोर दिया जा रहा है। आरटीई के तहत भी दाखिले कराए जा रहे हैं। स्कूल से मिली सूची के अनुसार बाजार में चिह्नित दुकान से किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। इसमें एनसीईआरटी के अलावा निजी प्रकाशकों की किताबें भी शामिल हैं, जो काफी महंगी हैं।- हिमांशु यादव, अभिभावक, रामपुर


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निजी स्कूलों के संचालक मनमानी कर हर वर्ष फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं। पढ़ाई के अलावा किताबों व यूनीफार्म के नाम पर खुली लूट चल रही है। ऐसे में अभिभावक बजट बिगड़ने से परेशान हैं। कई लोग तो बीएसए के यहां शिकायत कर चुके हैं। वहां से बताया गया कि खंड शिक्षा अधिकारियों को जांच के आदेश दिए गए हैं लेकिन स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं लगी। जिला प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। - अयूब अहमद, भटौली
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निजी स्कूल के संचालक चिह्नित दुकानों से किताबें व यूनीफार्म की खरीदारी करने का दबाव बनाते हैं। अगर अभिभावक किसी अन्य दुकान से खरीदारी करना भी चाहे तो बताए गए प्रकाशक की किताब वहां नहीं मिलती है। इस व्यवस्था में सख्ती से बदलाव कराना चाहिए। स्कूलों को सरकार के मानक पर शिक्षण कार्य कराना चाहिए। इसमें जिम्मेदारों की साठगाठ पर भी नजर रखी जाए। - मुरारी द्विवेदी, बनीपारा

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निजी स्कूलों की मिल रही शिकायतों को लेकर खंड शिक्षा अधिकारियों मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। जहां पर भी गड़बड़ी मिलेगी वहां पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - अजय मिश्र, बीएसए
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