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Kanpur News: चार बार किया आवेदन फिर भी नहीं मिला आवास
Fri, 04 Sep 2026 01:45 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 04 Sep 2026 01:45 AM IST
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मूसानगर (कानपुर देहात)। मलासा ब्लॉक के जरसेन में बुधवार रात कच्चा मकान ढहने से दो मासूमों की जान चली गई जबकि पिता गंभीर है। दो मासूमों की मौत के बाद परिवार के लोगों ने सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। जिसमें चार बार आवेदन करने के बाद भी पीड़ित परिवार को आवास योजना का लाभ न मिलने की बात कही गई है।
मलबे में दबकर जान गंवाने वाले मासूम पलक व लविश के शवों को बृहस्पतिवार को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हमीरपुर जनपद के इंगहौटा निवासी मासूमों के मामा तुलसीराम ने बताया कि बहनोई भूमिहीन थे। करीब 10 साल पहले हुए घर के बंटवारे में उन्हें महज एक कच्चा कमरा मिला था। इसी में रहकर वह परिवार के साथ गुजर-बसर कर रहे थे। इधर, एसडीएम भोगनीपुर देवेंद्र सिंह, सीओ राजीव सिरोही, मूसानगर थानाध्यक्ष अमिता वर्मा ने बिलख रहे परिजन को ढांढस बंधवाने के साथ हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचकर श्रीराम का भी हालचाल जाना।
पलक की चाची सुनीता ने बताया कि आर्थिक स्थिति सही न होने के चलते श्रीराम ने चार बार आवास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। हर बार कुछ लोग जांच करने आए, इसके बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल सका। अगर योजना का लाभ मिल जाता तो शायद मासूमों की जान न जाती और न ही हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटता। शाम साढ़े सात बजे मामा तुलसीराम पोस्टमार्टम होने के बाद दोनों मासूमों के शव गांव लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया शुक्रवार सुबह शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। बता दें कि बुधवार रात को कच्चा घर ढहने से श्रीराम, उसकी बेटी पलक, बेटा लविश मलबे में दब गए थे। घर गिरने की आवाज सुन पहुंचे लोगों ने पुलिस की मदद से एक घंटे की मशक्कत कर तीनों को मलबे से बाहर निकाला तब तक मासूमों की जान चली गई। वहीं, घायल श्रीराम को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया।
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जिम्मेदार आवेदनों पर नहीं करते गौर
कच्चा घर गिरने से मासूम भाई-बहन की मौत के बाद से ग्रामीणों में जिम्मेदारों की अनदेखी को लेकर नाराजगी है। पड़ोस में रहने वाले अंगद ने बताया कि उनका भी घर कच्चा है। आवेदन के बाद भी आवास योजना का लाभ नहीं मिला। बारिश के चलते दो दिन पहले उनके घर का भी एक हिस्सा गिर गया था। जिससे गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया था। उन्हें अब परिजन के घर के रहना पड़ रहा है।
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20 घरों के लोगों को आवागमन के दौरान भी रहता खतरा
ग्रामीण रमेश, सरमन, विजय, मुकेश, रामरतन आदि ने बताया कि मोहल्ले में उनके परिवार समेत करीब 20 घर हैं। इन घर के लोगों को आवागमन के लिए कोई रास्ता नहीं है। मोहल्ले के लोग पगडंडी के सहारे आवागमन कर रहे हैं। बारिश के चलते खाली मैदान तालाब बन गया। पगडंडी को छोड़कर पूरे में करीब तीन फीट तक पानी भरा है। लोगों को मजबूरन जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए लोग बच्चों को कंधों पर बैठाकर पगडंडी पार करवाकर सड़क तक ले जाते हैं। बच्चों के घरों के बाहर खेलने के दौरान भी हादसे का खतरा बना रहता है। हर साल बारिश में यह परेशानी होती है, कई बार शिकायतों के बाद भी जिम्मेदारों ने सुनवाई नहीं की है। ग्राम प्रशासक रीता देवी ने बताया आम रास्ता के बीच में किसी ग्रामीण के खेत पड़ने के कारण रास्ते का निर्माण नहीं हो पा रहा है। गांव चकबंदी में है। कई बार ब्लाॅक स्तर पर रास्ता निर्माण के लिए कहा गया है।
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बयान....
चार बार आवेदन किए जाने के बावजूद भी आवास न मिलने की जानकारी उन्हें नहीं है। परिजन के आरोपों की जांच करवाकर स्पष्ट किया जाएगा कि किस स्तर पर पीड़ित को आवास नहीं मिल सका। फिलहाल ग्राम पंचायत अधिकारी को मुख्यमंत्री आवास के लिए तत्काल रिपोर्ट बनाने को कहा गया है। साथ ही आम रास्ता के निर्माण के लिए राजस्व टीम से साथ जांच करा कर रास्ता निर्माण का काम भी जल्दी पूरा किया जाएगा। - संजय कनौजिया, बीडीओ मलासा
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घटना स्थल का मुआयना किया गया है। मासूमों के परिजन को दैवीय आपदा राहत कोष से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। इसके साथ ही पात्रता के अनुसार अन्य शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। - देवेंद्र सिंह, एसडीएम भोगनीपुर
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मलबे में दबकर जान गंवाने वाले मासूम पलक व लविश के शवों को बृहस्पतिवार को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेजा। हमीरपुर जनपद के इंगहौटा निवासी मासूमों के मामा तुलसीराम ने बताया कि बहनोई भूमिहीन थे। करीब 10 साल पहले हुए घर के बंटवारे में उन्हें महज एक कच्चा कमरा मिला था। इसी में रहकर वह परिवार के साथ गुजर-बसर कर रहे थे। इधर, एसडीएम भोगनीपुर देवेंद्र सिंह, सीओ राजीव सिरोही, मूसानगर थानाध्यक्ष अमिता वर्मा ने बिलख रहे परिजन को ढांढस बंधवाने के साथ हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचकर श्रीराम का भी हालचाल जाना।
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पलक की चाची सुनीता ने बताया कि आर्थिक स्थिति सही न होने के चलते श्रीराम ने चार बार आवास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। हर बार कुछ लोग जांच करने आए, इसके बाद भी योजना का लाभ नहीं मिल सका। अगर योजना का लाभ मिल जाता तो शायद मासूमों की जान न जाती और न ही हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटता। शाम साढ़े सात बजे मामा तुलसीराम पोस्टमार्टम होने के बाद दोनों मासूमों के शव गांव लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया शुक्रवार सुबह शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। बता दें कि बुधवार रात को कच्चा घर ढहने से श्रीराम, उसकी बेटी पलक, बेटा लविश मलबे में दब गए थे। घर गिरने की आवाज सुन पहुंचे लोगों ने पुलिस की मदद से एक घंटे की मशक्कत कर तीनों को मलबे से बाहर निकाला तब तक मासूमों की जान चली गई। वहीं, घायल श्रीराम को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया।
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जिम्मेदार आवेदनों पर नहीं करते गौर
कच्चा घर गिरने से मासूम भाई-बहन की मौत के बाद से ग्रामीणों में जिम्मेदारों की अनदेखी को लेकर नाराजगी है। पड़ोस में रहने वाले अंगद ने बताया कि उनका भी घर कच्चा है। आवेदन के बाद भी आवास योजना का लाभ नहीं मिला। बारिश के चलते दो दिन पहले उनके घर का भी एक हिस्सा गिर गया था। जिससे गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया था। उन्हें अब परिजन के घर के रहना पड़ रहा है।
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20 घरों के लोगों को आवागमन के दौरान भी रहता खतरा
ग्रामीण रमेश, सरमन, विजय, मुकेश, रामरतन आदि ने बताया कि मोहल्ले में उनके परिवार समेत करीब 20 घर हैं। इन घर के लोगों को आवागमन के लिए कोई रास्ता नहीं है। मोहल्ले के लोग पगडंडी के सहारे आवागमन कर रहे हैं। बारिश के चलते खाली मैदान तालाब बन गया। पगडंडी को छोड़कर पूरे में करीब तीन फीट तक पानी भरा है। लोगों को मजबूरन जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए लोग बच्चों को कंधों पर बैठाकर पगडंडी पार करवाकर सड़क तक ले जाते हैं। बच्चों के घरों के बाहर खेलने के दौरान भी हादसे का खतरा बना रहता है। हर साल बारिश में यह परेशानी होती है, कई बार शिकायतों के बाद भी जिम्मेदारों ने सुनवाई नहीं की है। ग्राम प्रशासक रीता देवी ने बताया आम रास्ता के बीच में किसी ग्रामीण के खेत पड़ने के कारण रास्ते का निर्माण नहीं हो पा रहा है। गांव चकबंदी में है। कई बार ब्लाॅक स्तर पर रास्ता निर्माण के लिए कहा गया है।
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बयान....
चार बार आवेदन किए जाने के बावजूद भी आवास न मिलने की जानकारी उन्हें नहीं है। परिजन के आरोपों की जांच करवाकर स्पष्ट किया जाएगा कि किस स्तर पर पीड़ित को आवास नहीं मिल सका। फिलहाल ग्राम पंचायत अधिकारी को मुख्यमंत्री आवास के लिए तत्काल रिपोर्ट बनाने को कहा गया है। साथ ही आम रास्ता के निर्माण के लिए राजस्व टीम से साथ जांच करा कर रास्ता निर्माण का काम भी जल्दी पूरा किया जाएगा। - संजय कनौजिया, बीडीओ मलासा
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घटना स्थल का मुआयना किया गया है। मासूमों के परिजन को दैवीय आपदा राहत कोष से चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। इसके साथ ही पात्रता के अनुसार अन्य शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। - देवेंद्र सिंह, एसडीएम भोगनीपुर