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सिख विरोधी दंगा: खून के धब्बों पर फोरेंसिक की मुहर, किदवई नगर में सेवादार समेत दो की हुई थी हत्या
Sun, 17 Jan 2021 03:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 17 Jan 2021 03:16 PM IST
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सिख दंगा (फाइल फोटो)
- फोटो : गूगल
सिख विरोधी दंगों में किदवई नगर में सेवादार समेत दो की हत्या के मामले की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट एसआईटी को सौंप दी गई है। दंगाइयों ने जो क्रूरता की थी, उसकी गवाही रिपोर्ट में है। एसआईटी का दावा है कि आरोपियों कोे सजा दिलाने में रिपोर्ट कारगर साबित होंगे।
किदवई नगर के ब्लॉक स्थित मकान नंबर 128/709 में दंगाइयों ने एक नवंबर 1984 को धावा बोला था। सेवादार गुरुदयाल और सरदुल की नृशंस हत्या कर दी थी। फोरेंसिक जांच में मकान की दीवारों पर आग के निशान और खून जैसे धब्बे मिले थे, जिसको टीम ने जांच के लिए संकलित किया था।
एसआईटी एसएसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि फोरेंसिक टीम ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में खून के धब्बों की पुष्टि हुई है। वहीं आग के जो निशान मिले हैं, वो करीब तीन से चार दशक पुराने हैं। दंगों के इतने साल बाद घटनास्थल से ऐसे साक्ष्य मिलना एसआईटी की जांच के लिए संजीवनी है। एसएसपी का कहना है कि फोरेंसिक जांच से केस मजबूत हुआ है। कोर्ट में मजबूती से पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाई जाएगी।
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आरोपियों को खोजना चुनौती
एसएसपी ने बताया कि परिजनों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उनके बयानों व अन्य दस्तावेजों के आधार पर कुछ दंगाइयों के बारे में पता चला है। सत्यापन भी कराया गया है। हालांकि सभी आरोपियों के बारे में अभी जानकारी नहीं हो सकी है। दरअसल, केस इतने साल पुराना है कि कई आरोपी शहर छोड़ गए तो कइयों की मौत हो चुकी है। ऐसी स्थिति में एक-एक आरोपी की तलाश करना बड़ी चुनौती है।
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किदवई नगर के ब्लॉक स्थित मकान नंबर 128/709 में दंगाइयों ने एक नवंबर 1984 को धावा बोला था। सेवादार गुरुदयाल और सरदुल की नृशंस हत्या कर दी थी। फोरेंसिक जांच में मकान की दीवारों पर आग के निशान और खून जैसे धब्बे मिले थे, जिसको टीम ने जांच के लिए संकलित किया था।
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एसआईटी एसएसपी बालेंदु भूषण सिंह ने बताया कि फोरेंसिक टीम ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में खून के धब्बों की पुष्टि हुई है। वहीं आग के जो निशान मिले हैं, वो करीब तीन से चार दशक पुराने हैं। दंगों के इतने साल बाद घटनास्थल से ऐसे साक्ष्य मिलना एसआईटी की जांच के लिए संजीवनी है। एसएसपी का कहना है कि फोरेंसिक जांच से केस मजबूत हुआ है। कोर्ट में मजबूती से पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाई जाएगी।
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आरोपियों को खोजना चुनौती
एसएसपी ने बताया कि परिजनों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उनके बयानों व अन्य दस्तावेजों के आधार पर कुछ दंगाइयों के बारे में पता चला है। सत्यापन भी कराया गया है। हालांकि सभी आरोपियों के बारे में अभी जानकारी नहीं हो सकी है। दरअसल, केस इतने साल पुराना है कि कई आरोपी शहर छोड़ गए तो कइयों की मौत हो चुकी है। ऐसी स्थिति में एक-एक आरोपी की तलाश करना बड़ी चुनौती है।