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सिख विरोधी दंगा: पंजाब गई एसआईटी से पीड़ित परिवार बोला- सुबह होते ही दंगाइयों ने कर दिया था हमला, हर तरफ था खून ही खून
Fri, 17 Sep 2021 01:13 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 17 Sep 2021 01:13 AM IST
सार
सुरिंदर कौर के अलावा दिलावर सिंह व चरनजीत ने भी एक नवंबर 1984 को हुए नरसंहार के बारे में जानकारी दी। पीड़ितों ने कुछ आरोपियों के नाम भी बताए हैं। एसआईटी ने उनके नाम गोपनीय रखे हैं।
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सिख विरोधी दंगा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुबह का वक्त था। अचानक सैकड़ों की भीड़ ने घर पर हमला कर दिया। लाठी डंडे, चाकू, तलवारों से मारने लगे। हम किसी तरह से वहां से बचकर भागे। कुछ ही देर में मेरे पति को मार दिया गया। पूरे घर में खून ही खून था।
दंगों के बारे में ये दस्तां पीड़िता सुरिंदर कौर ने एसआईटी को बताईं। एसआईटी की टीम ने गुरुवार को पंजाब में उनके बयान दर्ज किए। दो अन्य पीड़ित परिवारों के भी बयान लिए। सिख विरोधी दंगों में शहर के 127 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
इसमें दबौली के तीन परिवारों के पांच सदस्य भी थे। एक परिवार से सरदार भगवान सिंह और दूसरे परिवार से करन सिंह व उनकी पत्नी सतवंत कौर की हत्या की गई थी। वहीं तीसरे परिवार में पिता-पुत्र तेज सिंह व सतपाल सिंह को दंगाइयों ने मार दिया था।
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दंगों के बाद भगवान सिंह की पत्नी सुरिंदर, करन सिंह के बेटे दिलावर सिंह और तेज सिंह के बेटे चरनजीत सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। एसआईटी ने इन सभी को खोज निकाला। जिसके बाद दो दिन पहले टीम पंजाब रवाना हुई थी।
सुरिंदर कौर के अलावा दिलावर सिंह व चरनजीत ने भी एक नवंबर 1984 को हुए नरसंहार के बारे में जानकारी दी। पीड़ितों ने कुछ आरोपियों के नाम भी बताए हैं। एसआईटी ने उनके नाम गोपनीय रखे हैं। उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जाएंगे।
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दंगों के बारे में ये दस्तां पीड़िता सुरिंदर कौर ने एसआईटी को बताईं। एसआईटी की टीम ने गुरुवार को पंजाब में उनके बयान दर्ज किए। दो अन्य पीड़ित परिवारों के भी बयान लिए। सिख विरोधी दंगों में शहर के 127 लोगों की हत्या कर दी गई थी।
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इसमें दबौली के तीन परिवारों के पांच सदस्य भी थे। एक परिवार से सरदार भगवान सिंह और दूसरे परिवार से करन सिंह व उनकी पत्नी सतवंत कौर की हत्या की गई थी। वहीं तीसरे परिवार में पिता-पुत्र तेज सिंह व सतपाल सिंह को दंगाइयों ने मार दिया था।
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दंगों के बाद भगवान सिंह की पत्नी सुरिंदर, करन सिंह के बेटे दिलावर सिंह और तेज सिंह के बेटे चरनजीत सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। एसआईटी ने इन सभी को खोज निकाला। जिसके बाद दो दिन पहले टीम पंजाब रवाना हुई थी।
सुरिंदर कौर के अलावा दिलावर सिंह व चरनजीत ने भी एक नवंबर 1984 को हुए नरसंहार के बारे में जानकारी दी। पीड़ितों ने कुछ आरोपियों के नाम भी बताए हैं। एसआईटी ने उनके नाम गोपनीय रखे हैं। उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जाएंगे।