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सिख दंगा: जान बचाने वाले पड़ोसी के दर्ज किए बयान, सगे भाइयों की हुई थी हत्या, परिवार के सदस्यों ने ऐसे बचाई थी जान
Sat, 06 Feb 2021 12:44 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 06 Feb 2021 12:44 PM IST
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सिख विरोधी दंगा
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1984 सिख दंगों के दौरान चकेरी के जेके कालोेनी में हुई दो सगे भाइयों की हत्या के मामले में एसआईटी ने दंगा पीड़ित मां बेटी के बयान के बाद जान बचाने वाले एक वृद्घ पड़ोसी के भी बयान दर्ज किए हैं। बुजुर्ग पड़ोसी ने आधा दर्जन से अधिक दंगाइयों के नाम दर्ज कराए हैं, जिसमें से कई कानपुर की बड़ी हस्ती हैं।
उन्होंने एसआईटी को बताया कि पीड़ित परिवार के सदस्य जब भी शहर आते हैं तो वह उनसे मिलने जरूर आते हैं। दंगाइयों ने चकेरी के जेके कॉलोनी में सरदार प्रेम सिंह के दो बेटों नरेंदर और सुरेंदर सिंह की हत्या कर दी थी। परिवार के अन्य सदस्यों ने छत के रास्ते पड़ोसी के घर में जाकर जान बचाई थी।
इस हादसे के बाद नरेंदर की पत्नी परिवार संग लंदन में शिफ्ट हो र्गइं। सुरेंदर की पत्नी हरविंदर कौर अपनी दो बेटियों के साथ चेन्नई में रहने लगीं। एसआईटी ने चेन्नई जाकर मां-बेटियों के बयान दर्ज किए थे। वहां से वापस आने के बाद टीम ने दोबारा घटनास्थल के आसपास पूछताछ की तो पास ही रहने वाले एक वृद्ध ने आंखों देखी घटना बताई।
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उन्होंने बताया कि एक नवंबर 1984 को सैकड़ों दंगाइयों ने हमला किया था। छत के रास्ते उन्होंने प्रेम सिंह व उनके परिवार को निकाला था, लेकिन दंगाई उनके दो बेटों को बाहर खींच ले गए थे और हत्या कर दी थी। एसपी एसआईटी बालेंदु भूषण ने बताया कि चकेरी की घटना में मां-बेटियों की गवाही अहम है। कुछ स्थानीय निवासी भी गवाही देने के लिए तैयार हो गए हैं। थानों से पुराने अपराधियों के बारे में भी जानकारी ली जा रही है।
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उन्होंने एसआईटी को बताया कि पीड़ित परिवार के सदस्य जब भी शहर आते हैं तो वह उनसे मिलने जरूर आते हैं। दंगाइयों ने चकेरी के जेके कॉलोनी में सरदार प्रेम सिंह के दो बेटों नरेंदर और सुरेंदर सिंह की हत्या कर दी थी। परिवार के अन्य सदस्यों ने छत के रास्ते पड़ोसी के घर में जाकर जान बचाई थी।
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इस हादसे के बाद नरेंदर की पत्नी परिवार संग लंदन में शिफ्ट हो र्गइं। सुरेंदर की पत्नी हरविंदर कौर अपनी दो बेटियों के साथ चेन्नई में रहने लगीं। एसआईटी ने चेन्नई जाकर मां-बेटियों के बयान दर्ज किए थे। वहां से वापस आने के बाद टीम ने दोबारा घटनास्थल के आसपास पूछताछ की तो पास ही रहने वाले एक वृद्ध ने आंखों देखी घटना बताई।
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उन्होंने बताया कि एक नवंबर 1984 को सैकड़ों दंगाइयों ने हमला किया था। छत के रास्ते उन्होंने प्रेम सिंह व उनके परिवार को निकाला था, लेकिन दंगाई उनके दो बेटों को बाहर खींच ले गए थे और हत्या कर दी थी। एसपी एसआईटी बालेंदु भूषण ने बताया कि चकेरी की घटना में मां-बेटियों की गवाही अहम है। कुछ स्थानीय निवासी भी गवाही देने के लिए तैयार हो गए हैं। थानों से पुराने अपराधियों के बारे में भी जानकारी ली जा रही है।