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UP: मासूम बेटी का शव ले जाने के लिए नहीं मिली एंबुलेंस, दो घंटे बिलखते रहे दंपती, लोगों ने निजी गाड़ी से भेजा

Wed, 18 Dec 2024 09:06 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 18 Dec 2024 09:06 PM IST
सार

Mahoba News: मासूम बेटी का शव ले जाने के लिए जिला अस्पताल में एंबुलेंस तक नहीं मिली। बांदा तिराहे पर मृत बेटी को लिए बैठे दंपती को देख लोगों ने निजी साधन घर पहुंचाया।

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Ambulance not available to take innocent daughter's body, couple kept crying for two hours
बांदा तिराहे पर बेटी के शव को गोद में लेकर भटकता पिता भानु प्रताप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिला अस्पताल में एक मासूम बच्ची की मौत हो गई। बेटी का शव घर ले जाने के लिए उन्हें एंबुलेंस नहीं मिली। बिलखते दंपती बेटी का शव गोद में लेकर सर्द रात में घंटों भटकते रहे। करीब दो घंटे बाद जागरूक लोगों ने निजी साधन से दंपती और उसकी मृत बेटी को सात किमी. दूर घर तक पहुंचाया। थाना कबरई के कैमाहा गांव निवासी भानु प्रताप गांव का चौकीदार है। उसकी सात माह की बेटी अनुराधा की मंगलवार की दोपहर अचानक हालत बिगड़ गई। वह उसका इलाज कराने कस्बा कबरई के एक निजी क्लीनिक गया।

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आराम न मिलने पर जिला अस्पताल पहुंचा। वहां बेटी की मौत हो गई। पिता का आरोप है कि जिला अस्पताल पहुंचने पर उसे महिला अस्पताल भेजा गया। वहां से फिर जिला अस्पताल ले जाने की बात कही गई। एक घंटे बाद भी मासूम बेटी को भर्ती न किए जाने से उसकी मौत हो गई। जब स्वास्थ्यकर्मियों से शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की बात कही गई तो उसे भगा दिया गया।

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लोगों ने निजी साधन से गांव पहुंचाया
किसी तरह वह रात नौ बजे ऑटो से बेटी का शव लेकर कबरई पहुंचा। यहां से सात किमी दूर गांव के लिए कोई साधन न होने पर वह बांदा तिराहे पर दो घंटे पत्नी सुमन के साथ बेटी का शव लिए बैठा रहा। दंपती को रोते-बिलखते देख वहां से गुजर रहे अजय पांडेय, सुरेश शिवहरे, विजय, राकेश कुशवाहा आदि लोगों ने उसे निजी साधन से कैमाहा गांव पहुंचाया। उधर, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पवन कुमार अग्रवाल का कहना है कि एंबुलेंस के लिए अस्पताल में जगह-जगह नंबर अंकित हैं। पीड़ित ने एंबुलेंस के लिए कोई फोन नहीं लगाया। यदि, वह जानकारी देता तो एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाती। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
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