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जैकपॉट ने पूरा कर दिया एक हसीन ख्वाब, बोले- "धन्यवाद अमर उजाला"
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 29 Mar 2018 09:07 AM IST
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अमर उजाला जैकपॉट धमाका में जीता थ्री बीएचके फ्लैट
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला जैकपॉट धमाका में कानपुर अशोक नगर 80 फीट रोड निवासी संजय भाटिया ने एक थ्री बीएचके फ्लैट जीता है। यह फ्लैट नोएडा में है। जनरल स्टोर चलाने वाले संजय को फोन पर इसकी जानकारी दी गई तो उन्हें पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। फ्लैट जीतने के बाद पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। संजय कहते हैं नोएडा जैसी जगह में फ्लैट खरीदना उनके लिए सपने जैसा था। अमर उजाला की वजह से उनका यह सपना हकीकत मेें बदला है। धन्यवाद अमर उजाला।
अमर उजाला की ओर से जैकपॉट धमाका निकाला गया था। इसके तहत पाठकों को अखबार में प्रकाशित एक प्रारूप में कूपन चिपकाकर भेजने थे। सोमवार को इसका लकी ड्रॉ निकाला गया। इसमें संजय ने फ्लैट जीता है। संजय का रावतपुर में जनरल स्टोर है। परिवार में एयरफोर्स से सार्जेंट पद से रिटायर पिता कृष्ण गोपाल भाटिया, मां प्रेम भाटिया और दो बच्चे गोरांश और तान्या हैं। संजय की पत्नी का निधन हो चुका है। संजय ने बताया कि बेटी और मां के भाग्य से ही फ्लैट निकला है। मां ही रोजाना न्यूजपेपर से कूपन काटती थीं और एकत्र करती थीं। फ्लैट जीतने की जानकारी होने पर संजय की बहन रीना भाटिया भी उनके घर पहुंची और बधाई दी।
सोचता था कि फ्लैट खरीदूंगा
संजय भाटिया कहते हैं कि इस दुकान से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च ही बमुश्किल चल पाता है। मकान खरीदना, वह भी नोएडा में उनके लिए सपने जैसा था। बस सोचता था कि एक अच्छा फ्लैट खरीदूंगा। आप सपना सच हो गया।
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अमर उजाला की ओर से जैकपॉट धमाका निकाला गया था। इसके तहत पाठकों को अखबार में प्रकाशित एक प्रारूप में कूपन चिपकाकर भेजने थे। सोमवार को इसका लकी ड्रॉ निकाला गया। इसमें संजय ने फ्लैट जीता है। संजय का रावतपुर में जनरल स्टोर है। परिवार में एयरफोर्स से सार्जेंट पद से रिटायर पिता कृष्ण गोपाल भाटिया, मां प्रेम भाटिया और दो बच्चे गोरांश और तान्या हैं। संजय की पत्नी का निधन हो चुका है। संजय ने बताया कि बेटी और मां के भाग्य से ही फ्लैट निकला है। मां ही रोजाना न्यूजपेपर से कूपन काटती थीं और एकत्र करती थीं। फ्लैट जीतने की जानकारी होने पर संजय की बहन रीना भाटिया भी उनके घर पहुंची और बधाई दी।
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सोचता था कि फ्लैट खरीदूंगा
संजय भाटिया कहते हैं कि इस दुकान से बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च ही बमुश्किल चल पाता है। मकान खरीदना, वह भी नोएडा में उनके लिए सपने जैसा था। बस सोचता था कि एक अच्छा फ्लैट खरीदूंगा। आप सपना सच हो गया।
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