अमर उजाला स्वास्थ्य अभियान: भ्रम टूटा तो मची वैक्सीन की होड़, स्वास्थ्य विभाग ने छोटे लाभार्थियों पर केंद्रित किया ध्यान
सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह ने बताया कि 18 साल से अधिक उम्र का लक्ष्य पूरा हो गया है। अब सारा जोर छोटे आयु वर्ग के लाभार्थियों का लक्ष्य पूरा करने पर है।
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कोरोना रोधी वैक्सीन को लेकर भ्रम भी बहुत रहे हैं। खासतौर पर ब्लड प्रेशर बढ़ने, चक्कर आने और शरीर में अन्य तरह की दिक्कतें पैदा होने के भ्रम से ग्रसित लोग शुरुआती दौर में वैक्सीन लगवाने से कतराते रहे। बच्चों को लेकर लोग ज्यादा सशंकित थे। वैक्सीन की शुरुआत के बाद अब लोगों का भ्रम टूट रहा है।
इससे वैक्सीन लगवाने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है। लाभार्थियों की संख्या अधिक होने पर स्वास्थ्य विभाग को अब सेंटर बढ़ाने पड़ रहे हैं। एक सेंटर से 12 से 14 साल आयु वर्ग के लाभार्थियों को वैक्सीन लगाने की शुरुआत की गई थी और अब सेंटरों की संख्या 162 तक पहुंच चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग ने सेंटरों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग से और स्कूलों की सूची मांगी है। 18 साल से अधिक आयु के लाभार्थियों के वैक्सीनेशन की शुरुआत की गई तो इक्का-दुक्का लोगों की तबीयत खराब हो गई थी। उर्सला में एक महिला का ब्लड प्रेशर वैक्सीन लगवाते ही बढ़ गया।
एक और व्यक्ति को बेहोशी आ गई। किसी को फ्लू जैसे लक्षण उभर आए और बुखार कई दिन रहा। इसी तरह के किस्से सेंटरों पर चर्चा में रहे, जिनकी वजह से लोग बच्चों को वैक्सीन लगवाने में हिचक रहे थे। हालांकि, बच्चों को लगने वाली कोर्बेवैक्स वैक्सीन कोवाक्सिन और कोविशील्ड से भी बेहतर है।
स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में एक भी लाभार्थी को बुखार आने की रिपोर्ट नहीं है। जिन बच्चों को वैक्सीन लगाई जा रही है, उनकी निगरानी भी हो रही है। इस तरह कोर्बेवैक्स ने सभी तरह की भ्रांतियों को दूर कर दिया है।
बच्चे उत्साहित, अभिभावक भी ले रहे दिलचस्पी
गीतानगर अरबन पीएचसी पर आए कुशाल (15) का कहना है कि वैक्सीन कोरोना से बचाव करेगी। इस संबंध में डॉक्टरों ने बताया कि हल्का सा बुखार आ सकता है, तब पैरासीटामॉल ले लेंगे। वैसे उनके साथियों में किसी को बुखार नहीं आया। रावतपुर के लाभार्थी विनोद (13) ने बताया कि वह वैक्सीन लगवाने के बाद स्कूल गए थे।
किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई। अब सभी वैक्सीन लगवाने के लिए जा रहे हैं। केंद्र के प्रभारियों का कहना है कि बच्चे अधिक उत्साहित हैं। साथ ही अभिभावक भी दिलचस्पी ले रहे हैं। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह ने बताया कि 18 साल से अधिक उम्र का लक्ष्य पूरा हो गया है। अब सारा जोर छोटे आयु वर्ग के लाभार्थियों का लक्ष्य पूरा करने पर है।