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दिन भर ठप रहीं ऑनलाइन सेवाएं अम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 31 Mar 2016 01:08 AM IST
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नगर निगम के आईटी विभाग में बुधवार की दोपहर पसरा सन्नाटा।
- फोटो : amar ujala
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कानपुर। भुगतान न मिलने पर इंटरनेट प्रदाता कंपनी रेलटेल ने नगर निगम का कनेक्शन बंद कर दिया है। इससे नगर निगम की ऑनलाइन सेवाएं ठप पड़ गईं। ऑनलाइन जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र समेत कई काम बाधित हो गए। सीएम, डीएम दफ्तर से नगर निगम से संबंधित शिकायतें भी नहीं आ पाईं। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के दौरान ऑनलाइन हाउस टैक्स भी नहीं जमा हो पा रहा है। इससे अफरा - तफरी मचने के बाद नगर आयुक्त ने रात में कनेक्शन जुड़वाया।
नगर निगम में पांच साल से रेलटेल कंपनी का इंटरनेट कनेक्शन चल रहा है। पहले इसकी स्पीड पांच एमबीपीएस (मेगा बाइट प्रति सेकेंड) थी, जिसे दो साल पहले बढ़ाकर 10 एमबीपीएस किया गया। कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग बढ़ने पर पिछले साल 20 एमबीपीएस की स्पीड के साथ रेलटेल ने तीन साल तक इंटरनेट सेवा देने के लिए 17 लाख रुपये में अनुबंध किया। करार में टैक्स अलग से देने पर सहमति बनी।
पिछले महीने रेलटेल ने नगर निगम को तीन साल के पैकेज के लिए 20 लाख रुपये का बिल भेजा, जिसमें 17 लाख करार के और तीन लाख रुपये टैक्स के हैं। नगर निगम ने भुगतान नहीं किया। कंपनी ने 25 मार्च तक का अंतिम समय दिया। इसके बावजूद नगर निगम ने भुगतान नहीं किया तो 29 मार्च को इंटरनेट कनेक्शन काट दिया गया। इससे नगर निगम की सभी ऑन लाइन सेवाएं ठप पड़ गईं। इसके बावजूद आईटी विभाग ने नगर आयुक्त को इसकी सूचना तक नहीं दी, बल्कि
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कार्रवाई से बचने के लिए उनके
दफ्तर को एनआईसी के नेट कनेक्शन से जोड़ दिया।
शाम को नगर आयुक्त देवेंद्र सिंह कुशवाहा को इसका पता चला। उन्होंने तुरंत आईटी प्रभारी सुरेश चंद्र को फटकार लगाई। नेट सर्विस देने वाली कंपनी से बात कर कनेक्शन जुड़वाया।
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नगर निगम में पांच साल से रेलटेल कंपनी का इंटरनेट कनेक्शन चल रहा है। पहले इसकी स्पीड पांच एमबीपीएस (मेगा बाइट प्रति सेकेंड) थी, जिसे दो साल पहले बढ़ाकर 10 एमबीपीएस किया गया। कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग बढ़ने पर पिछले साल 20 एमबीपीएस की स्पीड के साथ रेलटेल ने तीन साल तक इंटरनेट सेवा देने के लिए 17 लाख रुपये में अनुबंध किया। करार में टैक्स अलग से देने पर सहमति बनी।
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पिछले महीने रेलटेल ने नगर निगम को तीन साल के पैकेज के लिए 20 लाख रुपये का बिल भेजा, जिसमें 17 लाख करार के और तीन लाख रुपये टैक्स के हैं। नगर निगम ने भुगतान नहीं किया। कंपनी ने 25 मार्च तक का अंतिम समय दिया। इसके बावजूद नगर निगम ने भुगतान नहीं किया तो 29 मार्च को इंटरनेट कनेक्शन काट दिया गया। इससे नगर निगम की सभी ऑन लाइन सेवाएं ठप पड़ गईं। इसके बावजूद आईटी विभाग ने नगर आयुक्त को इसकी सूचना तक नहीं दी, बल्कि
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कार्रवाई से बचने के लिए उनके
दफ्तर को एनआईसी के नेट कनेक्शन से जोड़ दिया।
शाम को नगर आयुक्त देवेंद्र सिंह कुशवाहा को इसका पता चला। उन्होंने तुरंत आईटी प्रभारी सुरेश चंद्र को फटकार लगाई। नेट सर्विस देने वाली कंपनी से बात कर कनेक्शन जुड़वाया।