{"_id":"6a0a2b7877b94dafd40251b2","slug":"all-accused-of-breaching-the-home-guard-recruitment-exam-suspended-kanpur-news-c-12-1-knp1051-1527637-2026-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: होमगार्ड भर्ती परीक्षा में सेंधमारी के सभी आरोपी निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: होमगार्ड भर्ती परीक्षा में सेंधमारी के सभी आरोपी निलंबित
विज्ञापन
कानपुर। बीएनएसडी इंटर कॉलेज में उत्तर प्रदेश होमगार्ड भर्ती की लिखित परीक्षा के दौरान हुई सेंधमारी के आरोपियों को आखिरकार निलंबित कर दिया गया। विभाग ने सुध लेते हुए प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य समेत पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई विभागीय अनुशासनात्मक जांच पूरी होने तक प्रभावी रहेगी।
मामला 25 अप्रैल 2026 को द्वितीय पाली में आयोजित परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा केंद्र पर अनियमितताओं और आपराधिक घटना की शिकायत सामने आई थी। जांच में विद्यालय के कई शिक्षकों की संलिप्तता सामने आई थी। प्रवक्ता अखिलेश यादव पर आपराधिक कृत्य में संलिप्तता भी पाई गई जिसके चलते उनको जेल भी भेजा गया पर निलंबन नहीं हुआ था। इसके बाद प्रशासनिक समिति की एक मई और प्रबंध समिति की 11 मई को हुई आपात बैठकों में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
जांच में ब्लॉक-ए के केंद्र व्यवस्थापक व प्रधानाचार्य अमर सिंह, सह केंद्र व्यवस्थापक ललित कुमार बाजपेई (प्रवक्ता अंग्रेजी), ब्लॉक-बी के केंद्र व्यवस्थापक सुशील कुमार (उप प्रधानाचार्य), सह केंद्र व्यवस्थापक प्रशांत यादव (प्रवक्ता अंग्रेजी) और प्रवक्ता (रसायन विज्ञान) अखिलेश यादव की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इन पर लापरवाही, अनियमितता, पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर चूक और तथ्यों को छिपाने के आरोप लगे हैं।
विज्ञापन
गुरुवार को जमानत पर रिहा हुए अखिलेश यादव ने शुक्रवार को आकर विद्यालय की उपस्थिति पंजिका में अपने हस्ताक्षर किए। इस मुद्दे को अमर उजाला ने उठाया और 16 मई के अंक में प्रकाशित किया। इसके बाद डीएम ने मामला संज्ञान में लिया। संस्था के प्रबंधक की संस्तुति पर माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 16-छ के तहत सभी आरोपियों को निलंबित कर दिया गया है।
विज्ञापन
मामला 25 अप्रैल 2026 को द्वितीय पाली में आयोजित परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा केंद्र पर अनियमितताओं और आपराधिक घटना की शिकायत सामने आई थी। जांच में विद्यालय के कई शिक्षकों की संलिप्तता सामने आई थी। प्रवक्ता अखिलेश यादव पर आपराधिक कृत्य में संलिप्तता भी पाई गई जिसके चलते उनको जेल भी भेजा गया पर निलंबन नहीं हुआ था। इसके बाद प्रशासनिक समिति की एक मई और प्रबंध समिति की 11 मई को हुई आपात बैठकों में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
विज्ञापन
जांच में ब्लॉक-ए के केंद्र व्यवस्थापक व प्रधानाचार्य अमर सिंह, सह केंद्र व्यवस्थापक ललित कुमार बाजपेई (प्रवक्ता अंग्रेजी), ब्लॉक-बी के केंद्र व्यवस्थापक सुशील कुमार (उप प्रधानाचार्य), सह केंद्र व्यवस्थापक प्रशांत यादव (प्रवक्ता अंग्रेजी) और प्रवक्ता (रसायन विज्ञान) अखिलेश यादव की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इन पर लापरवाही, अनियमितता, पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर चूक और तथ्यों को छिपाने के आरोप लगे हैं।
विज्ञापन
गुरुवार को जमानत पर रिहा हुए अखिलेश यादव ने शुक्रवार को आकर विद्यालय की उपस्थिति पंजिका में अपने हस्ताक्षर किए। इस मुद्दे को अमर उजाला ने उठाया और 16 मई के अंक में प्रकाशित किया। इसके बाद डीएम ने मामला संज्ञान में लिया। संस्था के प्रबंधक की संस्तुति पर माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 16-छ के तहत सभी आरोपियों को निलंबित कर दिया गया है।