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Kanpur: हैलट में अलार्म बज नहीं रहा, स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर भी नहीं, निरीक्षण में सामने आईं ये खामियां

Sun, 17 Nov 2024 10:09 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 17 Nov 2024 10:09 AM IST
सार

Kanpur News: झांसी की घटना के बाद प्राचार्य ने अस्पताल का निरीक्षण किया, जिसमें कई कमियां सामने आई हैं। हैलट में फायर सेफ्टी सिस्टम में काम पूरा नहीं है।

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Alarm is not ringing in Hallet there is no smoke detector and sprinkler either these flaws came to light
निरीक्षण करते प्राचार्य - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में हैलट के फायर सेफ्टी सिस्टम में भी कई खामियां हैं। कार्यदायी संस्था ने कई स्थानों पर कमियां छोड़ रखी हैं। एसएनसीयू, पीआईसीयू के फायर सेफ्टी सिस्टम में कई अलार्म बजते ही नहीं हैं। इसके साथ ही स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर नहीं लगे। झांसी के मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में आग की घटना के बाद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने निरीक्षण किया, तो कमियां पकड़ में आईं। हैलट के इंटेंसिव केयर यूनिटों और वार्डों में फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने का काम यूपी राजकीय निर्माण निगम करा रहा है।

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जच्चा-बच्चा अस्पताल के परिसर में बने एसएनसीयू की दीवार पर बिजली का पैनल लगाया जा रहा था। इससे स्पार्किंग होने का खतरा रहता है। इस पर प्राचार्य डॉ. काला ने वहां से पैनल हटाने के निर्देश दिए कि इसे कहीं और शिफ्ट करें। इसके साथ ही आग बुझाने के लिए लगा पानी का पाइप लीक कर रहा था। इसके पास में बिजली का तार लटक रहा था। इससे फ्लड लाइट जुड़ी थी। इसे भी वहां से शिफ्ट कराया गया। एसएनसीयू में बैक डोर नहीं था।  इस पर प्राचार्य ने कहा कि एसएनसीयू में बैक डोर बनाने के लिए कहा।

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इसके साथ ही ग्रिल वाली खिड़कियों को हटाकर पलड़े वाली लगाई जाएंगी। इससे किसी आपात स्थिति में खिड़की से बच्चों को निकाला जा सके। डॉ. काला ने बताया कि एसएनसीयू में एक और दरवाजा लगाया जाएगा। इसके साथ ही ऑक्सीजन के प्वाइंट के नियमित जांच की व्यवस्था कर दी गई है। इसके साथ ही एसएनसीयू, पीआईसीयू और आईसीयू में प्लास्टिक का सामान न रखने के लिए कहा गया। ऐसे सामान से जल्दी आग पकड़ सकती है। पीआईसीयू में जांच के दौरान पाइप कनेक्शन टूटा मिला। यहां हॉर्स पाइप लगाने के लिए कहा गया, जिससे तेज प्रेशर से पानी ऊपर पहुंचाया जा सके।

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बैटरी लाइट की व्यवस्था करने के लिए कहा
मेटरनिटी विंग में संचालित पीआईसीयू में रैंप नहीं बनाया गया है। यहां से उतरने का रास्ता सीढ़ियां ही हैं। यहां कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग कार्य करा रहा है। प्राचार्य डॉ. काला ने कहा कि कार्यदायी संस्था ने रैंप पीआईसीयू तक नहीं बनाया। इसे सौ बेड वाले आईसीयू से एलिवेटेड मार्ग बनाकर जोड़ जाएगा। इसके साथ ही बैटरी लाइट की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। इससे आग लगने पर जब बिजली काटी जाती है, तो वार्ड में अंधेरा नहीं रहेगा। इस मौके पर हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह, डॉ. अनुराग राजौरिया, बालरोग अस्पताल के सीएमएस डॉ. विनय, फायर सेफ्टी के नोडल अधिकारी डॉ. एसके गौतम आदि रहे।

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एनआईसीयू के लिए अलग से कोई फायर सेफ्टी व्यवस्था नहीं होती, जो अस्पताल के लिए होती है…वही एनआईसीयू के लिए भी होती है। एक पानी का टैंक होना चाहिए, फायर पंप होना चाहिए। एक प्रवेश द्वार और बाहर निकलने के लिए एक दरवाजा हो।  -दीपक शर्मा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी

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