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जहरीली हवा में भी लेना चाहते हैं एकदम कड़क मजा तो ले आईये आईआईटी वाला मास्क
Thu, 10 Jan 2019 06:22 PM IST
gaurav gaurav
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: gaurav gaurav
Updated Thu, 10 Jan 2019 06:22 PM IST
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कानपुर शहर में प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान से ऊपर है। ऐसे में अगर आप खुद को ऐसे बीमारियों से दूर रखना चाहते हैं और जहरीली हवा में भी एकदम कड़क मजा लेना चाहते हैं तो आपको आईआईटी वाले मास्क की जरूरत पड़ेगी। आईआईटी कानपुर ने स्वच्छ हवा लेने के लिए एक अनोखा माास्क तैयार किया है। यह मास्क ठीक वैसे ही काम करता है जैसे चाय को छानने के लिए छलनी का प्रयोग किया जाता है।
आईआईटी कानपुर के डॉ. संदीप पाटिल की देखरेख में छात्रों ने एक मास्क तैयार किया है जिसे लगाने के बाद आप को खुद पता नहीं चलेगा कि आप ने मास्क पहना भी है की नहीं। चार लेयर में बने इस मास्क में नैनो फाइबर टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। इस मास्क को पहनने से सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती है। काफी देर पहने रहने के बाद यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है कि मास्क पहना है या नहीं।
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आईआईटी कानपुर के डॉ. संदीप पाटिल की देखरेख में छात्रों ने एक मास्क तैयार किया है जिसे लगाने के बाद आप को खुद पता नहीं चलेगा कि आप ने मास्क पहना भी है की नहीं। चार लेयर में बने इस मास्क में नैनो फाइबर टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। इस मास्क को पहनने से सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती है। काफी देर पहने रहने के बाद यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है कि मास्क पहना है या नहीं।
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इस मास्क की कीमत 50-60 रुपए रखी गई है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 50-100 रुपये है, इसकी तकनीक भी इतनी हाईटेक नहीं है। डॉ. संदीप बताते हैं कि यह करीब एक माह तक प्रभावी होगा। इस मास्क में लगे नैनो फाइबर हवा में मिले पीएम 2.5, पीएम 10 समेत नैनो पार्टिकल भी सोख लेगा। हवा में मौजूद गैस के साथ छोटे-छोटे बैक्टीरिया भी मास्क को पार नहीं कर सकेंगे। इस मास्क का नाम ‘स्वासा’ रखा गया है।
आईआईटी पहुंचे पी ग्रीन टेक सॉल्यूशन कंपनी के फाउंडर इरफान पठान ने बताया कि प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआं है। अगर गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से जहरीले कणों को अलग कर दिया जाए, तो प्रदूषण कम किया जा सकता है। इसी को देखते हुए उनकी कंपनी ने एक कार्बन कटर मशीन बनाई है, जिसे गाड़ियों के साइलेंसर के पास लगाया जाता है।
मशीन के जरिए गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से पीएम 2.5, पीएम 10 और कार्बनिक कणों को अलग किया जा सकता है। ये कण धुएं से अलग होकर पाउडर के रूप में जमा हो जाते हैं, जिसे बाद में निकाल कर उसका प्रयोग स्याही और डाई के रूप में किया जा सकता है। इस मशीन से नैनो पार्टिकल तक अलग किए जा सकते हैं।
आईआईटी पहुंचे पी ग्रीन टेक सॉल्यूशन कंपनी के फाउंडर इरफान पठान ने बताया कि प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआं है। अगर गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से जहरीले कणों को अलग कर दिया जाए, तो प्रदूषण कम किया जा सकता है। इसी को देखते हुए उनकी कंपनी ने एक कार्बन कटर मशीन बनाई है, जिसे गाड़ियों के साइलेंसर के पास लगाया जाता है।
मशीन के जरिए गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से पीएम 2.5, पीएम 10 और कार्बनिक कणों को अलग किया जा सकता है। ये कण धुएं से अलग होकर पाउडर के रूप में जमा हो जाते हैं, जिसे बाद में निकाल कर उसका प्रयोग स्याही और डाई के रूप में किया जा सकता है। इस मशीन से नैनो पार्टिकल तक अलग किए जा सकते हैं।