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दाे स्टूडेंटाें के माैत के बाद जागा अाईआईटी प्रशासन, लिए बड़े फैसले

Tue, 23 Aug 2016 08:20 PM IST
टीम डिजिटल, कानपुर
टीम डिजिटल, कानपुर Updated Tue, 23 Aug 2016 08:20 PM IST
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after the death of two  Student, IIT administration awakened, takes big decisions
आईआई कानपुर में स्टूडेंटाें का प्राेटेस्ट (फाइल फाेटाे)
 कंप्यूटर सेंटर के प्रिंसिपल रिसर्च इंजीनियर आफताब आलम और मैटेरियल साइंस के रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी) आलोक कुमार पांडेय की मौत से उपजे विवाद के बाद आईआईटी प्रशासन ने हेल्थ सेंटर का नाम बदलकर प्राइमरी हेल्थ सेंटर करने का फैसला कर लिया है। मतलब अब आईआईटी परिसर में केवल प्राथमिक उपचार होगा, इसके बाद स्टूडेंट को बड़े अस्पताल रेफर कर दिया जाएगा। अभी तक यहीं पर पूरे इलाज की सुविधा थी। इस पर इंस्टीट्यूट एडवाइजरी कमेटी (आईएसी) की मुहर लग गई है। जल्द ही औपचारिकता पूरी की जाएगी।
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  प्रिंसिपल रिसर्च इंजीनियरिंग आफताब आलम की मौत फरवरी 2016 में हुई थी। रिसर्च स्कॉलर आलोक कुमार पांडेय की मौत 8 अगस्त को हुई, जिसे लेकर स्टूडेंटों ने जबरदस्त हंगामा किया। स्टूडेंटों ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था और इलाज में लापरवाही का मामला उठाया। तीन दिन तक कामकाज ठप रखा। पढ़ाई नहीं होने दी। इन्हीं मामलों पर आईआईटी प्रशासन ने एक्शन टेकन रिपोर्ट मंगलवार को सार्वजनिक कर दी। यह रिपोर्ट स्टूडेंट और मीडिया को भेजी गई है। आईआईटी प्रशासन का कहना है कि अब रीजेंसी के अलावा कानपुर नगर के तीन अन्य चिकित्सालयों (अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, चांदनी नर्सिंग होम, कुलवंती अस्पताल) से समझौता किया गया है। अब आईआईटी कैंपस में प्राथमिक उपचार के बाद स्टूडेंटों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाएगा। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। आईआईटी कैंपस में करीब आठ हजार स्टूडेंट, टीचर, साइंटिस्ट और कर्मचारी रहते हैं। रजिस्ट्रार (प्रोफेसर इंचार्ज) प्रो. सुधीर मिश्रा ने बताया कि रिसर्च स्कॉलर की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। यह फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट से साफ हो गया है। रिपोर्ट भी सार्वजनिक कर दी गई है। इस पर स्टूडेंट फीडबैक दे सकते हैं। 
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शिक्षकों से पंगा पड़ेगा महंगा

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स्टूडेंटाें का प्राेटेस्ट
आंदोलन के दौरान आईआईटी के शिक्षकों से पंगा लेना स्टूडेंटों को भारी पड़ेगा। कुछ स्टूडेंटों ने ओल्ड स्टूडेंट एक्टिविटी सेंटर (सैक) चौराहे पर प्रो. सिद्धार्थ पांडा को रोका था। तीखी बहस और नोकझोंक भी हुई थी। इसी तरह लेक्चर हॉल कांप्लेक्स गेट पर स्टूडेंटों से बात करने पहुंचे चार सीनियर फैकल्टी से अभद्रता की गई थी। गो बैक, शेम-शेम के नारे भी लगे थे। डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना, डिप्टी डायरेक्टर प्रो. एके चतुर्वेदी और डीन स्टूडेंट ऑफ अफेयर्स प्रो. एआर हरीश को बंधक बनाकर गलत बयानी करने वाले स्टूडेंट भी निशाने पर हैं।
 

अब आर्थिक मदद भी अधर में

मृत रिसर्च स्कॉलर आलोक कुमार पांडेय की परिजनों को आठ लाख रुपये की सहायता राशि अभी तक नहीं मिली है। यह राशि आईआईटी प्रशासन की तरफ से दी जानी है। आईआईटी प्रशासन का कहना है कि आर्थिक सहायता की अनुमति मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मांगी गई है।
 
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परिजनों को जांच रिपोर्ट पर आपत्ति

आलोक के परिजनों ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप लगाया है कि रिपोर्ट में कुछ नहीं है।। मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। आलोक की मौत लापरवाही से हुई थी। इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यदि आईआईटी प्रशासन ने सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे। 
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