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अधिवक्ताओं का रजिस्ट्रेशन हर पांच साल में होगा रिन्यू
अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 07 Jul 2015 02:01 AM IST
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वकीलों को अब हर पांच साल में अपने रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण कराना होगा। कहा जा रहा है कि रजिस्ट्रेशन कराने के बाद प्रैक्टिस के बजाय दूसरे काम करने वाले वकीलों की छटनी करने के लिए बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने यह नई व्यवस्था लागू की है। रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण न कराने वाले वकीलों का नाम स्टेट रोल से हटा दिया जाएगा।
स्टेट रोल से नाम हटाए जाने के बाद वकीलों को वोट डालने और विधि व्यवसाय करने का अधिकार नहीं रहेगा। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अब्दुल रज्जाक खां ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महामंत्री को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने पूरे देश में पांच साल के अंतराल पर वकीलों के रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण अनिवार्य कर दिया है।
जिन वकीलों द्वारा बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से अपने रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण 15 दिसंबर 2015 तक नहीं कराया जाएगा उनका नाम स्टेट रोल से हटा दिया जाएगा। ऐसे वकीलों को वोट डालने और विधि व्यवसाय का अधिकार नहीं रहेगा। वकीलों का कहना है कि बार कौंसिल हर पांच साल बाद वकीलों की वास्तविक संख्या जानने के लिए रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण की व्यवस्था कर रही है।
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दरअसल कई वकीलों का निधन होने के बावजूद उनका रजिस्ट्रेशन चलता रहता है। इसलिए वकीलों की सही स्थिति का पता नहीं रहता है। दूसरा कारण यह भी बताया जा रहा है कि कुछ वकील रजिस्ट्रेशन तो करा लेते हैं लेकिन वह वकालत न कर दूसरे काम करते रहते हैं। ऐसे में नवीनीकरण से स्थिति साफ होगी।
बार एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश शुक्ला ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण का फार्म बार एसोसिएशन दफ्तर से पांच रुपये में मिलेगा। आवेदन फार्म के साथ प्रोसेस फीस सौ रुपये लगेगी। फीस नकद, चेक या डिमांड ड्राफ्ट से जमा की जा सकती है।
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स्टेट रोल से नाम हटाए जाने के बाद वकीलों को वोट डालने और विधि व्यवसाय करने का अधिकार नहीं रहेगा। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अब्दुल रज्जाक खां ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महामंत्री को एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने पूरे देश में पांच साल के अंतराल पर वकीलों के रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण अनिवार्य कर दिया है।
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जिन वकीलों द्वारा बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से अपने रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण 15 दिसंबर 2015 तक नहीं कराया जाएगा उनका नाम स्टेट रोल से हटा दिया जाएगा। ऐसे वकीलों को वोट डालने और विधि व्यवसाय का अधिकार नहीं रहेगा। वकीलों का कहना है कि बार कौंसिल हर पांच साल बाद वकीलों की वास्तविक संख्या जानने के लिए रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण की व्यवस्था कर रही है।
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दरअसल कई वकीलों का निधन होने के बावजूद उनका रजिस्ट्रेशन चलता रहता है। इसलिए वकीलों की सही स्थिति का पता नहीं रहता है। दूसरा कारण यह भी बताया जा रहा है कि कुछ वकील रजिस्ट्रेशन तो करा लेते हैं लेकिन वह वकालत न कर दूसरे काम करते रहते हैं। ऐसे में नवीनीकरण से स्थिति साफ होगी।
बार एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश शुक्ला ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण का फार्म बार एसोसिएशन दफ्तर से पांच रुपये में मिलेगा। आवेदन फार्म के साथ प्रोसेस फीस सौ रुपये लगेगी। फीस नकद, चेक या डिमांड ड्राफ्ट से जमा की जा सकती है।