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पुलिस का दावा: इरादतन की गई थी अधिवक्ता की हत्या, बार एसोसिएशन के चुनाव के दिन संदिग्ध परिस्थितियों में चली थी गोली

Thu, 24 Mar 2022 11:14 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 24 Mar 2022 11:14 AM IST
सार

अधिवक्ता हत्याकांड मामले में विवेचक ने हत्या की धारा में चार्जशीट दाखिल की है। यानी इसमें साबित किया है कि तरु ने गौतम को इरादतन मारा है। दावा किया गया है कि बार के चुनाव की रंजिश में ऐसा किया गया।

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Advocate murder case: Lawyer was murdered intentionally
अधिवक्ता हत्याकांड की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के कचहरी परिसर के पास हुई अधिवक्ता गौतम दत्त की मौत हत्या थी। इरादतन उसको मारा गया। पुलिस ने अपनी विवेचना में यही दावा कर कोर्ट में हत्यारोपी भाजपा नेता तरु अग्रवाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। वारदात के बाद दो बिंदुओं पर जांच हो रही थी कि घटना इरादतन की गई है या गैर इरादतन। अब पूरा मामला स्पष्ट हो गया है।

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17 दिसंबर 2021 को बार एसोसिएशन का चुनाव था। दोपहर बाद चुनाव स्थगित हो गया था। देर शाम कचहरी परिसर के पास अधिवक्ता गौतम दत्त की गोली लगने से मौत हो गई थी। कुछ ही घंटे बाद तरु अग्रवाल ने थाने में सरेंडर कर दिया था। तरु ने पूछताछ में दावा किया था कि वह गौतम का दोस्त है।
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गलती से असलहे से गोली चल गई जो गौतम को लग गई। जानबूझकर उसको नहीं मारा है। इधर, गौतम के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया था। मामले की विवेचना एसीपी कोतवाली अशोक कुमार सिंह कर रहे थे। कुछ समय पहले ही उन्होंने तरु अग्रवाल के खिलाफ हत्या के आरोप में ही चार्जशीट दाखिल कर दी है। जल्द केस की सुनवाई शुरू होगी।

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सवाल अभी भी बरकरार
विवेचक ने हत्या की धारा में चार्जशीट दाखिल की है। यानी इसमें साबित किया है कि तरु ने गौतम को इरादतन मारा है। दावा किया गया है कि बार के चुनाव की रंजिश में ऐसा किया गया। मगर इसमें एक अनसुलझा सवाल है। वारदात के बाद ही सामने आया था कि गौतम व तरु दोनों एक प्रत्याशी को सपोर्ट कर रहे थे। ऐसे में आपसी चुनावी रंजिश कैसे पैदा हो गई। यही वजह है कि गैर इरादतन हत्या के पहलू पर भी जांच चल रही थी। 

चश्मदीद नहीं आए सामने 
सीसीटीवी फुटेज से पता चला था कि घटना के वक्त कुछ अधिवक्ता मौजूद हैं। पुलिस ने उनको बयानों के लिए बुलाया था। एक अधिवक्ता ने विवेचक से संपर्क किया था। सवालों की सूची लेकर वह चले गए थे। दोबारा नहीं लौटे। ऐसे में किसी भी चश्मदीद का बयान नहीं हो सका। इसके बावजूद विवेचना पूरी की गई है तो ये आगे पता चलेगा कि पुलिस के पास आरोपी के खिलाफ कितने साक्ष्य थे।
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