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मिलावट का कारोबार: जब तक आती रिपोर्ट, खप चुका होता सामान
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कानपुर। त्योहार आते ही बाजार में मिठाइयों समेत अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट का गंदा खेल भी शुरू हो जाता है। दिवाली समेत हर त्योहार से पहले खाद्य विभाग की ओर से छापा और नमूने लेने की कार्रवाई रस्मी बन चुकी है। हकीकत यह है कि इस कवायद का कोई हल निकलता नहीं दिखता क्योंकि छह-सात महीने बाद जब तक जांच रिपोर्ट आती है जब सारी मिठाई व अन्य सामान खप चुका होता है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम में स्पष्ट है कि जांच रिपोर्ट 15 दिन बाद आ जानी चाहिए।
बीते तीन वर्षों की बात करें तो खाद्य विभाग ने कुल 413 नमूने लेकर जांच को लैब भेजे थे। इसमें से 132 नमूने पास और 172 नमूने फेल हो गए। यानी यह खाने योग्य नहीं मिले। रिपोर्ट भी करीब छह से सात माह बाद आई। जिन मिलावटखोरों के नमूने फेल हुए उनमें किसी के भी लाइसेंस खाद्य विभाग ने रद्द नहीं किए। कार्रवाई के नाम पर मुकदमे चले, चालान वसूले और फिर सब ठंडे बस्ते में चला गया।
जांच रिपोर्ट 15 दिन बाद आने का नियम शहर में कागजों तक सीमित है। इसका मुख्य कारण जिले में खाद्य पदार्थों की लैब न होना है। ऐसे में रिपोर्ट आने तक बाजार में उपलब्ध हर मिठाई, खोया, पनीर, दूध समेत अन्य खाद्य समाग्री बिककर खत्म हो चुकी होती है। प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ त्योहार से पहले फोटो सेशन तक सीमित है।
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दिवाली पर अब तक लिए 172 सैंपल
खाद्य विभाग की टीम ने इस वर्ष दीपावली अभियान में 172 सैंपल लिए। इनकी रिपोर्ट करीब छह माह बीतने के बाद ही आएगी। यानी जब जनता मिलावटी खाद्य समाग्री से त्योहार मना चुकी होगी।
मिलावट का सच, मिठास में जहर
पनीर में डिटर्जेंट पाउडर, दाल में रंग, खोया में आटा, हल्दी में मिलावटी पाउडर, मसाले में पपीते के बीज, काजू बर्फी में मूंगफली दाना और मिठाई की चांदी परत में एल्युमीनियम का वर्क हानिकारक होता है। ग्राहकों को त्योहार की मिठास के नाम पर यही परोसा जा रहा है।
दिवाली पर लिए सैंपलों की रिपोर्ट
वर्ष नमूने पास फेल
2022 84 54 30
2023 98 36 62
2024 122 42 80
2025 109 00 00
वर्जन-
जिले में अभी लैब संचालित नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से रिपोर्ट आने में विलंब होता है। जिन कारोबारियों के सैंपलों की रिपोर्ट फेल होती है उनसे जुर्माना वसूला जाता है। लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई भी होती है।
संजय प्रताप सिंह, सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय
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बीते तीन वर्षों की बात करें तो खाद्य विभाग ने कुल 413 नमूने लेकर जांच को लैब भेजे थे। इसमें से 132 नमूने पास और 172 नमूने फेल हो गए। यानी यह खाने योग्य नहीं मिले। रिपोर्ट भी करीब छह से सात माह बाद आई। जिन मिलावटखोरों के नमूने फेल हुए उनमें किसी के भी लाइसेंस खाद्य विभाग ने रद्द नहीं किए। कार्रवाई के नाम पर मुकदमे चले, चालान वसूले और फिर सब ठंडे बस्ते में चला गया।
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जांच रिपोर्ट 15 दिन बाद आने का नियम शहर में कागजों तक सीमित है। इसका मुख्य कारण जिले में खाद्य पदार्थों की लैब न होना है। ऐसे में रिपोर्ट आने तक बाजार में उपलब्ध हर मिठाई, खोया, पनीर, दूध समेत अन्य खाद्य समाग्री बिककर खत्म हो चुकी होती है। प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ त्योहार से पहले फोटो सेशन तक सीमित है।
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दिवाली पर अब तक लिए 172 सैंपल
खाद्य विभाग की टीम ने इस वर्ष दीपावली अभियान में 172 सैंपल लिए। इनकी रिपोर्ट करीब छह माह बीतने के बाद ही आएगी। यानी जब जनता मिलावटी खाद्य समाग्री से त्योहार मना चुकी होगी।
मिलावट का सच, मिठास में जहर
पनीर में डिटर्जेंट पाउडर, दाल में रंग, खोया में आटा, हल्दी में मिलावटी पाउडर, मसाले में पपीते के बीज, काजू बर्फी में मूंगफली दाना और मिठाई की चांदी परत में एल्युमीनियम का वर्क हानिकारक होता है। ग्राहकों को त्योहार की मिठास के नाम पर यही परोसा जा रहा है।
दिवाली पर लिए सैंपलों की रिपोर्ट
वर्ष नमूने पास फेल
2022 84 54 30
2023 98 36 62
2024 122 42 80
2025 109 00 00
वर्जन-
जिले में अभी लैब संचालित नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से रिपोर्ट आने में विलंब होता है। जिन कारोबारियों के सैंपलों की रिपोर्ट फेल होती है उनसे जुर्माना वसूला जाता है। लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई भी होती है।
संजय प्रताप सिंह, सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय