एबीवीपी ने तैयार किया सरकार का 'रिपोर्ट कार्ड', जानें क्या रहा रिजल्ट
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कानपुर प्रांत के 740 एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने 50 गांवों में प्रवास कर सरकारी योजनाओं की हकीकत टटोलने का प्रयास किया है। अक्सर पाया जाता है कि सरकार तो जनता को सुविधा मुहैया कराने के लिए योजनाएं लागू करती है, लेकिन विभिन्न कारणों से योजनाअों का लाभ जनता को नहीं मिल पाता है।
स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की भी हालत जस की तस है। अब यह रिपोर्ट केंद्र व राज्य सरकार के तमाम विभागों में भेजी जाएगी ताकि सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कानपुर प्रांत के अभियान 'सामाजिक अनुभूति 2018' के तहत कार्यकर्ताओं ने आठ से 14 जून तक गांव-गांव जाकर ग्रामीणों और वहां के युवाओें का रुझान लिया। प्रवास के दौरान 10 हजार से ज्यादा ग्रामीणों से बातचीत की गई। यह रिपोर्ट परिषद के मुंबई स्थित मुख्यालय भी भेजी जाएगी।
50 सवाल पूछे गए, ज्यादातर के जवाब एक जैसे रहे
अभियान के तहत 50 सवालों का एक प्रोफार्मा बनाया गया था। इसमेें संबंधित व्यक्ति के गांव के हालात, उनके व्यक्तिगत हालात, समाज के हालात, सरकारी योजनाओं के हालात और विभागों के हालात से जुड़ी जानकारी ली गई थी। लगभग 80 प्रतिशत लोगों के जवाब सभी प्रश्नों पर एक जैसे मिले।
उज्ज्वला योजना और स्वच्छता अभियान की तारीफ
गांवों में उज्ज्वला योजना और स्वच्छता अभियान की तारीफ हुई। एबीवीपी कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों ने इन दोनों योजनाओं को सफल बताया और कहा कि वे लोग खुद इसका लाभ ले रहे हैं। ओडीएफ के तहत गांवों में बनाए जा रहे शौचालयों की भी तारीफ हुई।
यहां गई टीम
डेरापुर ब्लॉक के अंबियापुर, बिसोहा, चिलौली, हारामऊ, मैथा के अलियापुर, भेवान, हथिका, रामगढ़, कल्याणपुर के भूल, बिनौर, भिसार, दूल, होरा बांगर, होरा कछार के अलावा सिकंदरा और पतारा ब्लॉक के गांवों में प्रवास किया।
ये बातें भी सामने आईं
- ग्रामीण युवा स्किल तो हैं लेकिन आर्थिक मदद न होने के कारण वह खुद कुछ शुरू नहीं कर पा रहे हैं।
- गांवों में आज भी जातिगत भेदभाव जैसी कई कुरीतियां लोगों में व्याप्त है। इसे दूर करने के लिए सामाजिक समरसता का अभियान चलाया जाना चाहिए।
- गांवों में महिलाओं का कद बढ़ा है। करीब 40 प्रतिशत महिलाएं जो किसी पद को हासिल करती हैं, वे खुद उस पर काम कर रही हैं।
- गांवों में सोशल मीडिया की मौजूदगी बढ़ी है। इसका सकारात्मक असर पड़ रहा है और लोग जागरूक भी हो रहे हैं।