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अभिमन्यू ने स्टार्ट अप से पेश की मिसाल

Tue, 29 Sep 2020 11:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2020 11:21 PM IST
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abhimanyu inspire with start up
अभिमन्यु सिंह । संवाद - फोटो : HARDOI
हरदोई। अधिकतर युवाओं का मानना होगा कि बेहतर नौकरी या स्वरोजगार की राह बड़े शहरों में ही खुलती है। नीर गांव निवासी अभिमन्यु सिंह अमेरिका से पढ़ाई और दिल्ली में मल्टीनेशनल कंपनियों की नौकरी छोड़कर अपने गांव में सफल स्टार्टअप कर इस मिथक को तोड़ रहे हैं। अभिमन्यु का यह प्रयास पूरे जिले के युवाओं के लिए नजीर बना हुआ है।
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अभिमन्यु का बचपन दिल्ली में बीता। दिल्ली के श्रीराम स्कूल से हाईस्कूल और फिर जीडी गोयनका वर्ल्ड स्कूल से इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की। अमेरिका के फिनाडेलफिया शहर में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधूरी छोड़कर वापस दिल्ली लौटे। यहां उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी की। नौकरी से इतर वह कुछ अलग और नया करने की ठान चुके थे। पढ़ाई के दौरान वह कुछ नया शोध करते रहे। इसी दौरान उन्हें एक नई राह सूझी तो गांव लौट आए।
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गांव में उन्होंने करीब 15 एकड़ क्षेत्रफल में खस, पामारोजा, लेमन ग्रास, तुलसी, यूकेलिप्टस, पिपरमेंट की खेती शुरू की। इन उपज का तेल निकालने का भी एक छोटा सा प्लांट लगा लिया। खास बात यह रही कि अभिमन्यु का ध्यान उपज से निकलने वाले तेल पर कम बल्कि इनका अर्क बनाने पर ज्यादा था। अभिमन्यु का दावा है कि उनके खेतों में तैयार होने वाली फसल का तेल और अर्क फ्रांस सहित कई अन्य देशों में सप्लाई होता है। देश में हैदराबाद, चेन्नई, चंडीगढ़, नोएडा जैसे शहरों में भी डिमांड होती है। आर्यवीर हर्बल प्लेटफार्म प्राइवेट लिमिटेड के नाम से उनकी कंपनी चल रही है।
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ध्यान और अध्यात्म से भी है गहरा नाता
अभिमन्यु बताते हैं कि अमेरिका के फिनाडेलफिया कंप्यूटर इंजीनियरिंग करने गए थे। एक वर्ष पढ़ाई की। परिणाम भी अच्छे आए, लेकिन वहां से मन ऊब गया। दिल्ली लौटकर कुछ दिनों के लिए श्रीरामचंद्र मिशन के आश्रम में रहे। यहां ध्यान और अध्यात्म से खुद को जोड़ा, साथ ही आगे की पढ़ाई करते रहे।

कारोबार में भी अध्यात्म की झलक
अभिमन्यु का दावा है कि आज के दौर में हर कोई किसी न किसी बात को लेकर तनाव में रहता है। तुलसी का अर्क व्यक्ति को तनाव के मामले में काफी राहत देता है। इसके साथ अगर ध्यान भी किया जाए तो और अधिक राहत मिलती है। उन्होंने सबसे पहले तुलसी का अर्क बनाना ही शुरू किया था। उन्होंने कहा कि शोध से पता चला कि खस, पामारोजा, लेमनग्रास, तुलसी का तेल औषधियों व अन्य चीजों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इन तेलों को पीया नहीं जा सकता। औषधि की बजाय इनका लोग सामान्य तरीकों से प्रयोग कर लाभ ले सकें, इसके लिए अर्क पर शोध किया। अर्क पौधे, फूल, पत्तियों का पानी है। इसे पीया जा सकता है। इसलिए अर्क का उत्पादन शुरू किया।
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