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Kanpur News: खतरनाक जगहों पर इंसानों की जगह काम करेगा पहियों व चार पैरों से लैस रोबोट डॉग
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कानपुर। मुश्किल और खतरनाक जगहों की जांच के लिए अब इंसानों को जोखिम उठाकर जाने की जरूरत कम होगी। आईआईटी कानपुर से समर्थित डीप-टेक स्टार्टअप एक्स टेरा रोबोटिक्स ने स्वदेशी हाइब्रिड व्हील्ड क्वाड्रपड रोबोट डॉग धाव-एचव्हाई तैयार किया है। चार पैरों और पहियों से लैस यह रोबोट जरूरत के अनुसार अपना चलने का तरीका बदल सकता है। 22 किलोग्राम वजन वाला धाव-एचव्हाई 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने के साथ 10 किलोग्राम तक वजन उठा सकता है।
आईआईटी कानपुर से इनक्यूबेटेड एक्स टेरा रोबोटिक्स ने इसे स्वदेशी रोबोटिक्स तकनीक से विकसित किया है। इसकी डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग और निर्माण भारत में ही किया गया है। कंपनी ने इसे इंसानों को जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रखते हुए सूचना और निगरानी क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया है। इससे औद्योगिक और सुरक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी रोबोट तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ी हैं।
कंपनी के अनुसार पहले तैयार रोबो-डॉग में पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में चलने की सीमाएं थीं। धाव-एचव्हाई को अलग-अलग इलाकों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। समतल जमीन पर यह पहियों से तेजी से आगे बढ़ सकता है जबकि सीढ़ियों, ढलान और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चार पैरों की मदद से संतुलन बनाएगा। सेंसर आसपास की बाधाओं और रास्ते की स्थिति पहचानने में मदद करेंगे। नियंत्रण तंत्र इसके आधार पर तय कर सकता है कि कहां पहियों और कहां पैरों का इस्तेमाल करना है।
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सुरक्षा और औद्योगिक निरीक्षण में उपयोग
कंपनी के को-फाउंडर आदित्य रजावत के मुताबिक, पिछले तीन महीने से इस पर शोध एवं विकास चल रहा था और अब विभिन्न उद्योगों में निरीक्षण के लिए इसके पायलट प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। रोबोट फैक्टरी, संयंत्र, निर्माण स्थल और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों में कैमरे व सेंसर से जानकारी जुटा सकता है। दुर्गम क्षेत्रों में डेटा कलेक्शन, गूगल मैपिंग और निर्माण स्थलों की थ्रीडी मैपिंग में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 10 किलो तक सामान ले जा सकता है और 100 किलो तक वजन लेकर एक जगह स्थिर रह सकता है।
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आईआईटी कानपुर से इनक्यूबेटेड एक्स टेरा रोबोटिक्स ने इसे स्वदेशी रोबोटिक्स तकनीक से विकसित किया है। इसकी डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग और निर्माण भारत में ही किया गया है। कंपनी ने इसे इंसानों को जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रखते हुए सूचना और निगरानी क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया है। इससे औद्योगिक और सुरक्षा क्षेत्रों में स्वदेशी रोबोट तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ी हैं।
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कंपनी के अनुसार पहले तैयार रोबो-डॉग में पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में चलने की सीमाएं थीं। धाव-एचव्हाई को अलग-अलग इलाकों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। समतल जमीन पर यह पहियों से तेजी से आगे बढ़ सकता है जबकि सीढ़ियों, ढलान और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चार पैरों की मदद से संतुलन बनाएगा। सेंसर आसपास की बाधाओं और रास्ते की स्थिति पहचानने में मदद करेंगे। नियंत्रण तंत्र इसके आधार पर तय कर सकता है कि कहां पहियों और कहां पैरों का इस्तेमाल करना है।
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सुरक्षा और औद्योगिक निरीक्षण में उपयोग
कंपनी के को-फाउंडर आदित्य रजावत के मुताबिक, पिछले तीन महीने से इस पर शोध एवं विकास चल रहा था और अब विभिन्न उद्योगों में निरीक्षण के लिए इसके पायलट प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं। रोबोट फैक्टरी, संयंत्र, निर्माण स्थल और अन्य जोखिम वाले क्षेत्रों में कैमरे व सेंसर से जानकारी जुटा सकता है। दुर्गम क्षेत्रों में डेटा कलेक्शन, गूगल मैपिंग और निर्माण स्थलों की थ्रीडी मैपिंग में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 10 किलो तक सामान ले जा सकता है और 100 किलो तक वजन लेकर एक जगह स्थिर रह सकता है।