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Kanpur News: फर्जी संयुक्त सचिव ने होटल में बैठक बुला दिया था नियुक्ति का भरोसा
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कानपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग में नौकरी दिलाने के नाम पर 43 लोगों से करीब 80 लाख रुपये की ठगी के मामले में प्रयागराज के एक होटल में अभिभावकों के साथ बैठक की गई थी। खुद को आयोग का संयुक्त सचिव बताने वाले अरविंद नारायण शुक्ला ने बैठक में सभी को भरोसा दिलाया था कि रुपये देते ही नियुक्ति पत्र उनके हाथ में होंगे। पुलिस के मुताबिक, कई अन्य अभिभावकों से भी रुपये लेने की बात सामने आई है।
पीड़ित शरद अवस्थी ने पुलिस को बताया कि नीरज मिश्रा के ममिया ससुर अरविंद नारायण शुक्ला ने बैठक में राज्यपाल कोटे से एलडीसी और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती कराने का दावा किया। अभिभावकों का भरोसा जीतने के लिए उनसे हलफनामा, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की अंकतालिकाएं और छह पासपोर्ट तस्वीरें भी ली गई थीं।
आरोप है कि रुपये लेने के बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए। अभिभावकों को दिए गए पते पर भी संबंधित व्यक्ति नहीं मिले। पुलिस के मुताबिक, अरविंद शुक्ला के इटावा के सिविल लाइंस क्षेत्र में रहने की जानकारी मिली है। मामले की जांच के लिए एक टीम प्रयागराज और दूसरी इटावा भेजने की तैयारी है।
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पुलिस की प्रारंभिक जांच में इतने बड़े स्तर पर ठगी के मामले में विभागीय मिलीभगत की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पीड़ितों की सूची तैयार कर ठगी गई रकम का ब्योरा जुटाएगी। इसके बाद बयान दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे। एसीपी कोतवाली के मुताबिक, अन्य पीड़ित अभिभावकों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
आरोपियों ने हर पीड़ित को पांच लाख रुपये में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। बच्चों के भविष्य की उम्मीद में किसी अभिभावक ने एफडी तुड़वाई तो किसी ने कर्ज लेकर रकम जुटाई। परिवारों ने अपनी आर्थिक क्षमता से बढ़कर रुपये दिए, लेकिन नियुक्ति नहीं मिली। पुलिस अब ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
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पीड़ित शरद अवस्थी ने पुलिस को बताया कि नीरज मिश्रा के ममिया ससुर अरविंद नारायण शुक्ला ने बैठक में राज्यपाल कोटे से एलडीसी और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती कराने का दावा किया। अभिभावकों का भरोसा जीतने के लिए उनसे हलफनामा, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की अंकतालिकाएं और छह पासपोर्ट तस्वीरें भी ली गई थीं।
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आरोप है कि रुपये लेने के बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए। अभिभावकों को दिए गए पते पर भी संबंधित व्यक्ति नहीं मिले। पुलिस के मुताबिक, अरविंद शुक्ला के इटावा के सिविल लाइंस क्षेत्र में रहने की जानकारी मिली है। मामले की जांच के लिए एक टीम प्रयागराज और दूसरी इटावा भेजने की तैयारी है।
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पुलिस की प्रारंभिक जांच में इतने बड़े स्तर पर ठगी के मामले में विभागीय मिलीभगत की आशंका जताई गई है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पीड़ितों की सूची तैयार कर ठगी गई रकम का ब्योरा जुटाएगी। इसके बाद बयान दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे। एसीपी कोतवाली के मुताबिक, अन्य पीड़ित अभिभावकों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
आरोपियों ने हर पीड़ित को पांच लाख रुपये में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। बच्चों के भविष्य की उम्मीद में किसी अभिभावक ने एफडी तुड़वाई तो किसी ने कर्ज लेकर रकम जुटाई। परिवारों ने अपनी आर्थिक क्षमता से बढ़कर रुपये दिए, लेकिन नियुक्ति नहीं मिली। पुलिस अब ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।