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Kanpur News: गंगा में मिली 10 फीट लंबी मछली, वन विभाग बोला- डाल्फिन, प्रदूषण नियंत्रण विभाग का इन्कार

Sat, 03 Jan 2026 01:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jan 2026 01:57 AM IST
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A 10-foot-long fish was found in the Ganges; the Forest Department claimed it was a dolphin, but the Pollution Control Department denied it.
जाजमऊ स्थित गंगा पुल के नीचे मृत मिली डाल्फिन मछली। - फोटो : संवाद
कानपुर। जाजमऊ स्थित गंगा पुल के नीचे शुक्रवार देर शाम 10 फीट लंबी मछली मृत अवस्था में पड़ी मिली। जाजमऊ पुलिस ने उसे नाविकों की मदद से बाहर निकलवाया। जानकारी पर पहुंची वन विभाग टीम ने उसे कब्जे में ले लिया। वन विभाग के अफसर इसे डाल्फिन बता रहे हैं जबकि प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी ने इसे डाल्फिन मानने से इन्कार किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि गंगा में प्रदूषण के कारण इसकी मौत हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा।
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तीन जनवरी से प्रयागराज में शुरू हो रहे माघ स्नान को देखते हुए गंगा में किसी भी तरह का प्रदूषण न जा पाए, इसे लेकर मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है। ऐसे में अचानक से जाजमऊ के पास गंगा में मृत डाल्फिन का मिलना चाैंकाने वाली बात है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण विभाग की क्षेत्रीय इकाई के क्षेत्रीय अधिकारी की ओर से इसे डाल्फिन मानने से इन्कार कर दिया है। इसका वजन साढ़े तीन क्विंटल बताया जा रहा है।
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आसपास के लोगों ने बताया कि इसकी माैत की वजह प्रदूषण भी हो सकती है क्योंकि जाजमऊ में जिस स्थान पर यह गंगा में मृत मिली है, वहां पर अक्सर गंगा जल में प्रदूषण की मात्रा आम दिनों में अधिक रहती है। यह बात अलग है कि माघ मेले की वजह से 31 दिसंबर से ही टेनरियों को बंद करा दिया गया है। प्रदूषण की वजह से पानी के अंदर ऑक्सीजन की कमी होने के कारण जलीय जंतुओं को दिक्कत होती है। बिहार व उत्तर प्रदेश में गंगा में पाई जाने वाली डाल्फिन को सोंस के नाम से भी पुकारा जाता है। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि मछली वन विभाग के रेंजर राकेश पांडेय के सुपुर्द कर दी गई है। उन्होंने बताया कि शव करीब दो से तीन दिन पुराना लग रहा है।
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यह डाल्फिन नहीं किसी और प्रजाति की मछली समझ में आ रही है। इस समय गंगा में प्रदूषण की मात्रा न के बराबर है। ऐसे में प्रदूषण की वजह से किसी जलीय जंतु के मरने की बात कहना सही नहीं है। हो सकता है कि किसी और दिक्कत की वजह से इसकी माैत हुई हो। -अजीत सुमन, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण विभाग
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