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इमरजेंसी में तीमारदारों को बंद करके पीटा

Kanpur Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। हैलट इमरजेंसी में गुरुवार को जूनियर डाक्टरों ने फिर उपद्रव किया। मौत के बाद मरीज के हाथ में लगा वीगो जल्दी निकालने के लिए कहने पर डाक्टरों ने तीमारदारों ने गालियां दी और एतराज करने उन्हें इमरजेंसी में बंद करके पीटा। मारपीट में महिलाओं के कपड़े तक फट गए। जब तीमारदार बाहर भागे तो डाक्टरों ने लाठी-डंडे से उन्हें दौड़ाकर पीटा। इस दौरान दूसरे मरीजों के तीमारदार और राहगीर भी डाक्टरों का निशाना बन गए। बाद में वहां पहुंची स्वरूप नगर थाना पुलिस ने तीमारदारों की बचाया। मरीज के बेटे ने मेडिसन विभाग के जूनियर डाक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। एक महीने के भीतर जूनियर डाक्टरों द्वारा मारपीट की यह चौथी घटना है।
कारवालो नगर रायपुरवा निवासी श्याम प्रजापति (50) लीवर रोग से पीड़ित थे। गुरुवार दोपहर परिजन उन्हें लेकर हैलट पहुंचे और मेडिसन विभाग के प्रोफेसर डा. एसी गुप्ता के आधीन इमरजेंसी में भर्ती किया गया। करीब 2.30 पर श्याम की सांसें थम गईं। बेटे सतीश प्रजापति ने उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पिता के हाथ में लगा वीगो हटाने को कहा तो डाक्टर भड़क गए। डाक्टरों ने सतीश, उसकी मां शांति, चाचा सियाराम प्रजापति, मौसी कमला, मौसेरे भाई राजकुमार, मौसा छेदीलाल को इमरजेंसी में बंद करके पीटा। मारपीट में शांति और कमला के कपड़े भी फट गए। दोनों बहनें परिजनों को बचाने के लिए डाक्टरों के पैर पकड़कर गिड़गिड़ाती रहीं। किसी तरह सतीश और उसके परिवार वाले जान बचाने के लिए बाहर भागे तो डाक्टरों ने लाठी-डंडे से उन्हें दौड़ाकर अस्पताल के गेट तक पीटा। डाक्टरों ने इमरजेंसी से निकल रहे ग्वालटोली निवासी मुकेश यादव और आकाश को भी पीटा। उत्पात की सूचना पाकर स्वरूपनगर थाना प्रभारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। इस कारण करीब एक घंटे तक इमरजेंसी में काम ठप रहा। सतीश ने पुलिस पर डाक्टरों को बचाने का आरोप लगाया। बकौल सतीश, काफी दबाव के बाद डाक्टरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। उधर, थानाप्रभारी का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।


नहीं थम रहा है पिटाई का सिलसिला
18 मई को जूनियर डाक्टरों ने वार्ड-4 के बेड संख्या-6 में भर्ती श्रीनिवास के भाई अनुज, साले अरविन्द कुमार, बहनोई शिवकुमार और महिलाओं को पीटा था। बाद में हैलट चौकी प्रभारी ने उन्हें बंधन मुक्त कराया। 19 मई जूनियर इमरजेंसी में मरीज को और 20 मई को वार्डब्वाय को पीटा गया।

वर्जन
डाक्टरों और तीमारदारों में विवाद हुआ था। इससे चिकित्सा व्यवस्था कुछ देर के लिए प्रभावित हुई पर कोई कैजुअलटी नहीं हुई।
डा.एसबी मिश्रा, ईएमओ, हैलट

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