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पांच साल तक नहीं बेच सकेंगे केडीए के भूखंड
Kanpur
Updated Sat, 15 Nov 2014 05:30 AM IST
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कानपुर। केडीए के भूखंड निवेशकों की जद से दूर रहें, इसके लिए अब पांच साल तक इनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की कवायद शुरू हुई है। दिल्ली की तर्ज पर होने वाले इस इंतजाम के लिए केडीए अफसरों के बीच सहमति बन गई है। अगली बोर्ड बैठक में एक प्रस्ताव पास कराकर इसे लागू कर दिया जाएगा। यह कार्रवाई निवेशकों को भूखंड आवंटन से दूर रखने के मकसद से की गई है।
कानपुर विकास प्राधिकरण की स्थापना के मुख्य लक्ष्य में लोगों को उचित मूल्य पर आवास उपलब्ध कराना प्रमुख है। बीते दो वर्ष के भीतर यहां तमाम रिहाइशी स्कीमें पेश की गईं, जिसमें शताब्दी नगर, हाइवे सिटी, अलकनंदा एनक्लेव आदि प्रमुख हैं। इनमें हजारों की संख्या में लोगों को भूखंड आवंटित किए गए। इस वित्तीय वर्ष में भी रतनपुर, शताब्दी नगर आदि में एचआईजी, एमआईजी, एलआईजी और ईडब्ल्यूएस के करीब दस हजार भूखंड तैयार किए जाने हैं। इसी क्रम में कल्याणपुर-बिठूर मार्ग, मैनावती मार्ग आदि तीन स्थानों पर करीब डेढ़ हजार से ज्यादा फ्लैट भी तैयार हो रहे हैं। इनकी लाटरी का कार्यक्रम जल्द शुरू होगा। ये भूखंड सही पात्रों के पास पहुंचे, इसे देखते हुए अब यह तैयारी की जा रही है कि आवंटन के पांच वर्ष तक भूखंड की बिक्री किसी अन्य को नहीं की जा सकेगी। यह कवायद निवेशकों को दूर रखने के लिए की जा रही है। गौरतलब है कि निवेशक एक भूखंड को दो से तीन साल तक रोककर बेचते हैं, जिससे उन्हें खरीद मूल्य का लगभग दोगुना पैसा आसानी से मिल जाता है।
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नया अधिग्रहण कानून अहम वजह
कानपुर। केडीए के भूखंड खरीदने के लिए होड़ मची है। इसके पीछे सबसे अहम कारण नया भूमि अधिग्रहण कानून है, जिसके चलते अब भूमि अधिग्रहण काफी महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर भूखंडों के मूल्य पर पड़ेगा। हाल ही में डाली गई लाटरी में एक-एक भूखंड के लिए आठ से दस आवेदन आ रहे हैं। अनुमान है कि आगे यह संख्या और बढ़ेगी। पांच साल का नियम बनाने के पीछे यह संभावना भी अहम वजह है।
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एक भूखंड से ज्यादा नहीं
कानपुर। प्राधिकरण में यह व्यवस्था है कि परिवार में एक भूखंड पा चुके व्यक्ति को दूसरा भूखंड आवंटित नहीं किया जाएगा, बशर्ते दूसरी भूखंड नीलामी में न लिया जाए। इसके लिए आवंटन के वक्त एक हलफनामा भी लिया जाता है। मगर इसका सत्यापन कभी नहीं होता है और कभी किसी मामले में शिकायत होती भी है तो सब कुछ ऐसे ही निपट जाता है। नतीजा केडीए के कर्मचारियों से लेकर शहर के तमाम लोग कई-कई भूखंडों के स्वामी हैं। इस विसंगति को दूर करने के लिए केडीए नया इंतजाम कर रहा है। प्राधिकरण में मौजूद सारे दस्तावेज आनलाइन हो रहे हैं। इसके बाद किसी व्यक्ति के पास दो भूखंड होने की बात का सत्यापन सेकेंडों का काम होगा। उपाध्यक्ष ने बताया कि ऐसे सभी मामले चिह्नित करके कार्रवाई की जाएगी।
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आम आदमी का हमेशा यह सपना होता है कि उसके पास अपना एक मकान हो। केडीए इस सपने को पूरा करने का भरसक प्रयास भी कर रहा है। भूखंड जरूरतमंद को मिलें, इसे देखते हुए यह तैयारी की जा रही है कि आवंटन के पांच साल के भीतर उसकी बिक्री संभव न हो। वहीं एक परिवार में एक से अधिक भूखंड दिए जाने का भी सत्यापन किया जाएगा।
- जयश्री भोज, उपाध्यक्ष (केडीए)
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कानपुर विकास प्राधिकरण की स्थापना के मुख्य लक्ष्य में लोगों को उचित मूल्य पर आवास उपलब्ध कराना प्रमुख है। बीते दो वर्ष के भीतर यहां तमाम रिहाइशी स्कीमें पेश की गईं, जिसमें शताब्दी नगर, हाइवे सिटी, अलकनंदा एनक्लेव आदि प्रमुख हैं। इनमें हजारों की संख्या में लोगों को भूखंड आवंटित किए गए। इस वित्तीय वर्ष में भी रतनपुर, शताब्दी नगर आदि में एचआईजी, एमआईजी, एलआईजी और ईडब्ल्यूएस के करीब दस हजार भूखंड तैयार किए जाने हैं। इसी क्रम में कल्याणपुर-बिठूर मार्ग, मैनावती मार्ग आदि तीन स्थानों पर करीब डेढ़ हजार से ज्यादा फ्लैट भी तैयार हो रहे हैं। इनकी लाटरी का कार्यक्रम जल्द शुरू होगा। ये भूखंड सही पात्रों के पास पहुंचे, इसे देखते हुए अब यह तैयारी की जा रही है कि आवंटन के पांच वर्ष तक भूखंड की बिक्री किसी अन्य को नहीं की जा सकेगी। यह कवायद निवेशकों को दूर रखने के लिए की जा रही है। गौरतलब है कि निवेशक एक भूखंड को दो से तीन साल तक रोककर बेचते हैं, जिससे उन्हें खरीद मूल्य का लगभग दोगुना पैसा आसानी से मिल जाता है।
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नया अधिग्रहण कानून अहम वजह
कानपुर। केडीए के भूखंड खरीदने के लिए होड़ मची है। इसके पीछे सबसे अहम कारण नया भूमि अधिग्रहण कानून है, जिसके चलते अब भूमि अधिग्रहण काफी महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर भूखंडों के मूल्य पर पड़ेगा। हाल ही में डाली गई लाटरी में एक-एक भूखंड के लिए आठ से दस आवेदन आ रहे हैं। अनुमान है कि आगे यह संख्या और बढ़ेगी। पांच साल का नियम बनाने के पीछे यह संभावना भी अहम वजह है।
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एक भूखंड से ज्यादा नहीं
कानपुर। प्राधिकरण में यह व्यवस्था है कि परिवार में एक भूखंड पा चुके व्यक्ति को दूसरा भूखंड आवंटित नहीं किया जाएगा, बशर्ते दूसरी भूखंड नीलामी में न लिया जाए। इसके लिए आवंटन के वक्त एक हलफनामा भी लिया जाता है। मगर इसका सत्यापन कभी नहीं होता है और कभी किसी मामले में शिकायत होती भी है तो सब कुछ ऐसे ही निपट जाता है। नतीजा केडीए के कर्मचारियों से लेकर शहर के तमाम लोग कई-कई भूखंडों के स्वामी हैं। इस विसंगति को दूर करने के लिए केडीए नया इंतजाम कर रहा है। प्राधिकरण में मौजूद सारे दस्तावेज आनलाइन हो रहे हैं। इसके बाद किसी व्यक्ति के पास दो भूखंड होने की बात का सत्यापन सेकेंडों का काम होगा। उपाध्यक्ष ने बताया कि ऐसे सभी मामले चिह्नित करके कार्रवाई की जाएगी।
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आम आदमी का हमेशा यह सपना होता है कि उसके पास अपना एक मकान हो। केडीए इस सपने को पूरा करने का भरसक प्रयास भी कर रहा है। भूखंड जरूरतमंद को मिलें, इसे देखते हुए यह तैयारी की जा रही है कि आवंटन के पांच साल के भीतर उसकी बिक्री संभव न हो। वहीं एक परिवार में एक से अधिक भूखंड दिए जाने का भी सत्यापन किया जाएगा।
- जयश्री भोज, उपाध्यक्ष (केडीए)