फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   क्या यहां कानून का राज है ?

क्या यहां कानून का राज है ?

Sat, 06 Sep 2014 05:31 AM IST
Kanpur
Kanpur Updated Sat, 06 Sep 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
कानपुर साउथ। स्कूल संचालक को पीटने और मुर्गा बनाने के मामले में मध्ययुगीन तर्ज पर खुद दोषी ठहराने और खुद सजा देने की बुधवार को घटित घटना का कोई भी पक्ष गुरुवार को पुलिस के पास नहीं पहुंचा। लिहाजा न तो किसी के खिलाफ कोई एफआईआर लिखी गई न ही कोई कार्रवाई हुई। स्कूल संचालक कहां है, पुलिस को यह जानने की कोई फिक्र नहीं, फिर पीटने वालों से कुछ पूछने का तो सवाल ही नहीं उठता। पुलिस को इंतजार है कि कोई आए और तहरीर दे तो वह कार्रवाई के लिए निकले। सीओ ओमप्रकाश सिंह कहते हैं कि स्कूल संचालक और ठगे गए लोग तहरीर देंगे तो दोनों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
विज्ञापन

इस वाकये के निहितार्थ से पहले घटनाक्रम को समझना जरूरी है। नौबस्ता थाने के आवास विकास हंसपुरम् स्थित राजेंद्रपुरम् में मई 14 में रावतपुर गांव के एक व्यक्ति ने जेडीएमडी विद्या मंदिर जूनियर हाईस्कूल खोला। स्कूल में 10 से ज्यादा टीचरों और स्टाफ की नियुक्ति की गई। मई में स्कूल का खूब प्रचार कराया और 50 बच्चों के एडमिशन भी हो गए। जोर-शोर से पढ़ाई भी शुरू हो गई लेकिन जुलाई में एक दिन टीचर और बच्चे स्कूल पहुंचे तो ताला बंद था। टीचरों ने संचालक को फोन मिलाया तो स्विच ऑफ मिला। काफी पता किया लेकिन संचालक का कुछ पता नहीं चला। अलबत्ता चर्चा फैलने लगी कि एडमिशन के नाम पर संचालक ने लोगों से तीन-तीन हजार रुपये वसूले। इस बीच मकान मालिक रामजी त्रिपाठी ने बताया कि उन्हें किराए के भुगतान के लिए जो चेक दिए गए वह भी बाउंस हो गए। खुद को ठगा महसूस कर रहे लोग इस मामले में पुलिस के पास नहीं गए। घटनाक्रम का संकेत तो यही है कि उन्हें स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं था। ठगे गए लोगों ने बुधवार सुबह संचालक को खोज निकाला। पकड़ने के बावजूद उसे थाने नहीं ले गए। रावतपुर गांव से उसे एक गाड़ी में बैठाकर जबरन नौबस्ता स्थित स्कूल लाया गया और पैसे मांगे गए। जब उसने टाल-मटोल शुरू की तो अभिभावक, टीचर्स से लेकर मकान मालिक तक ने उसे सार्वजनिक रूप से पीटना शुरू कर दिया। संचालक बचने के लिए भाग रहा था। लोग उसे थप्पड़ों, लात-घूसों से मार रहे थे। एक महिला ने उसे चप्पलों से पीट डाला। बड़ी संख्या में तमाशबीन यह नजारा देख रहे थे। लग ही नहीं रहा था कि यह सब किसी लोकतांत्रिक देश में हो रहा है। यकीकन वह मध्ययुगीन नजारा था, बिल्कुल ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ की तर्ज पर। पीटने से मन नहीं भरा तो प्रबंधक को मुर्गा बना दिया। करीब 15-20 मिनट तक यह घटनाक्रम चलता रहा। किसी ने पुलिस को सूचित करने की जहमत नहीं उठाई।
विज्ञापन

अब निहितार्थ की बात करते हैं, क्या इस घटनाक्रम से ऐसा नहीं लगता कि उस इलाके में वर्दी का कोई इकबाल ही नहीं है। एसओ नौबस्ता राजेश पाठक इस घटनाक्रम पर सवाल करने पर कहते हैं कि स्कूल संचालक ने फ्रॉड किया था तो महीनों चुप्पी साधने के बजाए लोगों ने पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की ? यही तो लाख टके का सवाल है, जवाब शायद यही होगा कि लोगों में पुलिस पर भरोसा नहीं है। वरना ठगे गए लोग पुलिस के पास जाते, स्कूल संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट लिखाते। यह नहीं हुआ तो यह भी नहीं हुआ कि सार्वजनिक रूप से पिटने और बेइज्जत होने के बाद भी स्कूल संचालक न्याय के लिए पुलिस के पास पहुंचा। और तो और अगर इलाके में वाकई पुलिस का इकबाल बुलंद होता तो स्कूल संचालक किसी को ठगने की सोच पाता क्या और पब्लिक कानून को हाथ में लेने को मजबूर होती क्या ?
विज्ञापन
विज्ञापन

एसपी वेस्ट हरिश्चंद्र का कहना है कि स्कूल संचालक के खिलाफ पीड़ित लोगों को पुलिस से शिकायत करनी चाहिए थी। उन्हें खुद कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए था। ं कानून हाथ में लेेने का किसी को हक नहीं है। दोनों अधिकारी कह तो सही रहे हैं, मगर उन्होंने अब तक ऐसा कुछ नहीं किया जो आम आदमी को यह महसूस करा सके कि यहां कानून का राज है। कानून से बढ़कर कोई नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed