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वोट के लिए वादा, फिर भूल गए ‘सरकार’
Kanpur
Updated Mon, 09 Jun 2014 05:32 AM IST
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कानपुर साउथ। सोसाइटी क्षेत्र में लाखों वोटर हैं। नेताओं को इनकी याद चुनाव के वक्त ही आती है। विगत माह हुए लोकसभा चुनाव में विधायक , प्रत्याशी की कौन कहे सीएम अखिलेश सिंह यादव भी इस वोट के मोहपाश से खुद को बाहर नहीं निकाल पाए। अपनी चुनावी सभा में यह करा दूंगा..., वह करा दूंगा... का वादा मतदाताओं से कर गए थे। पर काफी समय गुजरने के बाद भी क्षेत्र का कुछ विकास नहीं किया। सड़क से लेकर विधानसभा भवन तक में सोसाइटी क्षेत्र का मुद्दा उठता तो जरूर है लेकिन कभी भी इसके पूरी तरह से समाधान की पहल ही नहीं हो पाती है। खुद महराजपुर के विधायक सतीश महाना कहते हैं कि, ‘सोसाइटी क्षेत्र की समस्या कैंसर का रूप ले चुकी है। प्रदेश सरकार चाहे तो इस समस्या को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।’
काश्तकारों से जमीन खरीद भूमाफियाओं ने हाउसिंग सोसाइटी बनाकर खुद की जमीन के साथ ही हजारों एकड़ सरकारी जमीन भी बेच डाली। नियमानुसार जमीन का पूरा ले आउट प्लान केडीए से पास कराना चाहिए था लेकिन न तो सोसाइटी वालों ने ऐसा किया और न ही केडीए के अफसरों ने ही कोई कार्रवाई की। एक जेब से निकलकर रुपये दूसरी जेब में पहुंचे और जमीन बिकती चली गई। जमीन खरीदी तो लोगों ने मकान बनाकर रहना भी शुरू कर दिया। बिजली विभाग के अफसरों व कर्मचारियों को खुश कर आधा किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी केबिल खींचकर बिजली तो जला ली लेकिन सड़क और पानी से दूर ही रहे। मकान बनते गए और घर के सामने गंदा पानी इकट्ठा होने लगा तो लोगों ने अफसरों को घेराना शुरू किया। तब बताया गया कि न तो नगर निगम और न ही केडीए यहां कुछ करा सकता है। लोगों ने सांसद-विधायक से फरियाद लगाई तो उन्होंने अपने निधि का समय-समय पर उपयोग कर विकास के कुछ काम कराए। हालांकि यह आरोप लगते रहे कि सांसद-विधायक ने उन्हीं क्षेत्रों में विकास कराए जहां उनके ज्यादा समर्थक रहते हैं।
18 अप्रैल को सीएम ने किया था वादा
मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान सोसाइटी क्षेत्र के लोगों को 18 अप्रैल को सीएम अखिलेश सिंह यादव ने ही विकास का झुनझुना थमाया था। सीएम ने कहा था कि भले ही उन्हें अपनी निधि से ही रुपये क्यों न देने पड़ें, वह सोसाइटी क्षेत्रों का पूरा विकास कराएंगे ताकि इन क्षेत्रों में रहने वालों को लगे कि वह भी शहर में हैं। नौबस्ता के रेसकोर्स मैदान पर अकबरपुर के लोकसभा प्रत्याशी लाल सिंह तोमर के समर्थन में सभा करने पहुंचे सीएम से श्री तोमर ने कहा था कि आचार संहिता के कारण वह (सीएम) कोई घोषणा तो नहीं कर सकते लेकिन सोसाइटी क्षेत्र के विकास का वादा तो कर ही सकते हैं।
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रेसकोर्स मैदान के बगल में बसे कृष्णानगर कॉलोनी के निवासियों ने सड़क, सीवर आदि की मांग को लेकर चुनाव में नोटा का इस्तेमाल करने की घोषणा की थी। उन्होंने तत्कालीन सांसद राजाराम पाल के समर्थन में सभा करने पहुंचे राहुल गांधी के मंच के सामने बैनर लगाकर प्रदर्शन भी किया था।
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आज एमडी से मिलेंगे योगेंद्र विहार के लोग
एसीएम फर्स्ट के आश्वासन पर बिजली कनेक्शन व विकास के वादे पर चार दिन तक चले आमरण अनशन को खत्म करने वाले दीप सिंह परमार को अफसरों की ‘राजनीति’ समझ में आ गई है। दीप सिंह ने बताया कि उन्होंने रविवार को विधायक सतीश महाना से मुलाकात की और समस्या व आमरण अनशन की जानकारी दी। विधायक को एसीएम फर्स्ट के वादों के बारे में भी बताया। उन्होंने एसीएफ फर्स्ट से भी बात की। महाना ने सोमवार को केस्को एमडी से मुलाकात करने को बुलाया है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग ने वादा किया है तो काम भी उन्हीं को कराना पड़ेगा।
अपने मन से थोड़े ही करा दूंगा मुकदमा
एसीएम फर्स्ट सतीश चंद से रविवार शाम बात हुई। उनको बताया गया कि सोमवार को बिजली कनेक्शन के लिए कैंप लगाने के वादे का आखिरी दिन है, यदि कैंप न लगा तो क्या मुकदमा कराएंगे? श्री चंद ने कहा कि कल की कल देखी जाएगी। अपने मन से थोड़े ही मुकदमा करा दूंगा। अपने उच्चाधिकारियों से बात करूंगा। कहा कि शनिवार को एडीएम ने नगर आयुक्त, प्रबंधक निदेशक केस्को और महाप्रबंधक जल संस्थान को योगेंद्र विहार की समस्याओं के समाधान के लिए पत्र लिखा है। पत्र की कॉपी डीएम को भी भेजी गई है। विधायक सतीश महाना ने भी बात की है। हमारी जिम्मेदारी लॉ एंड आर्डर की है। उच्चाधिकारियों के निर्देश और एक्सईएन के प्रतिनिधि के रूप में जेई के लिखने पर ही तीन दिन में कैंप लगाने का वादा किया था। अनशन को तुड़वाना था। पूरे मामले की जानकारी एडीएम को दे दी है।
बता दें कि बिजली, पानी और सड़क की मांग को लेकर दो जून को योगेंद्र विहार के दीप सिंह परमार आमरण अनशन पर बैठे थे। छह जून को एसीएम फर्स्ट सतीश चंद ने तीन दिन में बिजली कनेक्शन के लिए कैंप लगाने और धीरे-धीरे विकास कराने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद दीप सिंह ने अनशन खत्म कर दिया था। सात जून से तीन दिन की समय सीमा शुरू हुई थी। यह नौ जून को पूरी होगी।
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शहरी बनने आए थे, देहाती भी न रहे
- सोसाइटी क्षेत्रों की स्थिति गांवों से भी बदतर
कानपुर साउथ। घाटमपुर की रहने वाली मंजू ने तकरीबन 13 साल पहले जब नौबस्ता के नारायणपुरी में जमीन खरीदने की सोची तो उन्हें सपने में भी ख्याल नहीं आया था कि वह जिस शहर में बसने जा रही हैं वह नरक से भी बदतर होगा। बच्चों को पढ़ाने और शहरी बनने आईं मंजू देहाती भी नहीं रह सकी हैं। यह समस्या सिर्फ मंजू की ही नहीं है, सोसाइटी क्षेत्रों में रहने वाले हर नागरिक की यही समस्या है। ‘अमर उजाला’ रिपोर्टर ने सोसाइटी क्षेत्र नारायणपुरी के कुछ लोगों से उनकी समस्याओं पर बात की।
हम कब बनेंगे शहरी
नारायणपुरी निवासी आदित्य नारायण शुक्ला ने कहा कि शहर के बीच में हम कब तक समस्याओं से जूझते रहेंगे। कोई इसका उत्तर देने वाला नहीं है।
अब तो उम्मीद ही टूटती जा रही है
सुनीता गुप्ता ने कहा कि साल-दर-साल समस्याओं के बीच रहते-रहते विकास की उम्मीद ही टूटती जा रही है। सरकार कुछ करे।
वादा सब करते, काम कुछ नहीं होता
संध्या गुप्ता ने कहा कि चुनाव के समय वोट लेने के लिए हर बार सड़क की नाप कराई जाती है लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई नहीं आता।
खुद के रुपये से डलवाई मिट्टी
मंजू देवी ने कहा कि खुद के रुपयों से घर के सामने मिट्टी डलवाई है। लेकिन बरसात में घुटने से ज्यादा पानी से होकर निकलना पड़ता है।
समस्याओं का अंत नहीं
सीमा गुप्ता ने कहा कि सोसाइटी क्षेत्रों में समस्याओं का कोई अंत नहीं है। न जाने कब दुश्वारियों से मुक्ति मिलेगी। ईश्वर हमारी मदद करें।
बिजली के लिए भी वसूली
सुषमा सिंह ने कहा कि बिजली के लिए भी विभाग के लोग वसूली करते हैं। विभाग बिजली ही नहीं देना चाह रहा है।
हमें भी विकास चाहिए
‘अमर उजाला’ के हेल्पलाइन नंबर पर रविवार को यशोदा नगर के राजेश गुप्ता, मनोज कुमार, शिवशंकर, प्रिया, निशा त्रिपाठी ने फोन कर सोसाइटी की कॉलोनियों की दुर्दशा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 40 साल से रहने के बाद भी अब तक विकास की कोई किरण नहीं पहुंची है। विधायक-सांसद और अफसरों से सड़क, पानी मांगते-मांगते थक चुके हैं।
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काश्तकारों से जमीन खरीद भूमाफियाओं ने हाउसिंग सोसाइटी बनाकर खुद की जमीन के साथ ही हजारों एकड़ सरकारी जमीन भी बेच डाली। नियमानुसार जमीन का पूरा ले आउट प्लान केडीए से पास कराना चाहिए था लेकिन न तो सोसाइटी वालों ने ऐसा किया और न ही केडीए के अफसरों ने ही कोई कार्रवाई की। एक जेब से निकलकर रुपये दूसरी जेब में पहुंचे और जमीन बिकती चली गई। जमीन खरीदी तो लोगों ने मकान बनाकर रहना भी शुरू कर दिया। बिजली विभाग के अफसरों व कर्मचारियों को खुश कर आधा किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी केबिल खींचकर बिजली तो जला ली लेकिन सड़क और पानी से दूर ही रहे। मकान बनते गए और घर के सामने गंदा पानी इकट्ठा होने लगा तो लोगों ने अफसरों को घेराना शुरू किया। तब बताया गया कि न तो नगर निगम और न ही केडीए यहां कुछ करा सकता है। लोगों ने सांसद-विधायक से फरियाद लगाई तो उन्होंने अपने निधि का समय-समय पर उपयोग कर विकास के कुछ काम कराए। हालांकि यह आरोप लगते रहे कि सांसद-विधायक ने उन्हीं क्षेत्रों में विकास कराए जहां उनके ज्यादा समर्थक रहते हैं।
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18 अप्रैल को सीएम ने किया था वादा
मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान सोसाइटी क्षेत्र के लोगों को 18 अप्रैल को सीएम अखिलेश सिंह यादव ने ही विकास का झुनझुना थमाया था। सीएम ने कहा था कि भले ही उन्हें अपनी निधि से ही रुपये क्यों न देने पड़ें, वह सोसाइटी क्षेत्रों का पूरा विकास कराएंगे ताकि इन क्षेत्रों में रहने वालों को लगे कि वह भी शहर में हैं। नौबस्ता के रेसकोर्स मैदान पर अकबरपुर के लोकसभा प्रत्याशी लाल सिंह तोमर के समर्थन में सभा करने पहुंचे सीएम से श्री तोमर ने कहा था कि आचार संहिता के कारण वह (सीएम) कोई घोषणा तो नहीं कर सकते लेकिन सोसाइटी क्षेत्र के विकास का वादा तो कर ही सकते हैं।
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रेसकोर्स मैदान के बगल में बसे कृष्णानगर कॉलोनी के निवासियों ने सड़क, सीवर आदि की मांग को लेकर चुनाव में नोटा का इस्तेमाल करने की घोषणा की थी। उन्होंने तत्कालीन सांसद राजाराम पाल के समर्थन में सभा करने पहुंचे राहुल गांधी के मंच के सामने बैनर लगाकर प्रदर्शन भी किया था।
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आज एमडी से मिलेंगे योगेंद्र विहार के लोग
एसीएम फर्स्ट के आश्वासन पर बिजली कनेक्शन व विकास के वादे पर चार दिन तक चले आमरण अनशन को खत्म करने वाले दीप सिंह परमार को अफसरों की ‘राजनीति’ समझ में आ गई है। दीप सिंह ने बताया कि उन्होंने रविवार को विधायक सतीश महाना से मुलाकात की और समस्या व आमरण अनशन की जानकारी दी। विधायक को एसीएम फर्स्ट के वादों के बारे में भी बताया। उन्होंने एसीएफ फर्स्ट से भी बात की। महाना ने सोमवार को केस्को एमडी से मुलाकात करने को बुलाया है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग ने वादा किया है तो काम भी उन्हीं को कराना पड़ेगा।
अपने मन से थोड़े ही करा दूंगा मुकदमा
एसीएम फर्स्ट सतीश चंद से रविवार शाम बात हुई। उनको बताया गया कि सोमवार को बिजली कनेक्शन के लिए कैंप लगाने के वादे का आखिरी दिन है, यदि कैंप न लगा तो क्या मुकदमा कराएंगे? श्री चंद ने कहा कि कल की कल देखी जाएगी। अपने मन से थोड़े ही मुकदमा करा दूंगा। अपने उच्चाधिकारियों से बात करूंगा। कहा कि शनिवार को एडीएम ने नगर आयुक्त, प्रबंधक निदेशक केस्को और महाप्रबंधक जल संस्थान को योगेंद्र विहार की समस्याओं के समाधान के लिए पत्र लिखा है। पत्र की कॉपी डीएम को भी भेजी गई है। विधायक सतीश महाना ने भी बात की है। हमारी जिम्मेदारी लॉ एंड आर्डर की है। उच्चाधिकारियों के निर्देश और एक्सईएन के प्रतिनिधि के रूप में जेई के लिखने पर ही तीन दिन में कैंप लगाने का वादा किया था। अनशन को तुड़वाना था। पूरे मामले की जानकारी एडीएम को दे दी है।
बता दें कि बिजली, पानी और सड़क की मांग को लेकर दो जून को योगेंद्र विहार के दीप सिंह परमार आमरण अनशन पर बैठे थे। छह जून को एसीएम फर्स्ट सतीश चंद ने तीन दिन में बिजली कनेक्शन के लिए कैंप लगाने और धीरे-धीरे विकास कराने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद दीप सिंह ने अनशन खत्म कर दिया था। सात जून से तीन दिन की समय सीमा शुरू हुई थी। यह नौ जून को पूरी होगी।
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शहरी बनने आए थे, देहाती भी न रहे
- सोसाइटी क्षेत्रों की स्थिति गांवों से भी बदतर
कानपुर साउथ। घाटमपुर की रहने वाली मंजू ने तकरीबन 13 साल पहले जब नौबस्ता के नारायणपुरी में जमीन खरीदने की सोची तो उन्हें सपने में भी ख्याल नहीं आया था कि वह जिस शहर में बसने जा रही हैं वह नरक से भी बदतर होगा। बच्चों को पढ़ाने और शहरी बनने आईं मंजू देहाती भी नहीं रह सकी हैं। यह समस्या सिर्फ मंजू की ही नहीं है, सोसाइटी क्षेत्रों में रहने वाले हर नागरिक की यही समस्या है। ‘अमर उजाला’ रिपोर्टर ने सोसाइटी क्षेत्र नारायणपुरी के कुछ लोगों से उनकी समस्याओं पर बात की।
हम कब बनेंगे शहरी
नारायणपुरी निवासी आदित्य नारायण शुक्ला ने कहा कि शहर के बीच में हम कब तक समस्याओं से जूझते रहेंगे। कोई इसका उत्तर देने वाला नहीं है।
अब तो उम्मीद ही टूटती जा रही है
सुनीता गुप्ता ने कहा कि साल-दर-साल समस्याओं के बीच रहते-रहते विकास की उम्मीद ही टूटती जा रही है। सरकार कुछ करे।
वादा सब करते, काम कुछ नहीं होता
संध्या गुप्ता ने कहा कि चुनाव के समय वोट लेने के लिए हर बार सड़क की नाप कराई जाती है लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद कोई नहीं आता।
खुद के रुपये से डलवाई मिट्टी
मंजू देवी ने कहा कि खुद के रुपयों से घर के सामने मिट्टी डलवाई है। लेकिन बरसात में घुटने से ज्यादा पानी से होकर निकलना पड़ता है।
समस्याओं का अंत नहीं
सीमा गुप्ता ने कहा कि सोसाइटी क्षेत्रों में समस्याओं का कोई अंत नहीं है। न जाने कब दुश्वारियों से मुक्ति मिलेगी। ईश्वर हमारी मदद करें।
बिजली के लिए भी वसूली
सुषमा सिंह ने कहा कि बिजली के लिए भी विभाग के लोग वसूली करते हैं। विभाग बिजली ही नहीं देना चाह रहा है।
हमें भी विकास चाहिए
‘अमर उजाला’ के हेल्पलाइन नंबर पर रविवार को यशोदा नगर के राजेश गुप्ता, मनोज कुमार, शिवशंकर, प्रिया, निशा त्रिपाठी ने फोन कर सोसाइटी की कॉलोनियों की दुर्दशा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 40 साल से रहने के बाद भी अब तक विकास की कोई किरण नहीं पहुंची है। विधायक-सांसद और अफसरों से सड़क, पानी मांगते-मांगते थक चुके हैं।