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‘पद्मश्री’ मान ने बढ़ाई आईआईटी की शान
Kanpur
Updated Sat, 26 Jan 2013 05:30 AM IST
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कानपुर। आईआईटी कानपुर के पूर्व निदेशक प्रो. संजय गोविंद धांडे और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. मणींद्र अग्रवाल को पद्मश्री सम्मान मिला है। यह पहला मौका है, जब आईआईटी से जुड़े दो टीचर्स को पद्मश्री जैसा बड़ा सम्मान मिला है। इसे लेकर आईआईटी जश्न का माहौल है। निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने सम्मान पाने वाले टीचर्स को बधाई दी है।
पूर्व निदेशक संजय गोविंद धांडे ने आईआईटी कानपुर को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अमेरिका से आने के बाद उन्होंने जनवरी 1979 में आईआईटी कानपुर ज्वाइन किया। पठन-पाठन के साथ रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करते रहे। 2001 में आईआईटी कानपुर के निदेशक बने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई समझौते किए। इंडो-जर्मन रिसर्च प्रोजेक्ट, इंडो-अमेरिका रिसर्च प्रोजेक्ट और इंडो-ब्रिटेन रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत नैनो टेक्नोलॉजी पर अच्छा काम हुआ। वह 11 साल तक आईआईटी कानपुर के निदेशक रहे। सितंबर 2012 में निदेशक का कार्यकाल खत्म हुआ और वीआरएस लेकर पुणे चले गए। उनका कहना है कि आईआईटी जैसी शिक्षा, रिसर्च की जरूरत पूरे देश के तकनीकी संस्थान, यूनिवर्सिटी को है। इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। पद्मश्री सम्मान मिलना गौरव की बात है।
वहीं डीन आफ फैकल्टी और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने भी रिसर्च के क्षेत्र में नाम कमाया है। मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले प्रो. मणींद्र ने अविभाज्य संख्याओं का ऐसा जाल बनाया है, जो कंप्यूटर सिक्योरिटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसे लेकर उन्हें इंटरनेशनल पुरस्कार भी मिल चुका है। पद्मश्री मिलने को लेकर प्रो. मणींद्र ने खुशी जताई। कहा कि सपना पूरा हो गया है। अब क्वालिटी बेस्ड रिसर्च, एजूकेशन का काम आगे बढ़ाया जाएगा। पर्यावरण प्रदूषण, एनर्जी और पानी के क्षेत्र में अच्छे रिसर्च की जरूरत है।
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पर्सनल प्रोफाइल
नाम- प्रो. एसजी धांडे (पूर्व निदेशक आईआईटी कानपुर)
जन्म तिथि- 14 फरवरी 1948
शिक्षा- हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बीटेक की पढ़ाई पुणे से, पीएचडी आईआईटी कानपुर से की
उपलब्धि- पांच साल तक अमेरिका में रिसर्च की, यूनिवर्सिटी आफ फ्लोरिडा में तीन साल तक असिस्टेंट प्रोफेसर रहे। माइक्रो सेटेलाइट ‘जुगनू’ पर उन्हीं के दिशा-निर्देशन में काम हुआ। रेलवे के लिए ‘सिमरन’ प्रोजेक्ट बनाया।
नाम- प्रो. मणींद्र अग्रवाल (डीन आफ फैकल्टी आईआईटी कानपुर)
जन्म तिथि- 20 मई 1966
शिक्षा- राजकीय इंटर कालेज इलाहाबाद से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की पढ़ाई। आईआईटी कानपुर से बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1991 में आईआईटी कानपुर से पीएचडी किया।
रिसर्च प्रोजेक्ट, रिसर्च पेपर का प्रकाश (नेशनल, इंटरनेशनल जर्नल में)- 50
उपलब्धि- मैथमेटिकल माडल की अविभाज्य संख्याओं पर काम के लिए वर्ष 2006 में अतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। अविभाज्य संख्या का इस्तेमाल कंप्यूटर सिक्योरिटी के लिए किया जाता है।
पहले भी मिला सम्मान- शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, गोडल प्राइज, इन्फोसिस अवार्ड, सीनियर होमबोल्ट अवार्ड, फुल्करसरन प्राइज।
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पूर्व निदेशक संजय गोविंद धांडे ने आईआईटी कानपुर को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अमेरिका से आने के बाद उन्होंने जनवरी 1979 में आईआईटी कानपुर ज्वाइन किया। पठन-पाठन के साथ रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करते रहे। 2001 में आईआईटी कानपुर के निदेशक बने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई समझौते किए। इंडो-जर्मन रिसर्च प्रोजेक्ट, इंडो-अमेरिका रिसर्च प्रोजेक्ट और इंडो-ब्रिटेन रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत नैनो टेक्नोलॉजी पर अच्छा काम हुआ। वह 11 साल तक आईआईटी कानपुर के निदेशक रहे। सितंबर 2012 में निदेशक का कार्यकाल खत्म हुआ और वीआरएस लेकर पुणे चले गए। उनका कहना है कि आईआईटी जैसी शिक्षा, रिसर्च की जरूरत पूरे देश के तकनीकी संस्थान, यूनिवर्सिटी को है। इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। पद्मश्री सम्मान मिलना गौरव की बात है।
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वहीं डीन आफ फैकल्टी और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने भी रिसर्च के क्षेत्र में नाम कमाया है। मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले प्रो. मणींद्र ने अविभाज्य संख्याओं का ऐसा जाल बनाया है, जो कंप्यूटर सिक्योरिटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसे लेकर उन्हें इंटरनेशनल पुरस्कार भी मिल चुका है। पद्मश्री मिलने को लेकर प्रो. मणींद्र ने खुशी जताई। कहा कि सपना पूरा हो गया है। अब क्वालिटी बेस्ड रिसर्च, एजूकेशन का काम आगे बढ़ाया जाएगा। पर्यावरण प्रदूषण, एनर्जी और पानी के क्षेत्र में अच्छे रिसर्च की जरूरत है।
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पर्सनल प्रोफाइल
नाम- प्रो. एसजी धांडे (पूर्व निदेशक आईआईटी कानपुर)
जन्म तिथि- 14 फरवरी 1948
शिक्षा- हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बीटेक की पढ़ाई पुणे से, पीएचडी आईआईटी कानपुर से की
उपलब्धि- पांच साल तक अमेरिका में रिसर्च की, यूनिवर्सिटी आफ फ्लोरिडा में तीन साल तक असिस्टेंट प्रोफेसर रहे। माइक्रो सेटेलाइट ‘जुगनू’ पर उन्हीं के दिशा-निर्देशन में काम हुआ। रेलवे के लिए ‘सिमरन’ प्रोजेक्ट बनाया।
नाम- प्रो. मणींद्र अग्रवाल (डीन आफ फैकल्टी आईआईटी कानपुर)
जन्म तिथि- 20 मई 1966
शिक्षा- राजकीय इंटर कालेज इलाहाबाद से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की पढ़ाई। आईआईटी कानपुर से बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 1991 में आईआईटी कानपुर से पीएचडी किया।
रिसर्च प्रोजेक्ट, रिसर्च पेपर का प्रकाश (नेशनल, इंटरनेशनल जर्नल में)- 50
उपलब्धि- मैथमेटिकल माडल की अविभाज्य संख्याओं पर काम के लिए वर्ष 2006 में अतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। अविभाज्य संख्या का इस्तेमाल कंप्यूटर सिक्योरिटी के लिए किया जाता है।
पहले भी मिला सम्मान- शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, गोडल प्राइज, इन्फोसिस अवार्ड, सीनियर होमबोल्ट अवार्ड, फुल्करसरन प्राइज।