{"_id":"38-116725","slug":"Kanpur-116725-38","type":"story","status":"publish","title_hn":"हवा में घुलकर कैंसर बांट रहा आर्सेनिक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हवा में घुलकर कैंसर बांट रहा आर्सेनिक
Kanpur
Updated Thu, 24 Jan 2013 05:31 AM IST
विज्ञापन
संतोष सिंह
कानपुर। पानी में घुलकर बीमारियां बांटने वाले आर्सेनिक के पार्टिकल अब और खतरनाक हो गए हैं। उद्योगाें से निकलने वाले इस जहरीले रसायन के पार्टिकल सीधे हवा में घुलकर ब्लड कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की वजह बन रहे हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा आईआईटी, कानपुर के एक रिसर्च प्रोजेक्ट में हुआ है। आईआईटी ने इस प्रोजेक्ट के जरिये हवा में घुले घातक पार्टिकल्स की पहचान करके पहली बार ‘एयर क्वालिटी के स्टैंडर्ड’ तय किए हैं। साथ ही केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चेता दिया है कि एक हद से ज्यादा एयर पॉल्यूशन हुआ तो कैंसर, फेफड़ों में इन्फेक्शन, ब्लड शुगर सहित कई गंभीर बीमारियां हमला बोल सकती हैं। आईआईटी कानपुर की यह रिपोर्ट केंद्र सरकार और बोर्ड ने स्वीकार करके दिसंबर, 2012 से नए स्टैंडर्ड लागू कर दिए हैं। साथ ही एयर क्वालिटी को प्रभावित करने वाले पार्टिकल को पहचानकर रोकथाम की कवायद शुरू कर दी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आईआईटी, कानपुर को हवा की गुणवत्ता के नए मानक तैयार करने का प्रोजेक्ट 2009 में दिया था, जिसकी रिपोर्ट आईआईटी ने बोर्ड को सौंप दी। विज्ञानियों ने देशव्यापी सर्वे करके घातक पार्टिकल्स की पहचान की। अमेरिका, जापान, चीन, ब्रिटेन सहित कई देशों के रिसर्च पेपर का भी अध्ययन किया। रिसर्च करने वाली टीम के एक सदस्य ने बताया कि हवा में फाइन पार्टिकल्स (अति सूक्ष्म कण) की मात्रा बढ़ रही है, जो खतरनाक है। इसकी मात्रा 61 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंची तो फेफड़ों के मरीज बढ़ सकते हैं। अति सूक्ष्म होने के कारण ये पार्टिकल फेफड़ों में काफी गहराई तक जाकर जम जाते हैं, जिस कारण तेजी से इन्फेक्शन फैलता है। हवा में बेंजीन के कण भी मिले हैं। यह खतरनाक रसायन होता है। हवा में इसकी मात्रा पांच माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा होने पर ब्लड कैंसर की आशंका बढ़ सकती है। विज्ञानियोें ने बताया कि पानी की तरह हवा में भी आर्सेनिक के कण मिले हैं जो सीधे फेफड़ों पर हमला बोलते हैं। इससे किडनी, फेफड़ों और हड्डियों का कैंसर हो सकता है। छह नैनो ग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा का आर्सेनिक हवा को जहरीला बना सकता है। इसके अलावा निकिल और पॉली एरोमेटिक हाइड्रो कार्बन भी हवा में पाया गया है। इसका मानक 20 और एक नैनो ग्राम प्रति घन मीटर है। इससे ज्यादा मात्रा होने पर यह पार्टिकल्स भी कई गंभीर बीमारियां दे सकते हैं।
----नये मानक----------
फाइन पार्टिकल 60 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर
बेंजीन 5 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर
आर्सेनिक 6 नैनो ग्राम प्रति घन मीटर
निकिल 20 नैनो ग्राम प्रति घन मीटर
पॉली एरोमेटिक हाइड्रो कार्बन 01 नैनो ग्राम प्रति घन मीटर
खतरे के करीब हैं ये शहर
कानपुर, आगरा, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, बरेली, इलाहाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव, नई दिल्ली, पुणे, अहमदाबाद, पटना, चंडीगढ़, भोपाल, रांची, हैदराबाद।
विज्ञापन
विज्ञापन
कानपुर। पानी में घुलकर बीमारियां बांटने वाले आर्सेनिक के पार्टिकल अब और खतरनाक हो गए हैं। उद्योगाें से निकलने वाले इस जहरीले रसायन के पार्टिकल सीधे हवा में घुलकर ब्लड कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की वजह बन रहे हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा आईआईटी, कानपुर के एक रिसर्च प्रोजेक्ट में हुआ है। आईआईटी ने इस प्रोजेक्ट के जरिये हवा में घुले घातक पार्टिकल्स की पहचान करके पहली बार ‘एयर क्वालिटी के स्टैंडर्ड’ तय किए हैं। साथ ही केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चेता दिया है कि एक हद से ज्यादा एयर पॉल्यूशन हुआ तो कैंसर, फेफड़ों में इन्फेक्शन, ब्लड शुगर सहित कई गंभीर बीमारियां हमला बोल सकती हैं। आईआईटी कानपुर की यह रिपोर्ट केंद्र सरकार और बोर्ड ने स्वीकार करके दिसंबर, 2012 से नए स्टैंडर्ड लागू कर दिए हैं। साथ ही एयर क्वालिटी को प्रभावित करने वाले पार्टिकल को पहचानकर रोकथाम की कवायद शुरू कर दी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आईआईटी, कानपुर को हवा की गुणवत्ता के नए मानक तैयार करने का प्रोजेक्ट 2009 में दिया था, जिसकी रिपोर्ट आईआईटी ने बोर्ड को सौंप दी। विज्ञानियों ने देशव्यापी सर्वे करके घातक पार्टिकल्स की पहचान की। अमेरिका, जापान, चीन, ब्रिटेन सहित कई देशों के रिसर्च पेपर का भी अध्ययन किया। रिसर्च करने वाली टीम के एक सदस्य ने बताया कि हवा में फाइन पार्टिकल्स (अति सूक्ष्म कण) की मात्रा बढ़ रही है, जो खतरनाक है। इसकी मात्रा 61 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंची तो फेफड़ों के मरीज बढ़ सकते हैं। अति सूक्ष्म होने के कारण ये पार्टिकल फेफड़ों में काफी गहराई तक जाकर जम जाते हैं, जिस कारण तेजी से इन्फेक्शन फैलता है। हवा में बेंजीन के कण भी मिले हैं। यह खतरनाक रसायन होता है। हवा में इसकी मात्रा पांच माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा होने पर ब्लड कैंसर की आशंका बढ़ सकती है। विज्ञानियोें ने बताया कि पानी की तरह हवा में भी आर्सेनिक के कण मिले हैं जो सीधे फेफड़ों पर हमला बोलते हैं। इससे किडनी, फेफड़ों और हड्डियों का कैंसर हो सकता है। छह नैनो ग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा का आर्सेनिक हवा को जहरीला बना सकता है। इसके अलावा निकिल और पॉली एरोमेटिक हाइड्रो कार्बन भी हवा में पाया गया है। इसका मानक 20 और एक नैनो ग्राम प्रति घन मीटर है। इससे ज्यादा मात्रा होने पर यह पार्टिकल्स भी कई गंभीर बीमारियां दे सकते हैं।
विज्ञापन
----नये मानक----------
फाइन पार्टिकल 60 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर
बेंजीन 5 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर
आर्सेनिक 6 नैनो ग्राम प्रति घन मीटर
निकिल 20 नैनो ग्राम प्रति घन मीटर
पॉली एरोमेटिक हाइड्रो कार्बन 01 नैनो ग्राम प्रति घन मीटर
खतरे के करीब हैं ये शहर
कानपुर, आगरा, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, बरेली, इलाहाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव, नई दिल्ली, पुणे, अहमदाबाद, पटना, चंडीगढ़, भोपाल, रांची, हैदराबाद।
विज्ञापन