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कपड़ा उद्योग को मिलेगी संजीवनी
Updated Sat, 17 Feb 2018 11:36 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कालपी (जालौन)। बजट में सरकार ने उम्दा कपड़ों के लिए देश भर में धूम मचाने वाले कालपी के पावरलूम उद्योग की भी सुध ली है। बांदा, कालपी सहित प्रदेश के सात जिलों के लिए यूपी हैंडलूम पावरलूम उद्योग के लिए पचास करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे उद्योग को संजीवनी मिलना तय है। लिहाजा पावरलूम उद्यमियों में भी आशा की किरण जगी है। उद्यमियों का कहना है कि पुराने पावरलूम के आधुनिकीकरण के साथ साथ काम करने वाले लोगों को अच्छा वेतन भी मिल सकेगा। उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी की संभावना है।
बेहतर क्वालिटी के कारण कालपी में तैयार टेरीकाट ने बहुत कम समय में ही प्रदेश भर में अपनी पहचान बना ली थी। यहां का कपड़ा अमेठी, सुल्तानपुर, गोंडा, बलरामपुर, रायबरेली, इटावा, भिलाई व अन्य बाजारों में बिकने जाता था। एक समय ऐसा भी था जब घर घर से हैंडलूम व पावरलूम चलने की आवाजें आती थी। फिर धीरे धीरे सुविधाएं घटी और रेडीमेड बाजार ने पकड़ बनाई तो देखते ही देखते पावरलूम उद्योग भी बदहाल होता गया।
उद्यमी लालजी गुप्ता का कहना है कि सरकारी प्रोत्साहन के अभाव व पूंजी की कमी से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। महंगाई बहुत है। पंद्रह रुपये किलो मिलने वाला धागा 300 रुपये किलो मिल रहा है। बिजली भी ठीक से नहीं मिल रही है। बजट से राहत मिलने की आस लगी है।
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पावरलूम उद्यमी संदीप शर्मा कहते हैं कि पचास करोड़ के बजट में सात करोड़ तो कालपी को मिलना तय है। बजट में मिली धनराशि से सरकार प्रोसेसिंग प्लांट लगवा दे और रियायती दरों पर सूत उपलब्ध कराए तो कालपी पावरलूम उद्योग के दिन संवर सकते हैं फिर कारोबारी और कर्मचारी दोनों खुश हो जाएंगे।
-बजट में जारी धनराशि से उद्यमियों ने ली चैन की सांस
कालपी (जालौन)। बजट में सरकार ने उम्दा कपड़ों के लिए देश भर में धूम मचाने वाले कालपी के पावरलूम उद्योग की भी सुध ली है। बांदा, कालपी सहित प्रदेश के सात जिलों के लिए यूपी हैंडलूम पावरलूम उद्योग के लिए पचास करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे उद्योग को संजीवनी मिलना तय है। लिहाजा पावरलूम उद्यमियों में भी आशा की किरण जगी है। उद्यमियों का कहना है कि पुराने पावरलूम के आधुनिकीकरण के साथ साथ काम करने वाले लोगों को अच्छा वेतन भी मिल सकेगा। उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी की संभावना है।
बेहतर क्वालिटी के कारण कालपी में तैयार टेरीकाट ने बहुत कम समय में ही प्रदेश भर में अपनी पहचान बना ली थी। यहां का कपड़ा अमेठी, सुल्तानपुर, गोंडा, बलरामपुर, रायबरेली, इटावा, भिलाई व अन्य बाजारों में बिकने जाता था। एक समय ऐसा भी था जब घर घर से हैंडलूम व पावरलूम चलने की आवाजें आती थी। फिर धीरे धीरे सुविधाएं घटी और रेडीमेड बाजार ने पकड़ बनाई तो देखते ही देखते पावरलूम उद्योग भी बदहाल होता गया।
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उद्यमी लालजी गुप्ता का कहना है कि सरकारी प्रोत्साहन के अभाव व पूंजी की कमी से उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। महंगाई बहुत है। पंद्रह रुपये किलो मिलने वाला धागा 300 रुपये किलो मिल रहा है। बिजली भी ठीक से नहीं मिल रही है। बजट से राहत मिलने की आस लगी है।
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पावरलूम उद्यमी संदीप शर्मा कहते हैं कि पचास करोड़ के बजट में सात करोड़ तो कालपी को मिलना तय है। बजट में मिली धनराशि से सरकार प्रोसेसिंग प्लांट लगवा दे और रियायती दरों पर सूत उपलब्ध कराए तो कालपी पावरलूम उद्योग के दिन संवर सकते हैं फिर कारोबारी और कर्मचारी दोनों खुश हो जाएंगे।
-बजट में जारी धनराशि से उद्यमियों ने ली चैन की सांस