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Kanpur News: ग्रामीण इलाकों की 65 फीसदी किशोरियों व 53 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी
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कानपुर। ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाएं और किशोरियां खून की कमी से जूझ रहीं है। चौबेपुर और शिवराजपुर ब्लॉक की 53 फीसदी गर्भवती महिलाएं और 65 फीसदी किशोरियां एनिमिक हैं। यह खुलासा छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्युमिनिटीज एंड सोशल साइंसेज में संचालित मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (एमपीएच) के प्रोजेक्ट अम्मा के सर्वे की रिपोर्ट में हुआ है। सर्वे में एंजेल्स इंडिया की टीम ने भी सहयोग किया। टीम ने 152 गर्भवती महिलाओं और 15 से 19 साल की 1595 किशोरियों पर यह सर्वे किया है। सर्वे के दौरान शिवराजपुर और चौबेपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में 58 फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित भी किया गया।
स्कूल के डीन प्रो. संदीप कुमार सिंह ने बताया कि दोनों ब्लॉकों में गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के हीमोग्लोबिन की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट जारी होने के बाद तय हुआ कि अन्य इलाकों में भी जांच और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रो. सिंह ने कहा कि एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं व किशोरियों को आयरन फोलिक एसिड दवा के साथ पोषक आहार लेने की सलाह दी गई।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने कहा कि 65 फीसदी किशोरियों में मिली खून की कमी चिंता का विषय है। यह कुपोषण का बड़ा कारण है। डॉ. मीरा ने कहा कि गर्भावस्था के तीसरे माह से नियमित रूप से आयरन की गोली लेना, हरी सब्जियां व पोषक आहार का सेवन, पेट के कीड़ों की दवा लेना और सफाई से रहना जरूरी है।
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प्रो. संदीप ने बताया कि विवि में संचालित मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ के सत्र 2025-26 में सिर्फ 20 फीसदी सीट खाली हैं। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दाखिला चल रहा है। कोर्स की फीस 16,200 रुपये प्रति वर्ष है।
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स्कूल के डीन प्रो. संदीप कुमार सिंह ने बताया कि दोनों ब्लॉकों में गर्भवती महिलाओं और किशोरियों के हीमोग्लोबिन की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट जारी होने के बाद तय हुआ कि अन्य इलाकों में भी जांच और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रो. सिंह ने कहा कि एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं व किशोरियों को आयरन फोलिक एसिड दवा के साथ पोषक आहार लेने की सलाह दी गई।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने कहा कि 65 फीसदी किशोरियों में मिली खून की कमी चिंता का विषय है। यह कुपोषण का बड़ा कारण है। डॉ. मीरा ने कहा कि गर्भावस्था के तीसरे माह से नियमित रूप से आयरन की गोली लेना, हरी सब्जियां व पोषक आहार का सेवन, पेट के कीड़ों की दवा लेना और सफाई से रहना जरूरी है।
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प्रो. संदीप ने बताया कि विवि में संचालित मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ के सत्र 2025-26 में सिर्फ 20 फीसदी सीट खाली हैं। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दाखिला चल रहा है। कोर्स की फीस 16,200 रुपये प्रति वर्ष है।