विस्थापितों का दर्द हुआ दूर: रसूलाबाद पहुंचे 63 हिंदू परिवार, मनरेगा के तहत मिलेगा रोजगार, बना सकेंगे अपना आशियाना
कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के भैसायां गांव में विस्थापित 63 हिंदू परिवार पहुंचे। मेरठ के हस्तिनापुर से परिवार के सभी यहां रहने के लिए आ गए हैं, जिन्हें कांशीराम कॉलोनी के कम्युनिटी हाल में रुकवाया गया। परिवार के सदस्यों को मनरेगा के तहत रोजगार मिलेगा।
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बांग्लादेश से विस्थापित 63 हिंदू परिवारों को लेकर तीन बसें सोमवार दोपहर मेरठ के हस्तिानपुर से रसूलाबाद पहुंच गईं। सभी को कांशीराम कॉलोनी के कम्युनिटी हॉल में रुकवाया गया है। अब परिवारों के सदस्यों को मनरेगा के तहत रोजगार दिया जाएगा। मेरठ में रहने वाले 63 विस्थापित हिंदू परिवारों को रसूलाबाद के भैंसाया गांव में बसाया जाना है। इसके लिए प्रशासन की ओर से मेरठ के मदनसूत मिल हस्तिनापुर से 135 लोगों को रविवार देर रात रसूलाबाद लाया गया है। सभी को इटावा-लखनऊ मार्ग स्थित कांशीराम कॉलोनी के कम्युनिटी हाल में रुकवाया गया है।
इस दौरान प्रशासन की ओर से विस्थापित परिवारों के लोगों के लिए गद्दे और चादर की व्यवस्था नहीं की गई थी। हालांकि परिवार के लोग खुद ही बिस्तर और गृहस्थी का सामान लेकर आए हैं। कुछ लोगों ने बताया कि बस में प्रशासन की ओर से पानी और खाने की व्यवस्था नहीं की गई थी। इस वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि सफर सुविधाजनक रहा। एसडीएम डॉ. जितेंद्र कटियार ने बताया कि 135 लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार दिलवाया जाएगा।
खाते में आएगी आवास बनाने की रकम
एसडीएम डॉ. जितेंद्र कटियार ने बताया कि 63 परिवारों का आवास बनाने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 1.20 लाख रुपये दिया जाएगा। इससे वह अपनी छत बनवाएंगे। इसके लिए परिवारों के मुखिया का खाता खुलवाया जाएगा।
ईओ दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि 135 लोगों को लंच पैकेट उपलब्ध करा दिए गए हैं। यह व्यवस्था आने वाले तीन दिन तक दी जाएगी। इस दौरान उनका राशन कार्ड बनेगा और सूखा राशन उपलब्ध हो जाएगा।
कांशीराम कॉलोनी के कम्युनिटी हाल में 135 लोगों को रुकवाया गया है। वहां पर पंखा, खाने की व्यवस्था कर दी गई है। जल्द ही आगे की प्रक्रिया शुरू करेंगे। -राजकुमार चौधरी, तहसीलदार
सरकार की अच्छी पहल की वजह से हम लोग दोबारा बस गए हैं। अब हमारे पास भी अपना आवास और रोजगार होगा। -अनिल कुमार
सरकार ने हम गरीबों की सुनी और हमें छत दी है। इससे हमें खुशी है। अब हम भी स्थाई तौर पर बस जाएंगे। -निरूपा मंडल
बस से आने में कुछ बहुत असुविधा हुई थी, लेकिन प्रशासन के लोग लगातार लगे हुए थे। बस अब रोजगार का इंतजार है। -दीपिका सरकार
भारत आने के बाद भी हम लोग बहुत भटके हैं, लेकिन अब सरकार की पहल के बाद हमारा भी अपना आशियाना होगा। -माया समाद्दार