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श्रीकृष्ण-सुदामा की लीला का किया मंचन
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इटावा। लखना के समीपवर्ती गांव असदपुरा में आयोजित आध्यात्मिक मेले में वृंदावन की बालकृष्ण रासलीला लोगों को आकर्षित कर रही है। बुधवार को रासलीला मंडल के कलाकारों ने श्रीकृष्ण और सुदामा लीला का मंचन किया।
लीला के अंतिम सोपान में जब सुदामा जी द्वारिका पहुंचते हैं और द्वारिकाधीश के महल में प्रवेश करते हैं तो द्वारपाल उन्हें रोक देते हैं। इस पर वे दया के भाव के साथ श्रीकृष्ण को अपना मित्र बताते हैं। ज्यादा अनुरोध पर द्वारपाल सुदामा जी के आने की सूचना श्रीकृष्ण जी को देते हैं। भक्त वत्सल्य भगवान कृष्ण सुदामा जी के आने की सूचना पर नंगे पांव भाग कर आते हैं और उन्हें महल में ले जाकर अपने सिंहासन पर बैठाते हैं। मित्र की दशा देखकर कृष्ण जी पानी के स्थान पर अपने आंसुओं से ही पैर धुलते हैं। करुणा भक्ति और मैत्री की लीला का मंचन देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। ब्यूरो
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लीला के अंतिम सोपान में जब सुदामा जी द्वारिका पहुंचते हैं और द्वारिकाधीश के महल में प्रवेश करते हैं तो द्वारपाल उन्हें रोक देते हैं। इस पर वे दया के भाव के साथ श्रीकृष्ण को अपना मित्र बताते हैं। ज्यादा अनुरोध पर द्वारपाल सुदामा जी के आने की सूचना श्रीकृष्ण जी को देते हैं। भक्त वत्सल्य भगवान कृष्ण सुदामा जी के आने की सूचना पर नंगे पांव भाग कर आते हैं और उन्हें महल में ले जाकर अपने सिंहासन पर बैठाते हैं। मित्र की दशा देखकर कृष्ण जी पानी के स्थान पर अपने आंसुओं से ही पैर धुलते हैं। करुणा भक्ति और मैत्री की लीला का मंचन देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। ब्यूरो
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