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मिट्टी का टीला ढहने से चार युवतियां दबीं, एक गंभीर
Updated Sun, 07 Oct 2018 01:28 AM IST
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घाटमपुर (कानपुर)। दक्षिणी नोन नदी के किनारे बसे रैपुरा गांव में मिट्टी का टीला धंस जाने से उसमें एक महिला और तीन किशोरियां दब गईं। गांववालों ने जल्दी से सभी को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। जहां से महिला को गंभीर हालत में कानपुर रेफर किया गया है। जबकि, तीनों किशोरियों का इलाज सीएचसी में चल रहा है। घटना, शुक्रवार शाम की है।
रैपुरा गांव निवासी रामकुमार संखवार की पत्नी शतरूपा (38) अपने पड़ोस की ही अलका (13) पुत्री रामप्रसाद संखवार, लक्ष्मी (16) पुत्री भोला संखवार और अर्चना देवी (15) पुत्री रणधीर संखवार के साथ घर की लिपाई-पुताई करने के लिए पड़ुआ मिट्टी खोदने गांव से तकरीबन 700 मीटर दूर एक टीले पर गई थीं।
चारों मिलकर मिट्टी की खोदाई करने लगीं, तभी अचानक टीला भरभराकर ढह गया और मिट्टी खोदाई कर रही चारों युवतियां उसके नीचे दब गईं। हादसा शाम करीब पांच बजे के आसपास हुआ। संयोग से जिस समय हादसा हुआ उस वक्त पास में ही कुछ लोग खेतों पर काम कर रहे थे। वह भागकर टीले के पास पहुंचे और मिट्टी हटाने लगे। इस दौरान बड़ी संख्या में गांव के लोग भी पहुंच गए और जल्दी-जल्दी मिट्टी हटाकर उसके नीचे दबी महिला और किशोरियों को बाहर निकाला। आनन-फानन एंबुलेंस बुलाई गई और चारों को सीएचसी घाटमपुर पहुंचाया गया।
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डाक्टरों ने महिला शतरूपा की हालत गंभीर देख हैलट अस्पताल (कानपुर) रेफर कर दिया। जबकि अलका, लक्ष्मी और अर्चना को सीएचसी में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। डाक्टरों ने तीनों किशोरियों की हालत सामान्य बताई।
पीली और पड़ुआ मिट्टी के लालच में होते हादसे
बरिश के बाद क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और दीपावली के त्योहार पर घरों की लिपाई-पुताई करने के लिए गांवों में अभी भी पीली और पड़ुआ मिट्टी का मोह लोग नहीं छोड़ पा रहे हैं। गांव के किसी स्थान पर जैसे ही पीली अथवा पड़ुआ मिट्टी निकलने की जानकारी होती है। वहां गांव के लोग खोदाई करना शुरू कर देते हैं। धीरे-धीरे वहां सुरंग जैसी बन जाती है। वहीं, सुरंग और टीले धंसने से हादसे होते हैं।
बीते 29 सितंबर को भी यमुना पट्टी के गांव कोटरा (मकरंदपुर) में भी पीली मिट्टी की खोदाई के दौरान टीला धंस जाने से एक महिला की दबकर मौत हो गई थी। जबकि, तीन लोग जख्मी हुए थे।
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रैपुरा गांव निवासी रामकुमार संखवार की पत्नी शतरूपा (38) अपने पड़ोस की ही अलका (13) पुत्री रामप्रसाद संखवार, लक्ष्मी (16) पुत्री भोला संखवार और अर्चना देवी (15) पुत्री रणधीर संखवार के साथ घर की लिपाई-पुताई करने के लिए पड़ुआ मिट्टी खोदने गांव से तकरीबन 700 मीटर दूर एक टीले पर गई थीं।
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चारों मिलकर मिट्टी की खोदाई करने लगीं, तभी अचानक टीला भरभराकर ढह गया और मिट्टी खोदाई कर रही चारों युवतियां उसके नीचे दब गईं। हादसा शाम करीब पांच बजे के आसपास हुआ। संयोग से जिस समय हादसा हुआ उस वक्त पास में ही कुछ लोग खेतों पर काम कर रहे थे। वह भागकर टीले के पास पहुंचे और मिट्टी हटाने लगे। इस दौरान बड़ी संख्या में गांव के लोग भी पहुंच गए और जल्दी-जल्दी मिट्टी हटाकर उसके नीचे दबी महिला और किशोरियों को बाहर निकाला। आनन-फानन एंबुलेंस बुलाई गई और चारों को सीएचसी घाटमपुर पहुंचाया गया।
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डाक्टरों ने महिला शतरूपा की हालत गंभीर देख हैलट अस्पताल (कानपुर) रेफर कर दिया। जबकि अलका, लक्ष्मी और अर्चना को सीएचसी में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। डाक्टरों ने तीनों किशोरियों की हालत सामान्य बताई।
पीली और पड़ुआ मिट्टी के लालच में होते हादसे
बरिश के बाद क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और दीपावली के त्योहार पर घरों की लिपाई-पुताई करने के लिए गांवों में अभी भी पीली और पड़ुआ मिट्टी का मोह लोग नहीं छोड़ पा रहे हैं। गांव के किसी स्थान पर जैसे ही पीली अथवा पड़ुआ मिट्टी निकलने की जानकारी होती है। वहां गांव के लोग खोदाई करना शुरू कर देते हैं। धीरे-धीरे वहां सुरंग जैसी बन जाती है। वहीं, सुरंग और टीले धंसने से हादसे होते हैं।
बीते 29 सितंबर को भी यमुना पट्टी के गांव कोटरा (मकरंदपुर) में भी पीली मिट्टी की खोदाई के दौरान टीला धंस जाने से एक महिला की दबकर मौत हो गई थी। जबकि, तीन लोग जख्मी हुए थे।