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दूसरी किस्त के इंतजार में शौचालय अधूरे
Updated Wed, 14 Mar 2018 11:16 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है, अभी तक जिले में 15 फीसदी शौचालय का निर्माण हुआ है। 85 फीसदी लाभार्थियों के घरों में शौचालय नहीं बन सके। वहीं विभागीय अधिकारियों का मानना है कि शासन से डिमांड के सापेक्ष मात्र 10 फीसदी धनराशि मिली है। उस धनराशि को लाभार्थियों के खातों में भेज कर शौचालय का निर्माण कराने का दावा कर रहे हैं। वहीं, पांच हजार शौचालय अधूरे पड़े हैं।
स्वच्छ भारत मिशन अभियान में जिले को अक्तूबर 2018 में खुले से शौच मुक्त करना है। इसका एक साल पूरा हो चुका है। लाभार्थियों को शौचालय बनवाने लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। पहली किस्त छह हजार रुपये में लाभार्थी को गड्ढा के ऊपर तक का निर्माण कराना होता है। जिले में करीब पांच हजार शौचालय अधूरे पड़े हैं। पहली किस्त में लाभार्थियों ने गड्ढा खोद कर टैंक बना लिया है। सीट और शौचालय का आवास बनाने के लिए लाभार्थी दूसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं।
हथगाम ब्लाक संवत के मजरा रखेलपर के ग्रामीण शिवकुमार ने बताया कि खाता में रुपये न आने से शौचालय का निर्माण अधूरा पड़ा है। ग्रामीण धर्मपाल ने बताया कि चार महीने हो गए। शौचालय की दूसरी किस्त नहीं मिली है। पंचायत सचिव और ब्लाक के चक्कर लगा रहे हैं।
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जिला पंचायत राज अधिकारी अजय आनंद सरोज ने बताया कि जिले के 1344 राजस्व गांवों में करीब दो लाख 50 हजार परिवार चयनित किए गए थे, जिनको शौचालय बनवाने की धनराशि दी जानी थी। इसके लिए शासन को तीन अरब की डिमांड भेजी गई थी। 515 गांव ओडीएफ हो चुके हैं, 132 गांव प्रस्तावित हैं। शासन से अभी तक 38 करोड़ रुपये मिले हैं। ये धन 28 करोड़ लाभार्थियों को दिया जा चुका है। 10 करोड़ रुपये अभी आए हैं। इसमें से चयनित ओडीएफ गांव व अधूरे शौचालयों का निर्माण पूरा कराया जाएगा।
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फतेहपुर। वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है, अभी तक जिले में 15 फीसदी शौचालय का निर्माण हुआ है। 85 फीसदी लाभार्थियों के घरों में शौचालय नहीं बन सके। वहीं विभागीय अधिकारियों का मानना है कि शासन से डिमांड के सापेक्ष मात्र 10 फीसदी धनराशि मिली है। उस धनराशि को लाभार्थियों के खातों में भेज कर शौचालय का निर्माण कराने का दावा कर रहे हैं। वहीं, पांच हजार शौचालय अधूरे पड़े हैं।
स्वच्छ भारत मिशन अभियान में जिले को अक्तूबर 2018 में खुले से शौच मुक्त करना है। इसका एक साल पूरा हो चुका है। लाभार्थियों को शौचालय बनवाने लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। पहली किस्त छह हजार रुपये में लाभार्थी को गड्ढा के ऊपर तक का निर्माण कराना होता है। जिले में करीब पांच हजार शौचालय अधूरे पड़े हैं। पहली किस्त में लाभार्थियों ने गड्ढा खोद कर टैंक बना लिया है। सीट और शौचालय का आवास बनाने के लिए लाभार्थी दूसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं।
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हथगाम ब्लाक संवत के मजरा रखेलपर के ग्रामीण शिवकुमार ने बताया कि खाता में रुपये न आने से शौचालय का निर्माण अधूरा पड़ा है। ग्रामीण धर्मपाल ने बताया कि चार महीने हो गए। शौचालय की दूसरी किस्त नहीं मिली है। पंचायत सचिव और ब्लाक के चक्कर लगा रहे हैं।
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जिला पंचायत राज अधिकारी अजय आनंद सरोज ने बताया कि जिले के 1344 राजस्व गांवों में करीब दो लाख 50 हजार परिवार चयनित किए गए थे, जिनको शौचालय बनवाने की धनराशि दी जानी थी। इसके लिए शासन को तीन अरब की डिमांड भेजी गई थी। 515 गांव ओडीएफ हो चुके हैं, 132 गांव प्रस्तावित हैं। शासन से अभी तक 38 करोड़ रुपये मिले हैं। ये धन 28 करोड़ लाभार्थियों को दिया जा चुका है। 10 करोड़ रुपये अभी आए हैं। इसमें से चयनित ओडीएफ गांव व अधूरे शौचालयों का निर्माण पूरा कराया जाएगा।