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ऑक्सीजन थेरेपी यूनिट से गंभीर मरीजों को होगा फायदा
Updated Thu, 08 Jun 2017 11:43 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के एनेस्थीसिया विभाग के अंर्तगत संचालित हाइपरबेरिक आक्सीजन थेरेपी यूनिट ने काम करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. (ब्रिगेडियर) टी. प्रभाकर ने बताया कि हाइपरबेरिक आक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता गंभीर मरीजों की हालत में सुधार के लिए किया जाता है। जब मरीज को दवाएं असर नहीं करतीं तो इस थेरेपी का उपयोग किया जाता है। इससे मरीज को आराम मिलता है। इस थेरेपी में डायबिटीज के मरीजों के अंगों में आक्सीजन की आपूर्ति के लिए अनुकूल परिस्थिति बनाई जाती है। इसके अतिरिक्त स्ट्रोक, मस्तिष्क पक्षाघात, सिर की चोट और क्रोनिक थकान जैसी स्थिति में भी हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (एचबीओटी) तकनीक कारगर है।
एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मनोज यादव तथा डॉ. भारत भूषण ने बताया कि हाइपरबेरिक आक्सीजन थेरेपी का उपयोग सामान्य चिकित्सा के अतिरिक्त सघन चिकित्सा में किया जाता है। इसके लिए चिकित्सक के लिए व्यापक प्रशिक्षण जरूरी है। डॉ. भारत भूषण ने बताया कि इस थेरेपी के शुरू हो जाने से ट्रामा एवं मस्तिष्काघात के अतिरिक्त मधुमेह से पीड़ित मरीजों के इलाज में काफी सहूलियत होगी। एनेस्थीसिया विभाग ने थेरेपी यूनिट के संचालन के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप लगाया। इसमें एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मनोज यादव, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. पूजा सिंह, डॉ. उर्वशी यादव, डॉ. भारत भूषण, डॉ. जेबीएस यादव, डॉ. प्रियेश, डॉ. अंकुर तथा डॉ. उदित ने भाग लिया।
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सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के एनेस्थीसिया विभाग के अंर्तगत संचालित हाइपरबेरिक आक्सीजन थेरेपी यूनिट ने काम करना शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. (ब्रिगेडियर) टी. प्रभाकर ने बताया कि हाइपरबेरिक आक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता गंभीर मरीजों की हालत में सुधार के लिए किया जाता है। जब मरीज को दवाएं असर नहीं करतीं तो इस थेरेपी का उपयोग किया जाता है। इससे मरीज को आराम मिलता है। इस थेरेपी में डायबिटीज के मरीजों के अंगों में आक्सीजन की आपूर्ति के लिए अनुकूल परिस्थिति बनाई जाती है। इसके अतिरिक्त स्ट्रोक, मस्तिष्क पक्षाघात, सिर की चोट और क्रोनिक थकान जैसी स्थिति में भी हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी (एचबीओटी) तकनीक कारगर है।
एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मनोज यादव तथा डॉ. भारत भूषण ने बताया कि हाइपरबेरिक आक्सीजन थेरेपी का उपयोग सामान्य चिकित्सा के अतिरिक्त सघन चिकित्सा में किया जाता है। इसके लिए चिकित्सक के लिए व्यापक प्रशिक्षण जरूरी है। डॉ. भारत भूषण ने बताया कि इस थेरेपी के शुरू हो जाने से ट्रामा एवं मस्तिष्काघात के अतिरिक्त मधुमेह से पीड़ित मरीजों के इलाज में काफी सहूलियत होगी। एनेस्थीसिया विभाग ने थेरेपी यूनिट के संचालन के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप लगाया। इसमें एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. मनोज यादव, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. पूजा सिंह, डॉ. उर्वशी यादव, डॉ. भारत भूषण, डॉ. जेबीएस यादव, डॉ. प्रियेश, डॉ. अंकुर तथा डॉ. उदित ने भाग लिया।
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