Kanpur: 60% रोगियों के कंधे सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस से जाम, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में निकला निष्कर्ष
Kanpur News: डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि रोगियों में सबसे पहले कंधे की एमआरआई जांच की जा रही है। कंधे में बीमारी का कारण ढूंढा जा रहा है। अगर कंधे में कोई दिक्कत नहीं है, फिर भी कंधा जाम है तो गर्दन का एमआरआई करा रहे हैं, तो 60 प्रतिशत रोगियों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कंधे का पता चला है।
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कानपुर में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने कंधा जाम यानी फ्रोजन शोल्डर का मुख्य कारण ढूंढ लिया है। बीते छह माह में यहां पर फ्रोजन शोल्डर के 50 रोगियों पर अध्ययन किया गया तो पता चला कि इनमें से 60 प्रतिशत यानी 30 रोगियों को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस है। इस कारण से इन्हें हाथ उठाने में तकलीफ और दर्द हो रहा है। ये सभी मरीज ओपीडी में दिखाने आए थे।
फ्रोजन शोल्डर की वजह जानने के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में पहली बार अध्ययन किया जा रहा है। हैलट के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के पेन मेडिसिन विभाग में छह महीने पहले अध्ययन शुरू हुआ था। करीब तीन साल तक चलने वाले इस अध्ययन में अभी 300 रोगियों को और शामिल किया जाएगा। विभाग के नोडल डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि फ्रोजन शोल्डर तीन से छह साल तक बना रहता है। दबने के कारण नसों के सूजने से यह समस्या होती है। जब नसों में सूजन कम होती है, तो यह बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है।
उन्होंने बताया कि कई रोगियों को ज्यादा दिक्कत होती है तो उनका रेडियोफ्रीक्वेंसी से इलाज किया जाता है। अध्ययन में नया कारण सामने आने के बाद अब रोगियों को सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस का परीक्षण कराने की सलाह दी जाएगी। साथ ही बहुत देर तक गर्दन आगे झुकाने के लिए भी मना किया जाएगा। जिन रोगियों को ज्यादा समस्या होगी, उनके गर्दन की ब्लॉक नसों को सलाई डालकर खोलने की नई तकनीक भी प्रयोग में लाई जाएगी। अध्ययन पूरा होने के बाद ही फ्रोजन शोल्डर के इलाज का नया प्रोटोकॉल तैयार हो सकेगा।
ऐसे किया जा रहा अध्ययन
डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि रोगियों में सबसे पहले कंधे की एमआरआई जांच की जा रही है। कंधे में बीमारी का कारण ढूंढा जा रहा है। अगर कंधे में कोई दिक्कत नहीं है, फिर भी कंधा जाम है तो गर्दन का एमआरआई करा रहे हैं, तो 60 प्रतिशत रोगियों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कंधे का पता चला है।
इन बातों का रखें ध्यान
गर्दन झुकाकर बैठने और घंटों मोबाइल चलाने की आदत से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की बीमारी बढ़ती जाती है। जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती है, वैसे-वैसे फ्रोजन शोल्डर की समस्या भी बढ़ती जाती है।